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बिहार के पांच जांबाजों में नवादा के राजन, बक्सर के अंजनी व वैशाली के सत्यम मिश्र

Gaya News - देश के भव्य सैन्य इतिहास में शनिवार का दिन एक और अध्याय जोड़ गया। इस गौरवशाली क्षणों में भारत को 165 नए जांबाज आफिसर...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:15 AM IST
Gaya News - five jawans of bihar include rajan of nawada satyam mishra of anjani of buxar and vaishali
देश के भव्य सैन्य इतिहास में शनिवार का दिन एक और अध्याय जोड़ गया। इस गौरवशाली क्षणों में भारत को 165 नए जांबाज आफिसर मिले। ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया का ड्रिल स्क्वायर मैदान इसका गवाह बना। इससे पूर्व 14 वीं पासिंग आउट परेड को लेकर ओटीए गया पेशेवर सैन्य वैभव और आकर्षण से सराबोर था। परेड के मुख्य अतिथि रॉयल भूटान आर्मी के मुख्य ऑपरेशन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल बातू त्शेरिंग थे। परेड के शुभारंभ में कैडेट्स ने निरीक्षण अधिकारी को सैन्य सैल्यूट दिया, इसके बाद शानदार मार्च पास्ट किया। इस अवसर पर आर्मी ट्रेनिंग कमान के वीएसएम-जीओसीइनसी ले. जनरल पीसी थिम्मिया एवं ओटीए गया के कमांडेंट ले. जनरल सुनील श्रीवास्तव मौजूद थे। जेंटलमैन कैडेटों की सौम्य मनोहर ड्रिल की छटा इस क्षण को महत्वपूर्ण बना रही थी। मौके पर सैन्य एवं असैन्य गणमान्य व्यक्ति तथा कैडेटों के परिजन उपस्थित थे।

टेक्निकल इंट्री कोर्स क्रमांक-32 के 128 जेंटलमैन कैडेट, जिन्होंने दिसंबर 2015 में अपना एक वर्षीय बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण इस अकादमी से पूरा किया था। ये सभी पासिंग आउट परेड के बाद स्पेशल कमीशन ऑफिसर क्रमांक-41 के 37 जेंटलमैन कैडेटों के साथ अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया। स्पेशल कमीशन ऑफिसर में असम रायफल के 19 कैडेटों ने भी कमीशन प्राप्त किया। प्रशिक्षण पाने वालों में भूटान के भी तीन कैडेट्स शामिल हैं, जो अपने देश में सेना में अपनी सेवा देंगे। वहीं टेक्निकल एंट्री स्कीम क्रमांक-38 के 97 जेंटलमैन कैडेट तकनीकी शिक्षा हेतु देश के विभिन्न सैन्य तकनीकी संस्थानों को भेजे गए।

भूटान के तीन कैडेटों ने भी ट्रेनिंग पूरी की, रॉयल भूटान आर्मी के मुख्य ऑपरेशन अधिकारी रहे मौजूद

कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा, ये जिंदगी है..

र|ेश कुमार|गया

इनके हौसले बता रहे थे कि राष्ट्र सुरक्षा की जिम्मेदारी अब इनके हाथों में है और ये दुश्मन को धूल चटा देने को बेताब हैं। पीओपी के शपथ समारोह के दौरान राष्ट्र गान के बीच इन्होंने देश सेवा का दृढ़ संकल्प लिया। इस बार उत्तरप्रदेश से सर्वाधिक 40, हरियाणा से 15, उत्तराखंड से 15, केरल से 10, मध्यप्रदेश से 9, राजस्थान से 8, पंजाब से 6, बिहार से 5 के अलावे अन्य राज्यों के रहे कैडेट सेना में ऑफिसर्स बने हैं। ओटीए से देश को बिहार ने पांच सेना के अफसर दिए हैं। इसमें नवादा जिले के तेलारी गांव का राजन कुमार, वैशाली जिले के पुरखौली का सत्यम मिश्रा, बक्सर जिले के केशवपुर गांव का अंजनी कुमार मिश्रा, मोतिहारी के अगरवा मोहल्ला के औसफ तेहामी, सीवान के सूर्यबलिया का अतुल प्रताप सिंह शामिल हैं।

किसान बेटे के पुत्र राजन ने नवादा का किया नाम रोशन

पेशेवर किसान के पुत्र नवादा के राजन ने इस बार अपने जिले का नाम रोशन किया। नवादा के रहने वाले राजन के पिता शशिभूषण प्रसाद सिंह और मां गायत्री देवी अपने लाडले को पिपिंग लगाकर फूले नहीं समा रहे थे। वहीं प|ी सुहानी के पांव भी खुशी के इस पल में जमीन पर नहीं टिक रहे थे। शशिभूषण सिंह बताते हैं कि उनका खानदानी पेशा खेती का रहा है। बापू उच्च विद्यालय रोह से इसने मैट्रिक की परीक्षा पास की। एक बार बेटे ने इच्छा जताई तो परिवार के लोगों पलट कर पीछे नहीं देखा और इस मुकाम पर उनका बेटा पहुंचा है।

कुर्बानी देख खून में कुछ कर दिखाने का उबाल था: अंजनी

बचपन से जवानों की कुर्बानी देखने के बाद उसके खून में देश के लिए कुछ कर दिखाने का उबाल होता था। बस यही कारण था कि उसने भी इसकी ठान ली और आज उसकी तमन्ना पूरी हुई है। देश की राष्ट्र सुरक्षा के संकल्प के साथ कुछ कर गुजरने का रवैया है। यह कहना है गोल्ड मेडलिस्ट के अलावे स्वोर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित गोरखा रेजिमेंट के रहे अंजनी कुमार मिश्रा का। बिहार के बक्सर जिले के सिमरी का लाल अंजनी के चेहरे के भाव सैन्य अफसर बनने के बाद प्रफुल्लित दिख रहे थे। यह शुद्ध रूप से किसान परिवार का है।

सदभाव को आत्मसात कर निस्वार्थ सेवा

परेड को संबोधित करते हुए रॉयल भूटान आर्मी के आर्मी चीफ बातू त्शेरिंग ने जेंटलमैन कैडेट्स को बेहतरीन ड्रिल प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उनके गौरवशाली भविष्य की कामना करते हुए कहा कि हम अपनी जिम्मेदारियों को सदभाव का आत्मसात के बीच निस्वार्थ और गौरवमयी रूप से अंजाम तक पहुंचाएं। सैनिकों को अपने जीवन में सैन्य गुण और सदभाव को आत्मसात करना चाहिए। कहा कि वे अभिभावक सौभाग्यशाली होते हैं, जिनके पुत्र प्रतिष्ठित पेशे में सेवा देते हैं, जिसमें सैन्य सेवा भी शामिल है। नए कमीशन प्राप्त अधिकारियों के माता-पिता और अभिभावक के लिए यह जीवन सचमुच महत्वपूर्ण हैं, उनके लिए गौरव की बात है कि उनका बेटा सैन्य सेवा में चयनित हुआ।

शौर्य, ज्ञान और संकल्प के आदर्श वाक्य के साथ हुई थी स्थापना

ओ.टी.ए. गया की स्थापना 18 जुलाई 2011 में आदर्श वाक्य शौर्य, ज्ञान, संकल्प के साथ हुई। अभी यह अकादमी स्पेशल कमीशन ऑफिसर और टेक्नीकल इंट्री स्कीम जो TES और SCO के रूप में क्रमशः जाने जाते हैं, उनका प्रशिक्षण चला रही है। इसमें टीईएस के प्रशिक्षु 10+2 की शिक्षा के बाद अकादमी में प्रवेश पाते हैं और प्रशिक्षण प्राप्त कर सशस्त्र सेना का हिस्सा बनते हैं। टेक्निकल इंट्री स्कीम में प्रवेश पाने वाले कैडेट एक साल का बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर प्रशिक्षण के लिए देश में स्थित सैन्य अभियन्त्रिक संस्थान जाते हैं।

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