भगवान मोह, घमंड, क्रोध का मर्दन करते हैं : रामानुजाचार्य जी महाराज

Gaya News - मानपुर के लक्खीबाग में चल रहे प्रवचन कार्यक्रम में पूज्यपाद श्री स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज ने कहा कि...

Nov 11, 2019, 07:25 AM IST
मानपुर के लक्खीबाग में चल रहे प्रवचन कार्यक्रम में पूज्यपाद श्री स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान मोह, घमण्ड, क्रोध का मर्दन करते हैं। पंचवर्षीय भगवान श्रीकृष्ण ग्वाल वालों के साथ बैठ कर वन में भोजन कर रहे थे। स्वर्ग के देवता आश्चर्यचकित होकर इस अदभुत लीला को देख रहे थे। उसी समय उनके गाय बछङे हरी-हरी घास के लोभ में जंगल में बहुत दूर निकल गये थे। जब ग्वालवालों का ध्यान उस ओर गया तब ये भयभीत हो गये। उस समय भक्तों को भय दूर करने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम लोग भोजन करना बन्द मत करो मैं अभी गाय बछङों को ले आता हूं । भगवान श्री कृष्ण हाथ में दही भात का कोवर लिये ही पहाड़ों, गुफाओं आदि स्थानों में गायों को ढूंढने लगे परन्तु गायें नही मिली। क्योंकि ब्रह्मा जी गाय बछड़ों को यौगिक क्रिया के द्वारा बहुत दूर लेकर चले गये थे। ब्रह्मा ने जब देखा कि कृष्ण गाय खोजते चल रहे है तब ब्रह्मा ने उनके साथी को भी चुरा लिया। भगवान श्री कृष्ण ने विचार किया कि आज गायों और बछङों के वियोग में ब्रजवासी अपने शरीर त्याग देंगे। अतः संपूर्ण विश्व के कर्ता सर्व शक्तिमान भगवान श्री कृष्ण जितने ग्वाल बाल एवं गाय बछड़े थे उनके स्वरूप और अवस्था के अनुसार ही भगवान श्री कृष्ण ने गाय बछड़ों एवं ग्वालवालों का रूप धारण कर लिया। संध्या समय गाय एवं बछड़े अपने- अपने घर में चले गये। किसी को समझ में नहीं आया कि हमारे गाय बछड़ा और ग्वालबाल नहीं है। प्रतिदिन भगवान श्री कृष्ण प्रातःकाल उन साथियों के साथ गाय बछड़ों को लेकर जंगल में जाते रहे जब एक वर्ष में दो तीन दिन बाकी बच रहे थे, तब ब्रह्मा जी आकर देखने लगे।

प्रवचन करते रामानुजाचार्य।

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