जहानाबाद से ग्राउंड रिपोर्ट / जदयू को सोशल इंजीनियरिंग राजद को अपने वोटों से उम्मीद



Ground Report from Jahanabad Lok Sabha seat
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Ground Report from Jahanabad Lok Sabha seat

  • आधार वोट को एकजुट रखना दोनों के लिए चुनौती
  • जहानाबाद लोकसभा सीट के लिए 19 मई को वोटिंग

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 05:25 AM IST

गया (कमलेश कुमार). जहानाबाद संसदीय क्षेत्र का सृजन 1962 में हुआ। सत्यभामा देवी यहां की पहली सांसद बनीं। तब से अब तक जहानाबाद संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व भूमिहार अथवा यादव जाति के लोग ही करते रहे हैं। इस बार एनडीए और महागठबंधन दोनों में से किसी ने भूमिहार जाति के नेता को टिकट नहीं दिया है।

 

नीतीश कुमार ने नई सोशल इंजीनियरिंग का प्रयोग करते हुए जदयू से  अतिपिछड़ा समाज के चंदेश्वर चंद्रवंशी को मैदान में उतारा है। महागठबंधन की ओर से राजद ने फिर बेलागंज के विधायक डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद यादव पर भराेसा जताया है। डॉ. यादव पिछले दो चुनावों में लगातार हार चुके हैं। दोनों गठबंधन को अपने आधार वाले जातीय वोटरों को गोलबंद रखना इस बार बड़ी चुनौती है। एनडीए पर भूमिहारों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। नाराजगी शहर से गांव तक दिख रही है। भूमिहार अपनी ताकत निवर्तमान सांसद अरुण कुमार को समर्थन देकर दिखाना चाहते हैं।

 

अरुण कुमार ने अपनी पार्टी बना ली है। भूमिहारों की नाराजगी दूर करने के लिए एनडीए के कई बड़े भूमिहार नेता सभा-बैठक कर रहे हैं। इधर महागठबंधन के राजद प्रत्याशी डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद यादव के लिए तेजप्रताप यादव समर्थित उम्मीदवार चंद्रप्रकाश और बसपा से अरवल नगर परिषद के मुख्य पार्षद नित्यानंद राय चुनौती बने हुए हैं। तेजप्रताप यादव कई सभाएं कर चुके हैं। इनका सीधा हमला राजद प्रत्याशी पर ही रहा है। दलित-महादलित और कुशवाहा समाज का रुझान निर्णायक हो गया है। इन वोटों को अपनी ओर करने में दोनों गठबंधन लगे हैं। एनडीए के दो और महागठबंधन के एक विधायक कुशवाहा समाज से हैं। 

 

जदयू और राजद में आमने सामने का मुकाबला

 

डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद यादव, राजद: बेलागंज के विधायक हैं। सात बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं। राज्य मंत्री भी रहे। 1998 में पहली बार जहानाबाद से सांसद चुने गए। पिछले दो लोकसभा चुनाव में हार मिली।

 

चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, जदयू: 1995 में समता पार्टी में शामिल होकर सक्रिय राजनीति की शुरुआत की। 2000 में समता पार्टी के टिकट पर ओबरा से चुनाव लड़े और हार गये। कई पदों पर रह चुके हैं।

 

तेजप्रताप की अलग राह

बिहार की यह इकलौती सीट है, जहां लालू प्रसाद के दोनों बेटे तेजप्रताप यादव एवं तेजस्वी यादव अलग-अलग प्रचार कर रहे हैं। तेजस्वी यादव नौ सभाएं कर चुके हैं। तेजप्रताप भी सात बार आ चुके हैं। लालू प्रसाद के बेटे होने के कारण तेजप्रताप को लोग देखने-सुनने के लिए जरूर जुट रहे हैं, परंतु आधार वाले वोटरों को यह अहसास है कि ये सिर्फ महागठबंधन प्रत्याशी से व्यक्तिगत खुंदक निकाल रहे हैं।

 

हम और वीआईपी से उम्मीद

जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र में राजद का माय समीकरण मजबूत है। वीआईपी के सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी की कतार से भी आसरा है। दलित-महादलित अौर कुशवाहा वोटों को जितना समेट सकेंगे, वही सुरक्षित जोन में ले जा सकता है। उपेंद्र कुशवाहा के कारण राजद को उम्मीद है कि उसे कुशवाहा वोट भी मिलेंगे। भूमिहार बिरादरी की नाराजगी का सीधा फायदा लेने की कोशिश कामयाबी दिला सकती है। महादलित वोटरों पर पूर्व सीएम जीतनराम मांझी का असर जितना अधिक होगा, उतनी ही स्थिति मजबूत होगी। इस तरह मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
 

नाराज खेमे को मनाने का प्रयास

सर्जिकल स्ट्राइक सहित मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने का मुद्दा और नीतीश कुमार की विकास यात्रा के नाम पर वोटरों के गोलबंद होने की उम्मीद। महादलितों को घर और गैस कनेक्शन योजना से आकर्षित करने की कोशिश। कुशवाहा समाज से एक मंत्री और विधायक के माध्यम से इस समाज को साधने का प्रयास। भूमिहार समाज की नाराजगी दूर होने का भरोसा। नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं पहल कर रहे हैं। रांची जेल से पूर्व सांसद डॉ. जगदीश शर्मा के पत्र के माध्यम से अपील का प्रचार। पूर्व विधायक राहुल शर्मा भी सक्रिय।

 

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