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संग्रहणीय है संवाद का मगध होली विशेषांक

एक वर्ष पहले
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गया जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन में पत्रकार फाउंडेशन गया द्वारा प्रकाशित संवाद के दसवें अंक का लोकार्पण साहित्यकारों व कवियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। लोकार्पण के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामकृष्ण मिश्र ने कहा कि संवाद का मगध होली विशेषांक संग्रहणीय है।

वैसे, संवाद का हर अंक संजोने के काबिल होता है। वहीं इतिहासकार डॉ. राकेश कुमार सिन्हा रवि ने कहा कि इंटरनेट युग में जब पत्र-पत्रिकाओं से पाठकों की दूरी बढ़ रही है, वैसे में विषय आधारित अंक का प्रकाशन सराहनीय पहल है।

मगही साहित्यकार सुमंत ने इस प्रयास को सराहा और कहा कि ऐसी कोशिश की जितनी सराहना की जाए कम है। संवाद’’ के संपादक वरिष्ठ पत्रकार सुनील सौरभ ने कहा कि मगध को जानने-समझने के लिए यह अंक सहायक है। मगध की संस्कृति और परंपरा को ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्यों के साथ लेखकों ने प्रस्तुत किया है। मगध होली विशेषांक में होली वासना नहीं उपासना का पर्वोत्सव, मगध में बुढ़वा होली का अपना रंग, मगध के होली गीत, होली वसन्त का सन्देशवाहक, गया की होली, होली गीतों में प्रेम और भक्ति, मगध की होली, होली का स्त्रीवादी पक्ष: एक प्रश्न आलेख, होली, बुढ़वा मंगल और पंडित देवन मिश्र जैसे आलेख शामिल हैं।इस अवसर पर समीक्षक अरुण हरलीवाल, मुकेश कुमार सिन्हा, कवि मुंद्रिका सिंह, रवि दीवाना, अजीत कुमार, निरंजन श्रीवास्तव आदि साहित्य सेवी उपस्थित थे।

पुस्तक का विमोचन करते साहित्यकार।
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