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प्लाजियरिज्म डिटेक्टर प्लेटफॉर्म शोधगंगा से जुड़ा मगध विश्वविद्यालय, राज्य में पहला

सूबे में मगध विवि की सेंट्रल लाइब्रेरी ने शोध प्रबंध में साहित्यिक चोरी (प्लाजियरिज्म) रोकने के लिए शोधगंगा में...

Danik Bhaskar

Sep 13, 2018, 03:25 AM IST
सूबे में मगध विवि की सेंट्रल लाइब्रेरी ने शोध प्रबंध में साहित्यिक चोरी (प्लाजियरिज्म) रोकने के लिए शोधगंगा में शामिल होने के लिए अहमदाबाद के इन्फलिबनेट सेंटर के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया है। मगध विवि सूबे का पहला विवि है, जिसने शोध में कट-पेस्ट या साहित्यिक चोरी रोकने की पहल की है। थाइलैंड सरकार द्वारा मगध विवि के शोध की गुणवत्ता पर अंगुली उठाने के बाद ही कुलपति प्रो कमर अहसन ने प्लाजियरिज्म रोकने की इच्छा जताई थी। एकेडमिक कौंसिल ने 13 अगस्त को यूजीसी शोधगंगा का प्रमाणपत्र आवश्यक करने की अनुशंसा कर दी थी व 16 अगस्त को सिंडिकेट ने स्वीकृति प्रदान कर कानूनी स्वरूप प्रदान किया था। अब कोई भी शोध प्रबंध बिना शोधगंगा के नो ऑब्जेक्शन प्रमाणपत्र का जमा नहीं होगा।

क्या होगा फायदा: प्लाजियरिज्म डिटेक्टर प्लेटफार्म शोधगंगा से जुड़ने के बाद शोध में गुणवत्ता बढ़ेगी। साफ्टवेयर में शोध की कॉपी डाउनलोड करते ही नकल की फीसदी बताएगा व सुधार की अनुशंसा करेगा। एक ही शोध की बार-बार कॉपी होना बंद होगा।

क्या है शोधगंगा

शोधगंगा भारत के शोधप्रबंध का ऑनलाइन इलेक्ट्रानिक भण्डार है। योजना के तहत देश के सभी विवि की केंद्रीय लाइब्रेरी को जोड़ा जा रहा है। विवि में पीएचडी व एमफिल अवार्ड करने के बाद थीसिस की सीडी शोधगंगा पर अपलोड होगा। इससे सभी विवि के शोधप्रबंध ऑनलाइन होगा जिससे शोध प्रबंध में कट-पेस्ट पर रोक लगेगी

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