पितृपक्ष महासंगम / पितरों की याद में पौधे लगाकर उन्हें बनाएं अमर: डिप्टी सीएम



डिप्टी सीएम को चरण चिह्न प्रदान करते डीएम। डिप्टी सीएम को चरण चिह्न प्रदान करते डीएम।
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डिप्टी सीएम को चरण चिह्न प्रदान करते डीएम।डिप्टी सीएम को चरण चिह्न प्रदान करते डीएम।

  • पितृमुक्ति के महापर्व पितृपक्ष मेला का उपमुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन 
  • पितृ वाटिका में 40 हजार पौधे लगाने का रखा गया है लक्ष्य

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 11:20 AM IST

गया. गया जी में पिंडदान करने आने वाले तीर्थयात्रियों को विष्णुपद मंदिर परिक्षेत्र में स्थित पितृवाटिका में अपने पितरों की याद में एक पौधा जरूर लगाना चाहिए। इन पौधों के बड़े होने पर उसकी छांव में बैठने वाले लोग एक बार जरूर उन पितरों को याद करेंगे। इससे आपके पितर भी अमर हो जाएंगे। यह बातें विष्णुपद मंदिर परिसर में गुरुवार शाम आयोजित पितृपक्ष महासंगम-2019 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सूबे के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कही। उन्होंने कहा कि गया और बोधगया के विकास के लिए राज्य व केंद्र सरकार कृतसंकल्पित है। इसके लिए पैसों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। डिप्टी सीएम ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार मिलकर गया-बोधगया को विश्वस्तरीय रूप से विकसित करने के प्लान पर काम कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान गयापाल पंडा समाज द्वारा देवघाट से सीताकुंड तक रोपवे निर्माण की मांग पर डिप्टी सीएम ने उसे शीघ्र पूरा करने की घोषणा की।

 

गया के कण-कण में है धार्मिकता, यहां भगवान विष्णु का स्थान
डिप्टी सीएम ने कहा कि गया जी की धरती काफी पावन है क्योंकि यहां भगवान विष्णु का स्थान है। इसके बगल में 24वें तीर्थांकर भगवान महावीर पैदा हुए। मगध का क्षेत्र हिंदू, बौद्ध व जैन धर्मावलंबियों के लिए काफी पवित्र भूमि है। आज पूरी दुनिया विशेषकर बौद्ध देश बोधगया को पवित्र भूमि मानते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में झारखंड के बंटवारे के बाद लोग मजाक करते थे कि खनिज संपदा, कोयला, कल-कारखाने सब झारखंड में चला गया। अब बिहार में कुछ नहीं बचा। मैंने कहा था कि हमारे पास जो है वह कहीं नहीं है। हमारे पास भगवान विष्णु, महात्मा बुद्ध और भगवान महावीर हैं। जैन धर्मावलंबियों को मुक्ति के लिए पावापुरी, बौद्ध धर्मावलंबियों को बोधगया तथा हिंदू धर्मावलंबियों को गया आना जरुरी है। गया और बोधगया के विकास के लिए 13 वर्षों में जो किया गया है। उसे आने वाले लोग महसूस कर सकते हैं।

 

तीर्थयात्री हैं हमारे ब्रांड एंबेस्डर, उनकी सेवा का रखें ध्यान
डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि गया जी में पिंडदान के लिए आने वाले तीर्थयात्री हमारे ब्रांड अंबेस्डर हैं। उन्हें यहां इस प्रकार का माहौल व सुविधा उपलब्ध कराए, ताकि वे गया से लौटकर पूरे जीवन गया और बोधगया को याद रखें। इसके लिए सभी का सहयोग जरुरी है। उन्होंने पूरे वर्ष गया को स्वच्छ रखने का आह्वान करते हुए कहा कि पितृपक्ष मेला के दिनों में कहीं भी गंदगी नहीं दिखनी चाहिए।

 

पेयजल के संकट को दूर करने के लिए राज्य सरकार तत्पर
गया परिक्षेत्र के रोम-रोम में धर्म का वास है। इस परिक्षेत्र में आए बिना हिंदू, बौद्ध व जैन धर्म के श्रद्धालुओं को कभी भी मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती है। यह बातें सूबे के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार शाम विष्णुपद मंदिर परिसर में विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि गया, नवादा और नालंदा क्षेत्र के नागरिकों को होने वाली पेयजल के संकट को दूर करने के लिए राज्य सरकार तत्पर है। इसके लिए गंगा नदी से बाढ़ के पास पाइप द्वारा जलनिकासी की व्यवस्था कर उसे अंतःसलिला फल्गु नदी से मिलाने की योजना बनाई जा रही है। इससे पूर्व डिप्टी सीएम मोदी, पर्यटन मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, राजस्व व भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मंडल, कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, सूबे के शिक्षा, विधि सह उर्जा मंत्री सह गया जिला के प्रभारी मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा सहित अन्य ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पितृपक्ष मेला का उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम श्री मोदी ने कहा कि पूरे विश्व में गया ही एकमात्र ऐसा शहर है जिसे लोग गया जी बोलकर संबोधित करते हैं।

 

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