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नामवर सिंह ने साहित्य को नई संस्कृति दी

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 03:16 AM IST

Gaya News - मविवि के हिंदी विभाग में शनिवार को डाॅ. नामवर सिंह के स्मृतिशेष पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी डाॅ. नामवर सिंह के...

Gaya News - namvir singh gave a new culture to literature
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मविवि के हिंदी विभाग में शनिवार को डाॅ. नामवर सिंह के स्मृतिशेष पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी डाॅ. नामवर सिंह के आलोच्य संस्कृति विषय पर आयोजित की गई। संगोष्ठी का उद्घाटन मविवि के कुलसचिव कर्नल प्रणय कुमार ने किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मविवि के अध्यक्ष छात्र कल्याण डाॅ. प्रो. सत्यर| प्रसाद सिंह ने कहा कि डाॅ. नामवर सिंह हिन्दी साहित्य के प्रति एक नई विमर्श का नाम है। उन्होंने साहित्य जगत को आलोचना और संस्कृति के प्रति नए विमर्श दिए। आधुनिक भारत में उन्होंने मार्क्सवाद और आलोचना के माध्यम से सामाजिक सरोकार को पूर्ण करने का प्रय| अपनी लेखनी के माध्यम से किया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रो. विनय कुमार ने कहा कि डाॅ. नामवर सिंह के कृति और लेख समसामयिक और साहित्य को उन्नत करने वाली है। उनकी आलोचना को समझने के लिए सभी साहित्य को जानने और समझने वाले लोगों को पढ़ना जरूरी है। संगोष्ठी काे संबोधित करते हुए दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापक योगेश प्रताप शेखर ने कहा कि 60 सालों से प्रमुख आलोचकों की श्रेणी में नामवर सिंह का नाम इसलिए शामिल है, क्योंकि उन्होंने साहित्य जगत को नए लेखक और साहित्यकारों को एक नई संस्कृति दी। उनकी आलोचना धर्मिता समसामयिक थी, हजारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा को उन्होंने विकसित किया। ये भारतीय संस्कृति को हिन्दी संस्कृति की ओर ले आने वाले आलोचक हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य सत्येन्द्र कुमार ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आजाद भारत में जनचेतना हेतु मार्क्सवाद चिंतन, आलोचना, हिन्दी साहित्य और भारतीय संस्कृति को समझने के लिए लिए नामवर सिंह की सभी कृतियाें का अध्ययन आवश्यक है। उन्हाेंने लेखनी के माध्यम से सामंती चेतना और समाज की विवशता को उजागर किया। नामवर सिंह प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े थे और मार्क्सवादी विचारधारा के प्रति उनकी लेखनी में नजर आती है।

संगोष्ठी में हिंदी विभाग के प्राध्यापक डाॅ. भरत सिंह, डाॅ. सुनील कुमार कमलेश कुमार, प्रवेश कुमार, कस्तुरी लाल, सत्येन्द्र कुमार, दिवाकर कुमार, मणिकांत कुमार, शारदा कुमारी, वंदना कुमारी, प्रियंका कुमारी थीं।

संगोष्ठी में उपस्थित लोग।

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