मुठभेड़ / लैंडमाइंस ब्लास्ट कर नक्सलियों ने फोर्स पर बरसाईं गोलियां, एसआई रौशन शहीद, एक जवान जख्मी



naxal attack on cobra battalion in sherghati gaya one ASI death
X
naxal attack on cobra battalion in sherghati gaya one ASI death

  • ब्लास्ट से कोबरा बटालियन के एसआई का उड़ गया था पैर, पटना लाने के दौरान गई जान

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 10:07 AM IST

गया. बिहार के गया जिले के शेरघाटी में छापेमारी करने पहुंचे कोबरा और सीआरपीएफ जवानों को देख लंगुराही जंगल में माओवादियों ने आईईडी ब्लास्ट किया, जिसमें कोबरा 205 के सब इंस्पेक्टर रौशन कुमार का पैर उड़ गया। घायल एसआई को हेलीकॉप्टर से इलाज के लिए पटना भेजा गया। उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शहीद एसआई लखीसराय के रहनेवाले थे। एक जवान जख्मी भी हुआ है। जख्मी डीके बोरा असोम का है। 

 

गया जिले के डुमरिया और औरंगाबाद जिले के पचरूखिया के बीच माओवादियों ने बुधवार की शाम आईईडी ब्लास्ट किया। इसके बाद कोबरा और सीआरपीएफ जवानों पर गोलीबारी शुरू कर दी। दोनों ओर से सैकड़ों राउंड फायरिंग होने की खबर है। शीर्ष नक्सली संदीप के दस्ते के जंगल में होने की जानकारी पर फोर्स पहुंची थी। माओवादियों ने आईईडी ब्लास्ट इसलिए किया था ताकि कोबरा जवानों को संभलने का मौका नहीं मिल सके। लेकिन सुरक्षाबलों ने माओवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

 

सूर्यास्त के समय शुरू फायरिंग दो घंटे तक चली
ब्लास्ट व गोलीबारी के बाद माओवादी हथियार लूटने की फिराक में थे। इससे पहले कि वे अपने मंसूबे में सफल हो पाते। सुरक्षाबलों ने पोजीशन ले लिया और माओवादियों को निशाना बनाकर फायरिंग शुरू कर दी। बताया जाता है कि सूर्यास्त के समय शुरू हुई फायरिंग दो घंटे तक चली। रूक-रूककर दोनों ओर से फायरिंग चल रही थी। 

 

डुमरिया और पचरूखिया का भौगोलिक इलाका सुरक्षाबलों के अभियान के लिहाज से काफी जोखिमभरा माना जाता है। घने जंगलों और पहाड़ियों में माओवादी सुरक्षाबलों की आने की सूचना पर कहीं भी कभी भी घात लगाकर हमला बोल देते हैं। यह इलाका मुख्यधारा से कटे होने के कारण सुरक्षाबलों को यहां की गतिविधियों की जानकारी भी मुश्किल से मिलती है। बताया जाता है कि इस इलाके के ज्यादातर लोग माओवादियों के प्रभाव में हैं।

 

3 किमी तक सुनाई पड़ा धमाका
माओवादियों ने लंगुराही में दोनों तरफ से आईईडी लगा रखा था जो बेहद ही घातक किस्म का था। इसकी विस्फोट की आवाज तीन किमी दूर तक सुनाई पड़ी थी। और यही कारण भी था कि जवानों को संभलने में काफी वक्त लगा। बताया जाता है कि एंबुश सुनियोजित था जो पुख्ता सूचना के आधार पर ही लगाया जा सकता है। जवानों को कैंप से निकलते ही माओवादियों को इसकी भनक लग गई थी।

 

कई दिनों से पहुंचा था संदीप का दस्ता 
लंगुराही जंगल में आईईडी ब्लास्ट को माओवादियों ने सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया है। पहले ही इसकी तैयारी कर ली गई थी। माओवादी की एक टुकड़ी कई दिनों से डेरा डाले हुई थी। माओवादियों ने कि टुकड़ी की सूचना पर सुरक्षाबल जरूर आएंगे। इसके बाद हमला किया जाएगा। बताया जाता है कि इसको लेकर कई जगह पर आईईडी प्लांट किया था। सोर्स बताते हैं कि माओवादियों की जमावड़े की सूचना पर औरंगाबाद और डुमरिया की पुलिस जंगल की ओर निकली थी ताकि वे दोनों ओर से माओवादियों को घेर सकें, पर कोबरा टीम खुद ही माओवादियों की जाल में उलझ गई।

 

लखीसराय के रहने वाले थे कोबरा 205 के सब इंस्पेक्टर रौशन
माओवादियों की जमावड़े की सूचना पर 205 बटालियन कोबरा, 159 बटालियन सीआरपीएफ और 153 बटालियन सीआरपीएफ के 200 से अधिक सुरक्षाबलों की टीम छह अलग-अलग दिशाओं से निकली थी। सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि माओवादी ठहरे हुए हैं और इनकी गतिविधि तेज है। इसी सूचना पर सुरक्षाबलों ने जंगल में छापेमारी की और एंबुश में फंस गए। जिससे लखीसराय जिला का रहनेवाला कोबरा के एक एसआई की मौत हो गई। रौशन गरसंडा गांव के रहने वाले थे। वे मिथिलेश कुमार के पुत्र थे। 

 

हमले का अंदाज से यहीं लगता है कि इसमें माओवादियों के 25 लाख का इनामी विजय यादव उर्फ संदीप का हाथ है। यह पांच राज्य के पोलित ब्यूरो के सदस्य है। इसके साथ माओवादियों का दो बटालियन हमेशा रहता है। इधर खुफिया विभाग ने भी आगाह किया था कि क्षेत्र में संदीप का टीम आया है और कोई बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में है। 15 साल से इनामी को पकड़ने के लिए सुरक्षाबल अभियान चला रहे हैं।

 

कतार में थे जवान, अन्यथा होती भारी क्षति
सीआरपीएफ सोर्स बता रहे हैं कि कैंप से सुरक्षाबलों की अलग अलग टीम निकली थी। इस बीच टीम के कुछ जवान पहले पहुंच चुके थे। इस बीच कुछ जवान माओवादी जमावड़े वाली जगह पर पहुंचानेवाले थे कि रास्ते में नक्सलियों ने आईईडी लगा रखा था। जैसे ही जवान कतार में आगे बढ़े कि आईईडी ब्लास्ट कर गया। जवान यदि कतार में नहीं होते तो फोर्स को ज्यादा क्षति हो सकती थी। कतार में होने के चलते सिर्फ एसआई रौशन ब्लास्ट की चपेट में आए। इसके बाद तत्काल पीछे चल रहे जवानों ने मोर्चा ले लिया। इसके बाद माओवादियों ने फायर झोंक दिया। मुठभेड़ के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए कुछ जवानों ने घायल एसआई को विकट परिस्थितियों में लंगुराही जंगल से बाहर निकाला और उन्हें पटना भेजा गया।

COMMENT