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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए अभिभावक

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:50 AM IST

Gaya News - निजी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन द्वारा किए जा रहे शोषण के विरोध में खिजरसराय बाजार...

Kijarsray News - parents united against the arbitrariness of private schools
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निजी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन द्वारा किए जा रहे शोषण के विरोध में खिजरसराय बाजार में बैठक कर आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया है। अभिभावक मंच के संयोजक सुनील शर्मा ने बताया की प्रखंड के अधिकांश स्कूल में शिक्षा के अधिकार कानून का खुलेआम मजाक बनाया जा रहा है। शिक्षकों को अभी भी दो से तीन हजार रुपए प्रतिमा मेहनताना के रूप में दिया जाता है और अभिभावकों से हजारों रुपए फीस के रूप में वसूला जाता है। मौके पर पंकज कुमार, नागेंद्र कुमार राही सहित सैकड़ों लोगों ने शिक्षा को व्यवसाय बनाकर भोले-भाले अभिभावकों को लूट रहे विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

मनमानी करने वालों के खिलाफ आंदोलन का लिया निर्णय

अभिभावक ने कहा- दूसरी कक्षा में पढ़ रहे बच्चे को 12 किताबें दी जा रहीं

अभिभावक मुकेश कुमार ने बताया कि दूसरी कक्षा में पढ़ रहे बच्चे को 12 किताब दिया गया है। सभी किताब अलग प्रकाशन की है। अभिभावक चाह कर भी बाजार से इसको खरीद नहीं सकते हैं।

खिजरसराय प्रखंड के निजी स्कूल पूरी तरह मनमानी पर उतर आए हैं। मनमाने ढंग से फीस निर्धारित करने वाले निजी स्कूल संचालकों ने नया सत्र शुरू होते ही ड्रेस, जूता-मोजा के साथ ही किताबों और ड्रेस के लिए दुकानों से सेटिंग कर रखी है। कहीं-कहीं तो खुद स्कूल में ही किताब-कॉपी और ड्रेस की बिक्री की जा रही है। कॉपी-किताब और ड्रेस से भी इनके द्वारा मोटी कमाई की जा रही है।

बीडीओ ने कहा- स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम


किताबें एक खास दुकान से ही लेने को कहा जाता है, हर साल बदल भी देते हैं

शहर के निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा और व्यवस्था का लॉलीपॉप देकर अभिभावकों को ठगा जा रहा है। फीस निर्धारण में मनमानी करने वाले स्कूल संचालकों ने चालू शिक्षा सत्र में फीस में 20 से 30 फीसदी इजाफा कर दिया है। अधिकांश निजी स्कूल ऐसे हैं जिन में प्रतिवर्ष नए पाठ्यक्रम की पुस्तकें लागू कर दी जाती है और वह भी एक निश्चित दुकान से खरीदने को मजबूर किया जाता है। प्रतिवर्ष पुस्तकों को बदलने और ड्रेस चेंज करने के पीछे और कुछ नहीं बल्कि अभिभावकों का आर्थिक शोषण करना लक्ष्य होता है। वास्तव में निजी स्कूलों पर किसी का अंकुश नहीं रह गया है।

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