लापरवाही / प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी आसानी से कैमरा लेकर पहुंचते हैं लोग, नहीं होती निगरानी

प्रतिबंध के बावजूद बोधिवृक्ष तक पहुंचा प्रोफेशनल फोटोग्राफर। प्रतिबंध के बावजूद बोधिवृक्ष तक पहुंचा प्रोफेशनल फोटोग्राफर।
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प्रतिबंध के बावजूद बोधिवृक्ष तक पहुंचा प्रोफेशनल फोटोग्राफर।प्रतिबंध के बावजूद बोधिवृक्ष तक पहुंचा प्रोफेशनल फोटोग्राफर।

  • महाबोधि मंदिर में प्रवेश के दौरान होती है जांच, फिर भी प्रतिबंधित सामान पहुंच जाता है भीतर
  • पुरातात्विक धरोहर वोटिव स्तूप के पास आसानी से बैठकर खाना खाते हैं पर्यटक

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 11:40 AM IST

बोधगया. महाबोधि मंदिर कहने को तो विश्व धरोहर है, इसके संचालन को नियम-कानून भी, नहीं है तो मॉनिटरिंग। बीटीएमसी के सभी अधिकारी का प्रश्नों का एक जवाब है, महाबोधि मंदिर लाइव(जीवंत) है, धार्मिक गतिविधियों को रोका नहीं जा सकता। इसी कारण यहां सभी को मनमानी की खुली छूट दी जाती है। 

बोधिवृक्ष के निकट प्रतिबंध के बावजूद प्रोफेशनल फोटोग्राफर पहुंचते हैं। यही नहीं पुरातात्विक धरोहरों वोटिव स्तूप के बीच कुछ भी करने की छूट है। इसकी कोई मॉनिटरिंग नहीं होती है। मंदिर प्रवेश की जांच होती है, निकासी की नहीं। अगर कोई वोटिव स्तूप के साथ छेड़छाड़ कर उसकी प्राचीन मूर्ति को निकाल चलता बने, तो रोक नहीं है। शायद सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में कैद होगा, तभी खोज होगी। यह समझना होगा महाबोधि मंदिर लाइव मंदिर के अलावा पुरातात्विक धरोहर भी है, जिसके संरक्षण की कुछ मानक भी है। विश्व धरोहर होने के कारण विश्व की दृष्टि यहां की गतिविधियों पर लगी रहती है।

मंदिर परिसर के दक्षिण हिस्से तक ही फोटोग्राफर को जाना है, जिसके लिए बीटीएमसी ने फोटो परिचयपत्र भी जारी किया। मंदिर के दक्षिण हिस्से के पार्क तक ही उन्हें जाने की अनुमति है, बावजूद इसके वे अतिसंवेदनशील बोधिवृक्ष के निकट भी पहुंच जाते हैं। इन्हें परिचय पत्र जारी करने के बाद बीटीएमसी की मॉनिटरिंग नहीं है। जबकि बीटीएमसी को समय-समय पर इसकी निगरानी की जरूरत है।

शुंग से पाल काल के हैं वोटिव स्तूप
वोटिव स्तूप को संकल्पित स्तूप कहते हे। इसे पुराने समय से श्रद्धालुओं द्वारा अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए लगाया जाता रहा है। ये शुंग काल से लेकर पाल काल तक के और कुछ बाद के है। इन स्तूपों में सहस्र बुद्ध, बुद्ध की विभिन्न मुद्राएं, बोधिसत्वों व उनकी शक्तियों तारा सहित अन्य की मूर्ति स्थापित हैं, जिनका अपना धार्मिक महत्व है।

निगरानी की है जरूरत
बीटीएमसी द्वारा समय-समय पर मंदिर के लिए काम करने वाली एजेंसी की निगरानी की जरूरत है। निगरानी में शिथिलता बरते जाने के कारण ही गलत काम हो रहे हैं। बैठक में इनपर चर्चा होती है, लेकिन क्रियान्वयन नहीं होता, जिससे सभी का मनोबल बढ़ा है। बीटीएमसी का मानना है कि यह मंदिर लाइव(जीवंत) है, धार्मिक गतिविधियां करने से नहीं रोक सकते। जबकि विशेष शाखा ने दो माह पहले पत्र जारी 17 बिंदुओं पर अलर्ट किया है।

वोटिव स्तूप में लगी हैं पुरानी मूर्तियां
महाबोधि मंदिर के उत्तरी छोर में स्थापित कई ऐतिहासिक वोटिव स्तूप (संकल्पित स्तूप) हैं। इन वोटिव स्तूपों के बीच बौद्ध लामा सहित अन्य को बैठे देखा जा सकता है। वे यहां भोजन करते हैं, साधना सहित अन्य काम करते हैं। इन वोटिव स्तूपों में कई दो सालों से टूटे पड़े हैं, जिनसे मूर्तियों को निकालने की भी संभावना है। इन्हीं वोटिव स्तूप के निकट तारा मंदिर के पास भी 2013 के सीरियल बम ब्लास्ट में एक बम विस्फोट हुआ था। संवेदनशीलता को देखते हुए, इस क्षेत्र में बैठने सहित कामों पर प्रतिबंध रहना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं है। कई बार उन्हें वोटिव स्तूप से छेड़छाड़ भी करते देखा जाता है।

बीटीएमसी कार्यालय ने बताया कि बीटीएमसी सुरक्षाकर्मियों के अलावे समय-समय पर भिक्षु व सचिव खुद भी ध्यान रखते हैं। इसके लिए एक सुपरवाइजर भी है। बावजूद कभी-कभी फोटोग्राफर चले जाते हैं। वोटिव स्तूप के निकट साधना करने को लामा जाते हैं।

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