गया / पिंडदानियों ने गोदावरी में किया पिंडदान, फल्गु श्राद्ध से शुरू हुआ 17 दिनी कर्मकांड



गया में फल्गु नदी किनारे स्थित विष्णुपद मंदिर। गया में फल्गु नदी किनारे स्थित विष्णुपद मंदिर।
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गया में फल्गु नदी किनारे स्थित विष्णुपद मंदिर।गया में फल्गु नदी किनारे स्थित विष्णुपद मंदिर।

  • गोदावरी में स्नान करने से 21 कुल का उद्धार होता है
  • गया श्राद्ध करने से सात गोत्र व 101 कुल का उद्धार होता है

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 11:15 AM IST

गया. पुनपुन नहीं जाने वाले पिंडदानियों ने गुरुवार को शहर के गोदावरी स्थित पुनपुना वेदी पर श्राद्ध किया। शुक्रवार को फल्गु श्राद्ध व तीर्थ-पुरोहित के पांव पूजन के साथ 17 दिनी कर्मकांड शुरू हुआ। मंदिर के महंथ सह बाबा गिरिद्धेश्वरनाथ शिव मंदिर ट्रस्ट के सचिव मन्नु कुमार गिरि ने बताया कि अनादि काल से मान्यता है कि गया श्राद्ध प्रारंभ करने के पूर्व भाद्र शुक्ल चतुर्दशी को पटना स्थित पुनपुन नदी में स्नान व पुत्रों का मुंडन कर श्राद्ध करने के उपरांत गया आना चाहिए, जो तीर्थयात्री पुनपुन नहीं जा पाते है, उनके लिए गयाधाम में ही गोदावरी सरोवर में स्नान व पिंडदान का विधान रखा गया है।

 

गोदावरी में स्नान से 21 कुलों का हो जाता है उद्धार
"स्नातो गोदावरी तीरे त्रिसपृकल मुद्धरेत'। इसका अर्थ है कि गोदावरी में स्नान करने से 21 कुल का उद्धार होता है। इस तालाब का महत्व अनादि काल से चल रहा है, जो तीर्थयात्री पटना स्थित पुनपुन वेदी में पिंडदान नहीं कर पाते है, वे गया आकर गोदावरी वेदी पर श्राद्ध कर इसकी शुरूआत करते है। इसी वेदी के ठीक बगल में पंचमुखी महादेव का मंदिर है। इस स्थान पर 41 दिन दीपक जलाने से हर मनोकामना पूरी होती है।

 

आखिर क्यों किया जाता है भाद्रपद पूर्णिमा को श्राद्ध?
आचार्य नवीन चंद्र मिश्र वैदिक ने बताया कि गया श्राद्ध करने से सात गोत्र व 101 कुल का उद्धार होता है। आश्विन कृष्ण पक्ष से लेकर अमावस्या तक सारी तिथियां सम्मिलित है। लेकिन पूर्णिमा तिथि का अभाव है। पूर्णिमा तिथि को दिवंगत हुए पितरों के लिए भाद्रपद पूर्णिमा से श्राद्ध या तर्पण का विधान है। पंडित लाल नाथोलिया ने बताया कि गोदावरी वेदी रास्ते का श्राद्ध है। पिंडदानी जिस रास्ते से आते है उस रास्ते में पड़ने वाले वेदी पर श्राद्ध का विधान है।

 

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