पितृपक्ष मेला / गोदावरी श्राद्ध के साथ पितृमुक्ति महाकर्मकांड आज से, देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आएंगे गयाधाम



गया शहर में विष्णुपद मंदिर व उसके आसपास के पिंडदान स्थलों के साथ फल्गु की तस्वीर। गया शहर में विष्णुपद मंदिर व उसके आसपास के पिंडदान स्थलों के साथ फल्गु की तस्वीर।
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गया शहर में विष्णुपद मंदिर व उसके आसपास के पिंडदान स्थलों के साथ फल्गु की तस्वीर।गया शहर में विष्णुपद मंदिर व उसके आसपास के पिंडदान स्थलों के साथ फल्गु की तस्वीर।

  • गोदावरी श्राद्ध के साथ पितृमुक्ति कर्मकांड की शुरूआत होगी 
  • 28 को अक्षयवट खीर श्राद्ध और सुफल के साथ मेला का समापन होगा

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2019, 11:42 AM IST

गया (दीपक कुमार). अनादि काल से मोक्षधाम के रूप में विश्वविख्यात गयाधाम में इस वर्ष 12 सितंबर से पितृपक्ष मेला शुरू हो रहा है। गोदावरी श्राद्ध के साथ पितृमुक्ति कर्मकांड की शुरूआत होगी, जबकि 28 सितंबर को अक्षयवट खीर श्राद्ध और सुफल के साथ मेला का समापन होगा। वैसे गया महालय के मुताबिक अक्षयवट सुफल के बाद 29 सितंबर को भी गायत्री घाट पर नाना-नानी के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विधान है। 

 

गयाजी के कुछ आचार्यों के अनुसार पुनपुन श्राद्ध को गयाधाम के कर्मकांड से नहीं जोड़ा जाता। यानी एक दिन भाद्रपद पूर्णिमा, 15 दिन आश्विन कृष्ण पक्ष और एक दिन आश्विन शुक्लपक्ष प्रतिपद में पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व है। बता दें कि गयाधाम में सालों भर पितृमुक्ति कर्मकांड होता रहता हैं। परंतु पितृपक्ष को सबसे उपर्युक्त माना गया है। इस अवधि में सत्रह दिनी के बजाए कम समय के कर्मकांड में भी पितरों को मुक्ति मिल जाती है।

 

इस बार मेला में तीर्थयात्रियों को दिखेगा बदलाव
पितृपक्ष मेला में इस बार का नजारा काफी कुछ बदला दिखेगा। कई सरोवरों और पिंडवेदियों का जीर्णोद्धार हुआ है। कुछ सरोवरों की भी तस्वीर बदली हुई है। जिला प्रशासन ने इस बार काफी बेहतर तैयारी की है। खासकर डीएम अभिषेक सिंह यात्रियों की हर बुनियादी सुविधा से लेकर सुरक्षा देने के लिए लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पितृपक्ष मेला पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी विशेष नजर है। विगत एक सितंबर को तैयारी का जायजा लेने सीएम स्वयं गया पहुंचे थे। उनका स्पष्ट निर्देश है- यात्री गयाजी और बिहार के बारे में अच्छा इम्प्रेशन लेकर लौटे। इधर डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी गुरुवार को विश्वविख्यात पितृपक्ष मेला का उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर बिहार शासन के कई मंत्री और आला अफसर मौजूद होंगे। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मेला की विधिवत शुरूआत होगी।

 

पितृपक्ष मेला में मिलेंगी ये सुविधाएं

  • मेला स्पेशल ट्रेन में अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इस बार रेलवे ने टिकटों पर लगने वाले मेला अधिभार को खत्म कर दिया है। रेलवे बोर्ड के कॉमर्शियल डिपार्टमेंट ने पिंडदानियों के लिए यह राहत दी है। मेला स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी।
  • 50 ई-रिक्शा बुजुर्गों, नि:शक्तों और छोटे बच्चों की मां के लिए नि:शुल्क रहेगा। जिला प्रशासन, नगर निगम के अलावा स्वयंसेवी संस्थाएं भी इस व्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखने में योगदान दे रही हैं।
  • आउटसोर्सिंग के जरिए 24 घंटे सफाई की व्यवस्था की गई है। छह सौ पचास अतिरिक्त सफाईकर्मी लगाए गए हैं। ये तीन पालियों में मेला क्षेत्र की सफाई करेंगे। मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था की निगरानी नगर निगम की टीम करेगी।

श्राद्धीय वेदियों पर तिथिवार कर्मकांड का महात्म्य
12 सितंबर: गोदावरी अथवा पुनपुन श्राद्ध
13 सितंबर: फल्गु स्नान और तीर्थ पंडा पांव पूजन
14 सितंबर: प्रेतशिला, फल्गु
15 सितंबर: ब्रह्माकुंड, प्रेतशिला, रामकुंड, रामशिला, कागबली
16 सितंबर: उत्तरमानस, मोनार्क, दक्षिण मानस, सूर्यकुंड, जिहा लोल वेदी
17 सितंबर: सरस्वती तर्पण, पंच रत्न धाम, मातंड्गव्यापी, धर्मारण्य, बोधिदर्शन
18 सितंबर: ब्रह्मसरोवर, कागबली, आम्रसेंचन
19 सितंबर: सोलह वेदी (विष्णुपद, रुद्रपद, ब्रह्मपद)
20 सितंबर: कार्तिक, दक्षिणाग्नि, गाहंपस्य
21 सितंबर: गणेश पद
22 सितंबर: मतड्गपद, क्रॉच्छपद, इंद्रपद, अगस्त्य, कश्यपवेदी
23 सितंबर: रामगया, सीताकुंड, सौभाग्य पिटारी दान
24 सितंबर: गया सिर, गया कूप, मुंडपृष्टा, आदिगया, द्यौतपद
25. सितंबर: भीमगया, गो प्रचार, गदालोल (स्वर्ग दान)
26 सितंबर: फल्गु दूध तर्पण, दीपदान (पितरों की दिवाली)
27 सितंबर: वैतरण श्राद्ध और गौदान
28 सितंबर: अक्षयवट (श्राद्ध, शय्यादान)
29 सितंबर: गायत्री घाट, आचार्य विदाई

 

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