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चीन से राजनीतिक विवाद, पर वहां के लोग भाई-बहन

7 महीने पहले
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बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा।
  • बोधगया प्रवास व टीचिंग के दौरान दलाई लामा ने कई बार चीन के प्रति अपने नजरिए को प्रकट किया
  • दोनों देश नालंदा परंपरा को मानते हैं, इस नजरिए से भाई-बहन हैं
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बोधगया (राजीव कुमार). चीन के साथ तिब्बत का रिश्ता राजनैतिक विवाद है। लेकिन वहां के लोग तिब्बत के भाई-बहन हैं। दलाई लामा के इस बयान से चीन के प्रति उनका बदलता नजरिया या स्टैंड दिखता है। 2019-2020 के बोधगया प्रवास व टीचिंग के दौरान उन्होंने कई बार चीन के प्रति अपने नजरिए को प्रकट किया।


25 दिसंबर को प्रेस से बात करते हुए जहां चीन को उसकी हद बताई, वहीं बाद में चीन को लेकर भावुक बयान भी दिए। 25 दिसंबर को महाबोधि मंदिर में चीन संबंधी पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने प्रेस से कहा था कि बौद्धों पर बल प्रयोग किया जा रहा है, बावजूद पिछले 40 साल में बौद्ध मतावलंबियों की संख्या बढ़ी है। कई बौद्ध विद्वान हाल के सालों में उभरे हैं। उनके(दलाई लामा) पास सच्चाई की ताकत है, चीन के पास गोली की ताकत। फिर भी सच्चाई की ताकत अधिक प्रभावी है। वहीं दूसरी ओर 11 जनवरी को चीन व तिब्बत के छात्रों को दलाई लामा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए दोनों देश के आत्मीय संबंधों की जानकारी दी। कहा, दोनों देश नालंदा परंपरा को मानते हैं, इस नजरिए से भाई-बहन हैं।

चीन मूलत: बौद्ध देश
दलाई लामा ने 11 जनवरी को चीन(हान वंशज) व तिब्बत को जोड़कर हानतब कहा था। उन्होंने। ऑल ऑफ यू आर हानतब, ब्रदर एंड सिस्टर्स। बाद में व्याख्या करते हुए बताया तिब्बत से चीन बौद्ध धर्म गया व तिब्बत के सातवीं सदी के एक राजकुमार ने चीन की राजकुमार से शादी की। दोनों देशों की एक ही परंपरा है। 1954-55 में अपने चीन की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा, वहां कई बौद्ध मंदिर हैं। चीन मूलत: बौद्ध देश है।

परंपरा से जुड़ता है दोनों देश
चीन व तिब्बत में राजनैतिक कारणों से विवाद है। उन्होंने कहा, परंपरा हम दोनों देश को जोड़ता है। चीन दबाव की नीति अपनाता है। अमेरिका व राष्ट्र संघ में भी मैंने(दलाई लामा) तिब्बत की आजादी पर प्रश्न उठाया। लेकिन हम जानते हैं, अमेरिका तिब्बत को आजाद कराने के लिए कभी भी चीन पर आक्रमण नहीं करेगा। तिब्बत के प्रति चीन की नीति गलत है, रियलिस्टिक नहीं है।

चीन के स्कॉलर को चाहते हैं पढ़ाना
उन्होंने 11 जनवरी को कहा, चीन की विस्तारवादी व गलत नीति के कारण उनके साथ तिब्बत के लाखों लोग रिफ्यूजी हैं। चीन के स्कॉलर भी मिलते हैं, प्रवचनों का प्रकाशन भी कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, वे चीन के स्कॉलर को पढ़ाना चाहते हैं। बोधगया में बुद्धिस्ट लर्निंग सेंटर विकसित करने की भी बात कही, जहां चीन के स्कॉलर अध्ययन कर सकते हैं।

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