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बेसौमस बारिश से श्रमदान कर बनाई गई सड़क पानी में बही, आवाजाही प्रभावित

एक वर्ष पहले
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बांकेबाजार प्रखंड के नावाडीह व फूलवरिया गांव के बीच मोरहर नदी में ग्रामीणों द्वारा श्रमदान से बनाया गया रास्ता बेमौसम बरसात में बह गया। जिससे ग्रामीणों को फिर एक बार संकट से जूझना पड़ रहा है। दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण श्रमदान से बनाया गया मिट्टी मोरम से रास्ता पानी में बह गया है। नावाडीह व फूलवरिया गांव के बीच मोरहर नदी में ग्रामीणों ने बरसात बीत जाने के बाद श्रमदान व आपस में राशि एकत्रित कर नदी के बीच बाहर से मिट्टी लाकर सड़क बनवाई थी। ताकि बालू की रेत पर चलने में होने वाली परेशानी से लोगों को कुछ समय के लिए मुक्ति दिलाई जा सके। पर इधर बेमौसम बरसात ने उनकी मेहनत व सुविधाओं पर पानी फेर दिया।

इस साल बरसात खत्म होने के बाद 500 मीटर लंबा रास्ता बनाया गया था। बेमौसम बरसात होने के चलते बीच में रास्ता टूट गया व नदी में पानी का बहना शुरू हो गया। जिससे आम लोगों की परेशानी पुन: बढ़ गई है। अब दोबारा श्रमदान कर रास्ते को बनाने का भी संकट सामने आ गया है। लोगों को अब चिंता सताने लगी है कि एक बार तो ग्रामीणों के सहयोग से इस रास्ते को बनाया गया था ताकि बरसात में परेशानी नहीं हो। लेकिन अब एक बार फिर संकट सामने आ गया है।

शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलेगा शिष्टमंडल


जदयू के प्रखंड अध्यक्ष विनय कुमार ने बताया कि इस पुलिया के निर्माण के लिए सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एक शिष्टमंडल बहुत जल्द मिलेगा। उनसे मिलकर वर्षों से एक पुलिया की अास में रह रहे कई गांव के ग्रामीणों की सुविधा के लिए इसे बनाने की मांग करेंगे। पुलिया के लिए सीएम से मांग की जाएगी।

पुल बन जाने से झारखंड की दूरी 15 किमी रह जाएगी

इस पुलिया को बन जाने से झारखंड जाने के लिए मात्र 15 किलोमीटर का रास्ता ही तय करना पड़ेगा। इसे बन जाने से प्रखंड के मोनेया फूलवरिया, पननीया, बाजितपुर, करचोई कोदबरीया, इमामगंज प्रखंड के चुआवार, रौश, बहेरा, रानीगंज इमामगंज सहित अन्य दर्जनों गांव होते हुए झारखंड की सीमा क्षेत्र के गांव बिचकीला झारखंड की सीमा में पहुंचता है। इमामगंज से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पड़ती है।


पुल बनवाने के लिए पूर्व सीएम का आश्वासन भी काम नहीं आया

बताया गया उस वक्त संवेदक एक सिख परिवार के थे। जो आज तक यहां नहीं आया। उनका किसी तरह का पता नहीं चला कि आखिर वह कहां गया। उस वक्त से इन दोनों गांव के अलावा आसपास क्षेत्र के ग्रामीण पुलिया की आस में है। इस क्षेत्र के विधायक सह बिहार सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से भी पुल बनवाने के दिशा में आग्रह किया गया था। उनका आश्वासन भी ढाक के तीन पात निकले। इस दिशा में अबतक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई हिंसा की भेंट चढ़ी योजना

इस संबंध में फूलवरिया गांव के रहने वाले सह राजद के जिला सचिव अशोक कुमार ने बताया कि 1984 में इस नदी पर पुल बनाने के लिए टेंडर हो गया था और निर्माण के लिए सामग्री भी नदी के किनारे संवेदक द्वारा कार्य स्थल पर इकट्ठा कर कार्य प्रारंभ करने की तैयारी शुरू कर दी थी। इसी बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। जिससे भड़की हिंसा की भेंट यह पुल निर्माण योजना चढ़ गई। इसके बाद से आज तक कार्य नहीं हो पाया।


बाराचट्टी में बेमौसम बरसात से फसलों को हुआ भारी नुकसान

बाराचट्टी |बाराचट्टी प्रखंड में गुरुवार की रात से शुरू बेमौसम बारिश शुक्रवार को भी जारी रही। लगातार वर्षा होने के कारण किसानों के लगभग तैयार फसल पर सीधा असर पड़ा है। प्रखंड के किसानों ने बताया कि पहले ही हुए ओलावृष्टि एवं तेज वर्षा के कारण तेलहन, दलहन, गेहूं के साथ आलू के फसल पर गहरा असर पड़ा है। वहीं इधर दो दिनों से हो रही बारिश से मसूर, चना, सरसो, गेहूं आदि फसल के दाने काले हो जाएंगे। वहीं इन फसलों के दर भी प्रभावित होगा।

कई गांवों के लोगों की बढ़ी परेशानी, बारिश से फसलों को भी हुई भारी क्षति

बारिश में बह गई मोरहर नदी पर श्रमदान से बनी सड़क।
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