अपग्रेड किए जाने के नौ वर्षों बाद भी दो कमरों में चल रहा विद्यालय

Gaya News - आजादी के दो दशक बाद स्थापित मध्य विद्यालय, सरबदीपुर आधारभूत संरचना व सड़क के आभाव में नौ निहालों को यहां नित दिन नई...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:46 AM IST
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आजादी के दो दशक बाद स्थापित मध्य विद्यालय, सरबदीपुर आधारभूत संरचना व सड़क के आभाव में नौ निहालों को यहां नित दिन नई समस्याओं को सामना करना पड़ता है। गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के कारण इस भौतिक सुविधा विहीन विद्यालय में छात्रों की संख्या प्रत्येक वर्ष बढ़ती जाती है, परन्तु शिक्षा विभाग का कोई ध्यान इस ओर नही है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक पुरुषोत्तम पांडेय के अनुसार वर्तमान में तीन सौ के करीब छात्र विद्यालय में नामांकित है। प्रतिदिन 200 से अधिक छात्रों की उपस्थिति विद्यालय में रहती है। दो कमरे पर छह शिक्षकों की नियुक्ति विद्यालय में है। चार महिला व दो परुष शिक्षक के साथ दो सौ छात्र परेशानी उठा रहे है। गांव से दो सौ फीट की दूरी पर स्थित विद्यालय में सबसे बड़ी परेशानी सड़क का अभाव है। जहां बारिश व फसल के दिनों में छात्र पानी भरे खेतों से होकर गुजरते है। 1966 ई. में स्थापित प्राथमिक विद्यालय को वर्ष 2009 में उत्क्रमित कर मध्य विद्यालय बनाया गया। उत्क्रमित किये जाने के नौ वर्ष बाद भी आधारभूत संरचना वही पुरानी बरकरार है। स्थिति यह है कि एक से आठ तक कक्षा वाले विद्यालय का संचालन दो कमरे व एक बरामदा में किया जा रहा है। दो कमरे व एक बरामदा वाले विद्यालय में कहां कार्यालय है इसका पता ही नही चलता है। एक कमरे में वर्ग चार और पांच के छात्र बैठते है तो दूसरे में वर्ग छह, सात और आठ के छात्र जबकि बरामदे में वर्ग एक, दो और तीन के छात्र बैठते हैं। एक छोटा रसोई घर विद्यालय भवन से सटे बनाया गया है। जिसके कारण विद्यालय के छात्रों को धुएं का दंश भी झेलना पड़ता है।

बारिश में बच्चों को होता है संक्रमण: मध्य विद्यालय के दो कमरे में संचालित वर्ग चार से आठ तक के छात्र लकड़ी के बने बेंच पर बैठते है। जबकि बरामदे में वर्ग एक से तीन तक के छोटे बच्चे पक्के फर्श पर बैठते है। ठंड के दिनों में फर्श बहुत ठंडा होती है। जिससे बच्चों को ठंड लगने का डर लगा रहता है। कुछ बच्चे ठंड में बीमार पड़ जाते है। वहीं बारिश के दिनों में विद्यालय के चारो ओर खेतों में जमा पानी के कारण नमी बनी रहती है। इसके अलावा बच्चे जब उन खेतों में भरे पानी से गुजर कर आते है तब उनके पैर में लगा बारिश का पानी व कीचड़ फर्श पर आ जाता है। इससे छोटे बच्चों को परेशानी होती है। इतना ही नही विद्यालय भवन से सटे खेतों में लगे फसल के किट व फतिंगे भी विद्यालय में आते है। विद्यालय के सटे शौचालय भवन बन हुआ है। एक महिला व एक पुरुष शौचालय है। छह शिक्षक, चार रसोईया व दो सौ छात्रों के लिए दो शौचालय कम पड़ जाता है।

तीन सौ से ज्यादा छात्र हैं सरबदीपुर विद्यालय में नामांकित

मध्य विद्यालय, सरबदीपुर।

एक कमरे में अधिक कक्षाअाें का संचालन

शिक्षिका गायत्री कुमारी बताती है कि एक कमरे में दो या उससे अधिक वर्ग का संचालन करने में बहुत परेशानी होती है। पठन पाठन के क्रम में शिक्षक व छात्र की एकाग्रता भंग होती है।

खेताें से गुजरकर जाना पड़ता है स्कूल

छात्र सन्नी कुमार ने बताया कि विद्यालय में जाने का रास्ता नही है जिसके कारण खेतों से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश में खेत की मेढ़ कीचड़ से भर जारी है, जिसमें फिसल कर गिरने का डर रहता है। खेत में उतरने से खेत मालिक फटकार लगाते है।

समस्या से अधिकारियों को अवगत कराया गया प्रधानध्यापक पुरुषोत्तम पांडेय ने बताया कि प्रखंड कार्यालय व जिला कार्यालय को समस्या से अवगत कराया गया है। ग्रामीण रामविनय शर्मा द्वारा 10 डिसमिल भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। भवन को लेकर पुनः विभाग को लिखा जाएगा।

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