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साजिश / दलाई लामा के प्रवास के दौरान कालचक्र मैदान में फेंकना था बम, न मिल पाया था मौका

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2018, 03:02 PM IST


कालचक्र मैदान के पास आतंकी (बाएं) को बम प्लांट वाली जगह पर ले जाते एनआईए अफसर। कालचक्र मैदान के पास आतंकी (बाएं) को बम प्लांट वाली जगह पर ले जाते एनआईए अफसर।
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कालचक्र मैदान के पास आतंकी (बाएं) को बम प्लांट वाली जगह पर ले जाते एनआईए अफसर।कालचक्र मैदान के पास आतंकी (बाएं) को बम प्लांट वाली जगह पर ले जाते एनआईए अफसर।

  • 19 जनवरी को मिले थे 3 बम, चौथा शौचालय के फ्लश में छिपा रखा था

बोधगया.  कालचक्र मैदान के पास मिले टिफिन बम में पिन लगा था। इसी साल जनवरी माह में बम प्लांट करने के दौरान आतंकियों की साजिश थी कि बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा के प्रवचन के दौरान इसे कालचक्र मैदान में फेंका जाए। पर आतंकियों को मौका नहीं मिल सका। 

 

कालचक्र मैदान से इस शौचालय की दूरी महज चंद मीटर है। पिन हटाकर फेंकने के साथ ही बम विस्फोट कर जाता और बड़ी क्षति पहुंचाई जा सकती थी। 19 जनवरी को थर्मस बम समेत तीन बम महाबोधि मंदिर के अलावे महाबोधि सोसायटी, कालचक्र मैदान के दक्षिणी छोर पर मिले थे।

 

धमाके से बच गया बोधगया 
एक बार फिर बोधगया बम के धमाके से बच गया। आठ महीने तक बोधगया में बम रखा रहा, लेकिन इसकी भनक पुलिसिया तंत्र और खुफिया विभाग को भी नहीं लग सकी। बम रहने के बाद भी कई माह तक शौचालय का उपयोग होता रहा, जिसके फ्लश में बम रखा था। इधर, दो-तीन माह से इसका उपयोग बंद कर दिया गया था। 

 

एनआईए के टीम द्वारा 26 वर्षीय आतंकी दिलावर हुसैन उर्फ उमर की गिरफ्तारी के बाद उससे की गई पूछताछ के बाद किसी प्रकार इसकी जानकारी मिली तो 19 जनवरी की घटना के बाद बरती गई यह चूक सामने आ गई। एनआईए बंगाल,बिहार व लखनउ के टीम द्वारा मालदह के कालियाचक से गिरफ्तार किए गए आंतकी से दिलावर उर्फ उमर से सात दिनों से पूछताछ के बाद बोधगया के शौचालय में बम रखने की बात को स्वीकार किया। इसके बाद अधिकारियों ने इसकी जांच के लिए बोधगया में एक टीम को भेजा था। 

 

टीम पहुंची, लेकिन सही लोकेशन नहीं बताने के कारण बम को खोजा नहीं जा सका। जिसके बाद एनआईए की टीम ने दिलावर को साथ में लाकर जगह की पहचान करवाई। शौचालय के फ्लश के अंदर बम को छिपाकर रखा गया था। 

 

कश्मीर में ली थी ट्रेनिंग
मो. दिलावर ने कश्मीर में आतंकी ट्रेनिंग ली थी। जानकार बताते हंै कि बम बनाने से लेकर कई आतंकी गतिविधियों में एक्सपर्ट दिलवर को मौत का भी खौफ नहीं है। वह बांग्लादेश का भी कई बार चक्कर लगा चुका है। इसकी जांच खुफिया विभाग अपने स्तर से कर रहा है। मो. दिलावर हुसैन उर्फ उमर के पिता नजरुल इस्लाम की मालदा में एक सर्फ एजेंसी भी है। पिता को बेटे के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी नहीं थी। जब एनआईए ने मलदा स्थित घर से दिलावर को पकड़ा तब इसकी जानकारी परिवार वालों को हुई थी।

 

टेकुना फार्म धनावा से पहुंची एसएसबी की एक्सपर्ट टीम ने बम को शौचालय से एहतियात बरतते हुए निकाला। बालू भरी बाल्टी में बम को रख उसमें रस्सी बांधी गई। फिर उसे रोपवे की तर्ज पर खींचकर बाहर लाया गया। शौचालय के बाहर खड़ी वैन के ऊपर बाल्टी लाई गई। दूर से ही एसएसबी जवानों ने धीरे-धीरे रस्सी छोड़ बाल्टी वैन में रखी। बम वाली बाल्टी वैन पर लदे ड्रम में रखी गई। ड्रम में नेट बंधा था। वहां से निरंजना नदी ले जाकर बम उड़ाकर डिफ्यूज किया गया। एसएसबी का ऑपरेशन दो घंटे चला।

 

एनआईए ले गई अवशेष, पता लगाएगी बम की शक्ति
एसएसबी के बीडीडीएस दस्ते ने शॉर्ट कराकर बम को डिफ्यूज कर दिया। इस दौरान धमाका काफी दूर तक सुना गया। इस कार्रवाई के दौरान एनआईए की टीम के अलावा बोधगया एएसपी रमन कुमार चौधरी, बोधगया थानाध्यक्ष शिव कुमार महतो, मगध विवि थानाध्यक्ष अबुजर हुसैन अंसारी आदि मौजूद रहे। बम के डिफ्यूज किए जाने के बाद एनआईए की टीम ने अवशेष बरामद किए। एनआईए प्लास्टिक के थैले में बमों के अवशेष को ले गई। 

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