गया / विष्णुपद मंदिर में धरोहर के रूप में रखा जाएगा 221 वर्ष पुराना खंडित घंटा



The 221-year-old breakaway hour will be kept as a heritage in the Vishnupad temple
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The 221-year-old breakaway hour will be kept as a heritage in the Vishnupad temple

  • ब्रिटिश काल में फ्रांसिस गिलैंडर्स ने 15 जनवरी 1798 में गिफ्ट के रूप में विष्णुपद मंदिर को दिया था घंटा

Dainik Bhaskar

May 20, 2019, 10:31 AM IST

गया. विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह के बाहर सभा मंडप में लगा 221 वर्ष पुराना अष्टधातु का बेशकीमती घंटा खंडित हो चुका है। अब इस घंटा को धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। शीशे के एक बड़े शो-केस में इसे रखने की तैयारी चल रही है। श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य शंभु लाल विट्‌ठल ने बताया कि इस घंटा ने भगवान विष्णु की करीब सवां दो सौ साल तक सेवा की। इस कारण समिति अब धरोहर के रूप में इसे संजोने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि मंदिर का इतिहास आने वाली पीढ़ी भी समझे, इसलिए हर धरोहर को संरक्षित रखा जाएगा। बता दें कि इस अष्टधातु के घंटा का वजन करीब 150 किलो है।

 

घंटा को ब्रिटिश श्रद्धालु ने मंदिर को दान स्वरूप दिया था। ब्रिटिश काल में फ्रांसिस गिलैंडर्स ने 15 जनवरी 1798 में विष्णुपद मंदिर को एक गिफ्ट के रूप में इस घंटा को दिया था। आज भी इस घंटा पर हिन्दी व अंग्रेजी में लिखे ये शब्द दिखाए देते है। बता दें कि फ्रांसिस गिलैंडर्स का जन्म रॉबर्टसन में सन् 1772 में हुआ था। उनके पिता डेविड गिलैंडर्स और माता एलिजाबेथ गिलैंडर्स थी। 26 वर्ष के उम्र में उन्होंने विष्णुपद मंदिर में इस अष्टधातु के घंटा को दान किया था।

 

221 साल तक घंटा ने की भगवान विष्णु की सेवा
अष्टधातु का खंडित इस घंटा ने विष्णुपद मंदिर में 221 साल तक भगवान विष्णु की सेवा की। जब भी घंटा को बजाया जाता था, तो इसकी आवाज चारों और फैल जाती। चातुर्मास में भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने के लिए भी शंख ध्वनि के साथ-साथ इस प्राचीन घंटा को बजाया जाता था। गर्भगृह में विष्णुचरण के शृंगार से लेकर हर पूजा पाठ में इस घंटा की आवाज चहुंओर गूंजती थी। 

 

घंटा को शीशे के शो-केस में रखा जाएगा
सभा मंडप के बाहर हनुमान मंदिर के पास इस घंटा को स्थान दिया गया है। शीशे के शो-केस में इस घंटा को रखा जाएगा, ताकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस प्राचीन घंटा को देख सके। विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति की माने तो यह मंदिर का प्राचीन धरोहर है। इसे सुरक्षित रखने की जिम्मेवारी मंदिर समिति की है। आने वाले वर्षों में भी लोग इस घंटे को देख सकेंगे।

 

अष्टधातु की जगह पीतल का लगा नया घंटा

गर्भगृह के बाहर सभा मंडप में अब अष्टधातु के जगह पीतल का एक नया घंटा लगाया गया है। इस घंटा को गया के ही एक प्रोफेसर ने लगाया है। समिति की माने तो अष्टधातु के टूटे घंटे को देख अनुग्रह कॉलेज के एक प्रोफेसर ने इसे बदलने की बात कहीं। समिति से स्वीकृति मिलने के बाद प्रोफेसर की बेटी अमिता ने इस घंटा को मंदिर में दान किया।

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