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कुलपति ने कहा-जलवायु परिवर्तन से वनस्पति प्रजाति हो रही है विलुप्त

Gaya News - दुनिया के बदलाव का भारत पर भी प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव के कारण हमारी बहुत सी...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:11 AM IST
Gaya News - vice chancellor said due to climate change vegetable species are becoming extinct
दुनिया के बदलाव का भारत पर भी प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव के कारण हमारी बहुत सी वनस्पतियों की प्रजातियां निरंतर विलुप्त होने के साथ-साथ कृषि जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मगध विवि के कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद ने मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग द्वारा बिहार एवं झारखंड भौगोलिक परिषद के दो दिवसीय 21वां वार्षिक सम्मेलन तथा राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि इस सेमिनार द्वारा विशेषकर बिहार एवं झारखंड की कृषि जैव विविधता के विकास के साथ-साथ संपोषित विकास, साधन एवं साध्य का बेहतर प्रबंधन और इसके विकास को बल मिलेगा। उन्होंने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज शोधार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ मानवीय पक्ष को भी समझना बहुत आवश्यक है। इससे पहले मेजबान भूगोल विभाग के अध्यक्ष एवं सेमिनार के संयोजक प्रो विद्या सिंह ने सेमिनार के शीर्षक कृषि जैव विविधता एवं इसके सतत विकास के ऊपर विस्तृत प्रकाश डाला।

आज शोधार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ मानवीय पक्ष को भी समझना आवश्यक

21वां भौगोलिक परिषद के सम्मेलन में पत्रिका का लोकार्पण करते कुलपति सहित अन्य।

कृषि जैव विविधता है संस्कृति का आधार

विशिष्ट अतिथि पटना विवि के कुलपति प्रो रासबिहारी बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि शोध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसकी साहित्यिक चोरी को रोकना अति आवश्यक है। भारत की कृषि जैव विविधता के बिना यहां की संस्कृति अधूरी है। आज केवल 12 फीसदी लोग ही कृषि जैव विविधता पर निर्भर है जो और धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अफसोस की बात है कि प्रत्येक माह पौधे की 6 प्रजातियां इस पृथ्वी से विलुप्त हो रही है ।दाल, चावल, मक्का एवं तिलहन इत्यादि के प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी कम होता जा रहा है।

इनकी भी थी उपस्थिति

इस अवसर पर मगध विवि के कुलसचिव ग्रुप कैप्टन जगत सिंह राणा, महासचिव डॉ शिव मुनि यादव, प्रो अताउल्ला, डॉ मीनाक्षी प्रसाद, मौसमी, रितु प्रिया, प्रो केके नारायण, आयोजन सचिव प्रो वीरेंद्र कुमार,डॉ पिंटू कुमार सहित अन्य मौजूद थे।

जैव विविधता बढ़ाना जरूरी: मगध विवि के पूर्व प्रतिकुलपति प्रो कार्यानंद पासवान ने कहा कि दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर ही आधारित है तथा यहां बहुजन मूल निवासियों का जीवन यापन का एकमात्र साधन कृषि ही है इसलिए इसके जैव विविधता को बढ़ाया जाना अति आवश्यकता है। मुख्य वक्ता पटना विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो गंगा प्रसाद झा ने कहा कि कृषि सबके जीवन के लिए एकमात्र साधन है। कृषि जैव विविधता एवं इसके सतत विकास के लिए बहु फसल चक्र पद्धति, हरित पट्टी, विविधीकरण एवं तकनीकी विकास को अपनाए जाने की जरूरत है।

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