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फिर से अपनी चमक बिखेरेगी बैकुंठपुर की मलवरी सिल्क, सिरसा में बंद पड़े रेशम उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए मिला 83 लाख

Gopalganj News - बिहारी परिधानों में सिरसा की मलवरी सिल्क फिर से अपनी चमक बिखेरने वाली है। सेरीकल्चर के इस हब को पुनर्जीवित करने के...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:30 AM IST
Gopalganj News - again it will shine its glow malawi silk of baikunthpur got 83 lakhs to revive silk industry closed in sirsa
बिहारी परिधानों में सिरसा की मलवरी सिल्क फिर से अपनी चमक बिखेरने वाली है। सेरीकल्चर के इस हब को पुनर्जीवित करने के लिए सरकारी स्तर पर कसरत शुरू हो गई है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो बरसात बाद बैकुंठपुर के सिरसा बंद पड़े रेशम उद्योग पर फिर से रौनक लौट आएगी। बता दें कि सरकार ने सिरसा मलवरी सिल्क उद्योग के विकास के लिए 83 लाख रुपए की मंजूरी दे दी है। काम शुरू करने के लिए फरवरी महीने में ही 83.83 लाख की प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी गई थी। अब आधरभूत संरचना विकास प्राधिकार से टेंडर होने के बाद कार्य आवंटन और एग्रीमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मलवारी सिल्क उत्पादन

उत्तर बिहार का इकलौता है यह उद्योग

बैकुंठपुर का सिरसा सिल्क उद्योग सारण-चंपारण का इकलौता सेरीकल्चर हब है। अंडी और मलवरी सिल्क के उत्पादन में अपनी धाक जमाने वाला यह रेशम उद्योग सरकार की इच्छा शक्ति के अभाव में पिछले 25 वर्षों से बंद था। इसे चालू करने के लिए बैकुंठपुर के विधायक मिथिलेश तिवारी ने उद्योग मंत्रालय को लिखा था। सरकार ने 6 फरवरी 2019 को सिल्क उद्योग को पुनर्जीवित करने की हरी झंडी दी थी। सेरीकल्चर के विकास के लिए 83 लाख 83 हजार की राशि का आवंटन भी मिल गया है।

आधरभूत संरचना व कार्य

कार्य इकाई

मलवरी वृक्षारोपण 05

सिंचाई 01

कीट पालन गृह 02

कीट पालन उपस्कर 05

उत्पादन बढ़ाने के लिए 20

हॉट एण्ड ड्रॉयर 02

कृषक प्रशिक्षण व भ्रमण 10

वर्मी कंपोस्ट 02

इनके नियंत्रण में होगा उत्पादन

बैकुंठपुर के सिरसा में जल्द हीं मलवरी सिल्क का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। आवंटन प्राप्त हो गया है। हस्तकरघा एवं रेशम विभाग बिहार, पटना के अधिकारी इसके नियंत्री पदाधिकारी होंगे।

सेरीकल्चर एक नजर में







औद्योगिक विकास व रोजगार से जुड़ेंगे लोग


90 के दशक में यहां होता था उत्पादन 90 के दशक तक सिरसा रेशम उद्योग में अंडी सिल्क और मलवरी सिल्क की उत्पादन होता था। पांच एकड़ भूभाग पर स्थापित इस उद्योग से 12 सौ परिवार को रोजगार मिला था। 90 के दशक के बाद राशि के अभाव में उद्योग ठप पड़ने लगा। रेशम का विकास नहीं होने से विभाग द्वारा 1 जनवरी 2006 को केन्द्र बंद कर दिया गया। आवंटन मिलने के बाद सेरीकल्चर के लिए अब विभागीय कसरत शुरू हो गयी है। फिलहाल मलवरी सिल्क का ही उत्पादन होगा।

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