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डेंगू और मलेरिया पर अलर्ट,स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया एडवाइजरी लेकिन अस्पताल परिसर में फैली गंदगी,पनप रहे मच्छर,मरीज परेशान

Gopalganj News - स्वास्थ्य विभाग ने जिले में फैसे डेंगू के खतरे को देखते हुए जिले में अलर्ट जारी कर रखा है। लोगों को समझाया जा रहा है...

Nov 11, 2019, 07:30 AM IST
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में फैसे डेंगू के खतरे को देखते हुए जिले में अलर्ट जारी कर रखा है। लोगों को समझाया जा रहा है कि वो पानी जमा न होने दे , गंदगी से बचें, मछरदानी का प्रयोग करें,घर और आसपास को साफ रखें। लेकिन स्वास्थ्य विभाग खुद इस एडवाइजरी पर अमल नहीं कर रहा। सदर अस्पताल की हालत देखकर इसे समझा जा सकता है। परिसर में चारों ओर गंदगी फैली है। कई जगह गंदा पानी जमा है। यहां की सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। अस्पताल प्रशासन को रटा- रटाया एक ही जवाब है कि सफाई के लिए नगर परिषद् को पत्र लिखा गया हैं। जबकि प्रति महीना सदर अस्पताल के साफ-सफाई के नाम 85 हजार से लेकर एक लाख रुपए खर्च की जाती हैं। यानी एक साल में लगभग 12 लाख रुपए सफाई पर खर्च किए जाते है। लेकिन सफाई के नाम इतनी बड़ी राशि खर्च विभाग के मंशा पर सवाल उठा रहा हैं।

बचने की अपील जारी

डेंगू -मलेरिया से बचने के लिए सदर अस्पताल ने एडवाइजरी जारी की है। जिसमें सफाई का ध्यान रखने। घरों के आसपास गंदगी नहीं होने दें। - विशेष ध्यान रखें। यदि घर में बर्तनों आदि में पानी भर कर रखना है तो ढक कर रखें। कूलर, गमले आदि का पानी रोज बदलते रहें। मच्छर रोधी क्रीम, स्प्रे, लिक्विड, मच्छरदानी आदि का प्रयोग मच्छरों के बचाव हेतु करें। लेकिन एक भी सलाह को सदर अस्पताल में नहीं लागू किया जा रहा है।

सदर अस्पताल में हर जगह गंदगी तो बाहर की बात ही बेमानी,अस्पताल की सफाई पर 12 लाख खर्च, इसके बाद भी गंदगी

बड़ी लापरवाही

इमरजेंसी वार्ड के पास लगा कचरा

40 से अधिक मरीजों का किया जा रहा इलाज

सदर और हथुआ अनुमंडल में अभी तक 40 से अधिक डेंगू के मरीजों का इलाज किया गया है। तीन लोगों को इस बीमारी से मौत भी हुई हैं। इसके आलावे कई जगह से लोगों के बीमार होने की खबरें मिल रही है। ज्यादातर लोग गोरखपुर में निजी अस्पतालों में या तो इलाज कराकर लौटे हैं, या करा रहे हैं। रविवार को सदर अस्पताल का भास्कर की टीम ने जायजा लिया।

अफसर बोले- व्यवस्थाओं काे सुधारा जा रहा है,कहीं कमी है तो बात करेंगे

एक लाख रुपए किए जाते है सफाई पर खर्च

अस्पताल की साफ-सफाई के लिए आउटसोर्सिग की व्यवस्था है। एजेंसी मनमाने तरीके से सफाई करवाती है। सफाई कहां और कैसे की जा रही है, इसको कोई देखने वाला नहीं है। मेडिकल कचरे का नियमित उठाव नहीं हो रहा है। कचरे से मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहता है। सदर अस्पताल की सफाई के लिए आउट सोसिंग से मिली राशि से एजेंसी द्वारा एक लाख रुपए लेकर सफाई करती हैं। रविवार को एजेंसी के स्टाप ने बताया कि दवा वितरण केन्द्र के पास और नाले से निकले वाले गंध के कारण अस्पताल में रहना मुश्किल हो गया हैं।

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साफ- सफाई में कोतहाई बरतने वाले एजेंसी पर होगी कारवाई

इमरजेंसी वार्ड से निकलती है बदबू

इमरजेंसी वार्ड में सही ढंग से साफ सफाई नहीं होने से मरीज व परिजन बदबू से परेशान रहते हैं। हालांकि कहने के सभी वार्डों की तीन बार सफाई की जाती है लेकिन अस्पताल परिसर व वार्डों की हकीकत कुछ और है।

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आेपीडी के पीछे की ओर नाले से निकलते है मच्छर

ओपीडी के पीछे की ओर शौचालय के नाले में गंदा पानी भरा है। कचरा जमा है। पीछे की तरफ जहां स्वास्थ्य समिति का कार्यालय बना हैं, वहां भी कई जगह कूड़ा जमा है। जहां साफ-सफाई नहीं होने के कारण डेंगू या अन्य गंभीर जैसी बीमारी की चपेट में अस्पताल आने वाले लोग हो रहे हैं।

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दवा वितरण केंद्र के पास लगे कचरे का अंबार


कचड़ा से निकल रही गंध,मरीज के साथ स्टाप है परेशान

अस्पताल परिसर में सबसे बड़ी परेशानी मेडिकल वेस्ट की तो है ही। अस्पताल परिसर में ही गंदगी खुले में डाली जा रही है। दवा वितरण के पास कचड़े को अंबार लगा हुआ हैं। अस्पताल के मरीजों के साथ ही स्टाफ परेशान है। इलाज कराने पहंुचे रीता कुमारी, मीना कुमारी, संतोष कुमार, अमन कुमार, राकेश कुमार आदि ने बताया कि दवा वितरण कक्ष के बगल में कचरा शौचालय की टंकी से पानी बहता रहता है।

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पोषण पुनर्वास केंद्र के आसपास खुले में पड़ा है कचरा

24 घंटे इमरजेंसी वार्ड के आगे और पीछे, एसएनसीयू के बाहर और इलाजरत नवजात के बच्चों के परिजनों के बैठने स्थल के पास, दवा वितरण कक्ष के आसपास महिला वार्ड के पीछे गंदा पानी का जमाव है। पोषण पुनर्वास केंद्र के आसपास मेडिकल व नन मेडिकल कचरे खुले में पड़ा हुआ है।

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नाली पर नहीं है ढक्कन

कचरा से निकल रहे मच्छरों से मरीज परेशान

खुले नाली,बहते गंदे नाली के पानी से डेंगू जैसी बीमारी की चपेट में लोग आ सकते हैं। अस्पताल परिसर के बाहरी क्षेत्र में जहां नजर दौड़ाएंगे, वहीं पर गदंगी फैला हुआ हैं। इमरजेंसी वार्ड के उतरी भाग में जहां-तहां खुले में मेडिकल व ननमेडिकल कचरा जमा हैं। गंदगी की वजह से मच्छरों का प्रकोप बना हुआ है।

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ब्लीचिंग का नहीं होता छिड़काव

अस्पताल में नालों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं होता है। जबकि ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हर दिन करना है। फिनायल तेल से वार्डों की साफ-सफाई करनी है। ताकि बदबू न रहे वार्ड में भर्ती मरीज के परिजनों ने बताया कि सदर अस्पताल में कोई कार्यक्रम होने या अधिकारी के आने की सूचना पर कभी कभार ब्लीचिंग का छिड़काव किया जाता है। गंदगी पर छोटे बड़े कीड़े कुलबुलाते रहते हैं ।

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