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मार्च में जुलाई जैसी स्थिति,असमय बारिश से फसलों को नुकसान,तेज हवा के साथ आज भी बारिश होगी
रबी की खेती के समय वेदर साइकिल पीछे और खरीफ के समय आगे की ओर बढ़ रहा है। यह सिलसिला पांच सालों से देखने को मिल रहा है। ऐसा ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को खेती के पैटर्न में बदलाव लाने की जरूरत है। मौसम के साथ चलने में ही उत्पादन संभव है। मार्च के मध्य में जब फसलें पक रही हैं, ओले पड़ना मौसम चक्र में परिवर्तन का द्योतक है। कहीं न कहीं प्रकृति के साथ खिलवाड़ हो रहा है जिसकी वजह से प्रकृति इस तरह के कठोर संदेश दे रही है। यदि समय रहते हम सचेत नहीं हुए तो फिर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ठंड में होने वाली बारिश और बर्फबारी से रबी की फसल अच्छी होती है, वहीं जलस्रोत भी रिचार्ज होते हैं। लेकिन इस बार जाड़े में सिर्फ 22 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
ओले पड़े तो कहीं के नहीं रहेंगे किसान
मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार अगर तेज बारिश व ओले पड़े तो इस किसान कहीं के नहीं रहेंगे। घरों में अनाज भंडारण की रही-सही उम्मीद भी टूट जाएगी।
ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव
पर्यावरणविद प्रो. डॉ. रुखसाना खातून ने कहा कि इसे ग्लोबल वार्मिंग से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। यह ग्लोबल वार्मिंग के दीर्घकालिक परिणाम के दायरे में आयेगा, जिसकी एक वजह जलवायु परिवर्तन चुनौती भी है। मौसम के दीर्घकालिक विश्लेषण से पहले ही जाहिर हो गया है कि पिछले 5 सालों में उत्तर- पश्चिम भारत में औसत तापमान 2.5 डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ा है। इसका असर सर्दी की तीव्रता पर पड़ना स्वाभाविक है।
पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता का कारण
कृषि विवि पूषा के वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि प्राकृतिक संतुलन को कायम रखने वाले कारकों में बदलाव का असर मौसम की गतिविधियों पर सबसे पहले पड़ता है। इनमें पर्यावरण संतुलन प्रमुख है। इसके बिगड़ने का पहला प्रभाव मौसम चक्र को निर्धारित करने वाली हवाओं के परिसंचरण तंत्र पर पड़ता है। इसे मौसम विज्ञान की भाषा में विक्षोभ कहते हैं। प्राकृतिक असंतुलन बढ़ने के कारण विक्षोभ की तीव्रता बढ़ती है जिसकी वजह से क्षेत्र विशेष का मौसम चक्र प्रभावित होता है। इसका वैश्विक प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के रूप में दिख रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में इजाफा
चार सालों में मौसम की गतिविधियों को देखते हुये तात्कालिक वजह पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में इजाफा होना है। जनवरी- फरवरी में पश्चिमी विक्षोभ आये, अभी मार्च में ही दो बार आ चुके हैं। मौसम वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि कम समय के अंतराल पर पश्चिमी विक्षोभ के आने के कारण न्यूनतम तापमान में गिरावट वर्षा चक्र पर असर डालता है और गर्मी भी बढ़ती है।
मौसम विभाग ने आज भी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार के अनुसार सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहेंगे। कुछ जगहों पर गरज के साथ ओले पड़ सकते हैं। पूर्वाह्न 11:30 बजे शाम 5:30 बजे के बीच तेज बारिश होने के संकेत मिले हैं। इससे फसलों के नुकसान के साथ तापमान में भारी गिरावट हो सकती है।
कब और कितनी बारिश
तिथि बारिश मिमी में
25 फरवरी 23 मिमी
05 मार्च 28 मिमी
13 मार्च 17 मिली
बारिश से गिरी गेहूं की फसल
20 फीसदी उत्पादन कम होने की संभावना
पिछले पांच साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब खेतों में फसल पकने की स्थिति में है और आसमान से आफतों की बारिश हो रही है। बीते 15 दिनों में तीसरी बार तेज बारिश होने नुकसान का ग्राफ और बढ़ सकता है। इस बार 97 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुआई का लक्ष्य के विरूद्व 92 हजार 200 हे. में खेती की गई है। अनाज उत्पादन का लक्ष्य करीब 30,210 मैट्रिक टन है। तीसरी बार की बारिश व ओलावृष्टि से करीब 15 हजार हेक्टेयर में खेती के नुकसान की उम्मीद है। ऐसे में उत्पादन 20 फीसदी तक कम हो सकता है।
10 की जगह 58 मिमी बारिश
किसानों के लिए संकट की घड़ी है। ऐसा मानना है गम्हारी के किसान प्रह्लाद का। उन्होंने बताया कि 25 साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब 15 दिन में तीन बार ओलावृष्टि और तेज बारिश हुई है।
सुबह से आसमान में छाए रहेंगे बादल
गेहूं की खेती एक नजर में
{बुआई का लक्ष्य - 97,000 हेक्टेयर
{बुआई हुई है - 92,000 हेक्टेयर
{उत्पादन का लक्ष्य- 30,210 मैट्रिक टन
{उत्पादन गिर सकता है - 3,500 मैट्रिक टन
पांच साल से बदल रहा है मौसम का चक्र, किसान बदल लें खेती का तरीका नहीं तो हो सकती है परेशानी