भगवान का नाम लेने मात्र से मनुष्य की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है : बलराम शरण बापू

Gopalganj News - कथा का श्रवण पूरे मनोयोग से करना चाहिए कथा श्रवण करते समय कभी भी यह नहीं देखना चाहिए कथा कौन कह रहा है। कथा के...

Feb 15, 2020, 08:11 AM IST

कथा का श्रवण पूरे मनोयोग से करना चाहिए कथा श्रवण करते समय कभी भी यह नहीं देखना चाहिए कथा कौन कह रहा है। कथा के श्रवण करने मात्र से जीवन धन्य हो जाता है। ईश्वर का नाम लेने मात्र से मनुष्य की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। यह बातें पड़रिया में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ में तीसरे दीन अयोध्या से आए श्री श्री 1008 श्री बलराम शरण बापू ने कहीं। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से ईश्वर की आराधना करने पर वे तुरंत ही खुश हो जाते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं । कथा के दूसरे दिन श्री बापू ने रामायण में शिव और सती का प्रसंग उठाया। उन्होंने कहा कि एक बार भगवान शिव माता सती को लेकर कुंभक ऋषि के पास कथा श्रवण के लिए पहुंचे। सती को यह बात नागवार गुजरी । सती ने सोचा कि कुंभ से पैदा होने वाला व्यक्ति कथा क्या कहेगा और सती ने कथा का परित्याग कर दिया। भगवान शिव ने कथा का श्रवण किया। समय आने पर भगवान को सती का त्याग करना पड़ा था । इसलिए कथा का श्रवण पूरे मनोयोग से करना चाहिए ।

कथा सुनने से मनुष्य पुण्य का भागी बनता है

कथा श्रवण से मनुष्य पुण्य का भागी बनता है। यदि मनुष्य अपने को भगवान के शरण में कर ले, तो जन्म जन्मांतर से मुक्ति मिल जाती है। जो व्यक्ति भाव के साथ भगवान के शरण में जाता हैं। उसी का बेड़ा पार होता है। भक्त अमीर हो या गरीब ईश्वर केवल भक्ति भाव को ही देखते हैं। उन्होंने कहां कि भगवान के पास निष्काम भाव से जाना चाहिए। संतो की संगति और भगवान की कथा सबको नसीब नहीं होती है। जो भाग्यशाली होता है उसे ही कथा नसीब होती है। श्री विष्णु महायज्ञ के आज तीसरे दिन धीरे-धीरे भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है।

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