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शहर v/s गांव: बेमौसम बारिश ने शहर की बिगाड़ी सूरत तो गांवों में 94 हजार हेक्टेयर में लगी रबी फसल बर्बाद

एक वर्ष पहले
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शुक्रवार की दोपहर से बिजली की कड़क के साथ हुई बारिश के बाद शहर में जलजमाव के साथ ही किसानों को काफी बड़ा नुकसान हुआ है। जहां शहर की सड़कों पर जमे पानी ने नगर परिषद की पोल खोल दी। वहीं, इस बारिश से किसानों के हजारों हेक्टेयर की खेती को बर्बाद कर दिया है। शहरी क्षेत्र में करोड़ों रुपए की सड़क और नाले की व्यवस्था कैसी है यह शहर की बिगड़ी हुई सूरत यह बता रही है।

देखिए शहर के हालात

बारिश के कारण शहर की अधिकतर सड़कों की स्थिति पोखर जैसी हो गई है। सदर अस्पताल रोड, कचहरी रोड, एसडीओ रोड, सिनेमा रोड, डाकबंगला रोड, स्टेशन रोड, गांधी चौक अंडर पास सहित नगर परिषद क्षेत्र के रिहायशी इलाके तालाब में तब्दील हो गए हैं। इस बारिश ने नगर परिषद के सफाई अभियान की असलियत भी उजागर कर दी।

कई इलाकों में लोगों का घर से निकलना मुश्किल

बारिश के कारण कई मुहल्लों की स्थिति नारकीय हो गई है। लोगों को घर से निकलकर बाहर जाने में काफी परेशानी हो रही है। कारण यह है कि नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है। जिसके कारण नाले का गंदा पानी सड़क पर ही बह रहा है। शहर के अधिकांश मुहल्लों में जल जमाव की स्थिति बनी हुई है।

आम और लीची को भी हुआ नुकसान


जिला कृषि विभाग के अनुसार रबी मौसम में जिले में करीब 48 हजार हेक्टेयर में गेहूं, 25 हजार 920 हेक्टेयर में दलहन, 4 हजार 625 हेक्टेयर में तेलहन एवं 15 हजार 500 हेक्टेयर में मक्का की खेती हुई थी। इस वर्ष जिले कुल 94 हजार 45 हेक्टेयर में खेती हुई है। इसके अलावा किसान नकद आमदनी के लिए व्यापक रूप से तंबाकू व मिर्चा की खेती किए थे। तंबाकू उत्पादन पर औपचारिक प्रतिबंध के कारण जिला कृषि विभाग के पास इसका डाटा नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक चक्रवातीय तूफान के साथ बारिश व ओले पड़ने से 60 से 80 फीसदी तक इन फसलों की क्षति हुई है। आम और लीची पर इसका व्यापक रूप से प्रभाव पड़ा है।

शुक्रवार और शनिवार की बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर फेर दिया पानी

सिटी रिपोर्टर| हाजीपुर

पिछले दो दिनों से हो रही बारिश जिले के किसानों पर आफत बनकर टूटा है। बारिश से फसलों की व्यापक क्षति हुई है। रबी सीजन में उगाई जाने वाली शायद ही कोई ऐसी फसलें बची है जिनका नुकसान न हुआ हो। खासकर गेहूं, दलहनी, तेलहनी, तंबाकू व मक्का समेत आम लीची की फसल को भी व्यापक रूप से क्षति हुई है। शुक्रवार और शनिवार को रूक-रूक हो रही बारिश ने किसानों को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है। किसानों ने बताया कि इस वर्ष अच्छी रबी की फसल होने की उम्मीद थी। कई वर्षों बाद समय से औसतन बारिश हुई थी। इस बार रबी के साथ तेलहनी, दलहनी, नकदी फसल तंबाकू, मिर्चा यानि हर फसल बहुत ही अच्छी होने की उम्मीद थी। लेकिन बिन मौसम बरसात ने सब किए पर पानी फेर दिया।

फसल क्षति आंकलन के लिए प्रखंडों को मिला निर्देश

दो दिनों से हुई बारिश से फसलों की क्षति की सूचना मिल रही है। बैठक कर क्षति का आकलन किया जाएगा। प्रखंडों से रिपोर्ट उपलब्ध होते ही राज्य को भेजा जाएगा।।
अशोक कुमार, डीएओ, वैशाली

हाजीपुर के डाकबंगला रोड में जलजमाव के बाद सड़क का हाल।

अब-तक 19.43 एमएम वर्षा

मार्च में पांच दिन तक हुए वर्षापात 19.43 एमएम दर्ज किया गया है। भगवानपुर प्रखंड में पांच दिनों में 36.6 एमएम, इसी तरह बिदुपुर में 1 दिन में 21 एमएम, चेहराकला में 3 दिन में 17.8 एमएम, देसरी में 1 दिन में 14 एमएम, गोरौल में 4 दिन में 39.2 एमएम, हाजीपुर में 10 एमएम, राघोपुर में 15.2 एमएम, राजापाकर में 10.2 एमएम, सहदेई बुजुर्ग में दो दिन में 9.6 एमएम, वैशाली में पांच दिन में 38.2, जंदाहा में एक दिन 10.2, लालगंज में तीन दिन में 15 एमएम, महनार में एक दिन में 8.4, महुआ में दो दिन में 10.6, पातेपुर में दो दिन में 44. एवं पटेढ़ी बेलसर में तीन दिनों में 40.2 एमएम वर्षापात रिकार्ड हुआ।

पशुपालकों को भी उठाना पड़ेगा अतिरिक्त खर्च

बेमौसम बारिश से पशुपालकों को भी पशु के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को मवेशी के लिए चारा इस वर्ष महंगा होने की पूरी संभावना है। बारिश ने गेहूं के डंठल को बहुत नुकसान पहुंचाया है। लगभग आधा डंठल खेत में ही खराब हो रहा है। लिहाजा चारा की कमी होगी। चारा की महंगाई अभी से ही दिखने लगा है।

गेहूं, दलहनी-तेलहनी और मक्के की खेती बर्बाद, हवा के साथ तेज बारिश व ओले ने तोड़ी किसानों की कमर

विकास का दावा करनेवालों की बारिश ने खोल दी पोल

क्षेत्र के विकास की दावा करने वाले स्थानीय सांसद, विधायक व नगर परिषद के प्रतिनिधियों को कोसने से लोग नहीं थक रहे हैं। नगर परिषद क्षेत्र अनुमंडल मुख्यालय समेत अन्य मोहल्लों की स्थिति काफी खराब बनी हुई है।

शहर में फरवरी में शुरू हुई थी नाले की सफाई

नाला सफाई का काम फरवरी माह से शुरू किया गया था। यह अभियान तीन माह तक चलेगा। आम नागरिक और दुकानदारों द्वारा जगह जगह नाले में कुड़ा डालने से नाला अवरूद्ध हो जाता है जिसके कारण नाले का पानी सड़क पर आता जाता है। सभी नागरिकों का दायित्व है कि नाले में कचड़ा नहीं डाले। जिससे नाले का पानी निकलने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।
सिद्धार्थ हर्षवर्द्धन, नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी

गांधी चौक स्थित रेलवे अंडरपास के पास जमा बारिश का पानी
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