हरिहर क्षेत्र की पवित्र भूमि से हाथी का पौराणिक संबंध है : रूडी

Hajipur News - गज ग्राह की भूमि हरिहर क्षेत्र मेले की पौराणिकता हाथियों के कारण ही कायम है, उसी पर यह मेला शुरू हुआ, यही उसका...

Dec 04, 2019, 09:35 AM IST
Sonepur News - elephant has a mythological connection with the holy land of harihar region rudy
गज ग्राह की भूमि हरिहर क्षेत्र मेले की पौराणिकता हाथियों के कारण ही कायम है, उसी पर यह मेला शुरू हुआ, यही उसका फाउण्डेशन है और इसे ही प्रतिबंधित कर दिया जायेगा तब, इस मेले की पौराणिकता ही समाप्त हो जायेगी। एक समय था जब, यह मेला एशिया के सबसे बड़े पशु मेला के तौर पर जाना जाता था, पर अब यह मेला दिनों दिन सिमटता जा रहा है जिसका यही कारण है और ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में मेला समाप्त हो जायेगा। सोनपुर मेले की पौराणिकता को कायम रखने की पहल करते हुए मेला में हाथियों की अनिवार्यता के मुद्दे को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठाने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सारण लोकसभा क्षेत्र के सांसद सह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने उक्त बाते कही।

सांसद राजीव प्रताप रुडी ने लोकसभा के शून्यकाल में उठाया मुद्दा

सोनपुर मेले की पौराणिकता को कायम रखने की पहल, हाथी की अनिवार्यता पर बल

सोमवार को शून्यकाल के दौरान सांसद रूडी ने लोकसभा को बताया कि हरिहर क्षेत्र की पवित्र भूमि से हाथी का पौराणिक संबंध है। सोनपुर की इस पावन भूमि को गज ग्राह से जाना जाता है। ग्रंथों के उल्लेख के अनुसार ग्राह ने गज पर हमला किया था। उसको बचाने गरुड़ पर सवार होकर भगवान विष्णु आये। इस संदर्भ को देखते हुए सोनपुर मेले में हाथी की विशेष महत्ता है। पहले मेला का प्रमुख आकर्षण हाथी हुआ करता था। पर, केंद्रीय कानून के तहत हाथियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया जिसके कारण मेले में हाथियों का आना बंद हो गया। उन्होंने सदन को बताया कि इस संदर्भ में केरल ने एक कानून बनाया, जिसके तहत प्रदर्शन वाले हाथियों के रख-रखाव, भोजन आदि के लिए नियम बना दिया गया। श्री रूडी ने सदन के माध्यम से आग्रह किया कि जिस प्रकार से केरल सरकार ने वन्य जीवन संरक्षण कानून में परिवर्तन करते हुए उसकी बिक्री पर प्रतिबंध को जारी रखते हुए प्रदर्शन की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कानून के तहत केरल सरकार के बनाये कानून की तरह बिहार में भी कानून बने ताकि गज ग्राह की पवित्र भूमि पर सोनपुर मेले मे हाथी के प्रदर्शन को प्रतिबंधित न किया जाय।

वन जीवन संरक्षण कानून से पूर्व हाथी व जंगली जानवर के साथ पालतू जानवरों की भी खरीद बिक्री होती रही है

रूडी ने सदन के बाहर बातचीत में बताया कि सोनपुर मेला मे वन जीवन संरक्षण कानून से पूर्व हाथी व अन्य जंगली जानवर के साथ पालतू जानवरों की भी खरीद बिक्री होती रही है। एक जमाने में यह मेला जंगी हाथियों का सबसे बड़ा केंद्र था। मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य, मुगल सम्राट अकबर और 1857 की क्रांति के नायक वीर कुंवर सिंह ने भी से यहां हाथियां खरीदी थी। आजादी की लड़ाई में भी इस पवित्र भूमि का विशेष योगदान रहा है। उस समय एक जगह भीड़ जुटाने पर ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा था, तब वीर कुंवर सिंह समेत अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी बैठकों को व जनता को संबोधित करने के लिए इस मेले का उपयोग स्वाधीनता सेनानियों ने किया था।

हाथियों के इस मेले में नहीं पहुंचने पर इसकी रौनक समाप्त हो रही थी इसलिए इस बार मेला शुरू होने के बाद प्रशासनिक प्रयास से हाथी पालकों को फोन से या अन्य माध्यमों से सूचना देकर उनको हाथी के साथ आमंत्रित किया गया था। लेकिन बुलाने के बाद भी हाथी पालकों के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण बहुत सारे हाथी पालक लौट भी गये।

सांसद राजीव प्रताप रूडी ने लोकसभा के शून्यकाल में सोनपुर मेले का मुद्दा उठाया

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