यज्ञस्थल के पास भगवान शिव का स्थान नहीं देख क्रोधित होकर सती अग्निकुंड में कूद दे देती हैं जान

Hajipur News - हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में विगत 25 नवंबर से रामायण का मंचन हो रहा है। जिसे देखने के लिए हर शाम बड़ी संख्या में...

Dec 04, 2019, 09:35 AM IST
Sonepur News - not seeing the place of lord shiva near the sacrificial fire sati jumps into the fire pit
हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में विगत 25 नवंबर से रामायण का मंचन हो रहा है। जिसे देखने के लिए हर शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। रामायण मंचन के कलाकार अपनी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दे रहे है। हर शाम कलाकार रामायण के अलग-अलग प्रसंग का मंचन कर रहे है। इसी कड़ी में रामायण मंचन के अंतिम दिन मंगलवार की शाम उत्तर प्रदेश के सलेमपुर की नाट्य संस्था सांस्कृतिक संगम के कलाकारों ने शिव विवाह प्रसंग का बड़ा ही मनोरम दृश्य उत्पन्न किया। मंच से पर्दा हटते ही ऊंचे पहाड़ों के बीच बैठे हुए देवाधिदेव महादेव का दर्शन कर दर्शक धन्य हो गए। वहीं पर्दे के पीछे से भगवान भोलेनाथ का गीत गूंज रहा है। इसी बीच नारायण नारायण जपते हुए महामुनि नारद का आगमन होता है। इस दौरान मुनि नारद सती से कहते है कि आपके पिता महाराज दक्ष के यहां महायज्ञ हो रह है। वहां से आपको निमंत्रण नहीं आया है क्या। नारद मुनि की बात सुनकर सती बहुत दुखी हो जाती है कि उनके मायके में यज्ञ हो रहा है और उनके पिता ने उन्हें निमंत्रण नहीं दिया है। जिसके बाद सती अपने पति भगवान शिव से मायके जाने की जिद कर बैठती है। भगवान शिव मना करने के बावजूद सती अपने पिता के घर चली जाती है। लेकिन सती जैसे ही मायके में हो रहे यज्ञ स्थल पर पहुंचती है कि वहां का दृश्य देखकर क्रोधित हो जाती है।

25 नवंबर से यूपी के सलेमपुर से आए सांस्कृतिक संगम संस्था के कलाकार रहे थे रामायण का मंचन

देवताओं ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए काम व रति को भेजा

देवताओं ने शिव की समाधि भंग करने के लिए काम एवं रति को शिव के समक्ष समाधि भंग करने के लिए भेजा। शिव का समाधि भंग होते ही क्रोधित होकर काम को भस्म दिया। रति के विलाप एवं अनुनय विनय के बाद उन्होंने फिर से काम को जीवित होने की बात रति को बताई। इसी बीच पहुंचे वहां देवताओं ने भगवान शिव को बताया कि सती का जन्म पार्वती के रूप में हो चुका है। पार्वती ने कठिन तपस्या कर शिव को पति रूप में पाने का वरदान पाया। इसके बाद शिव का पार्वती के साथ धूमधाम के साथ शादी होती है। अपने अंतिम दिन के नाट्य मंचन में संस्था के कलाकारों ने एक बार फिर अपनी कौशल एवं दक्षता को प्रदर्शित किया। शिव विवाह में डूबे श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पंडाल में किसी को यह एहसास ही नहीं हुआ कि संध्या का समय रात में कब परिवर्तित हो गया।

रामायण मंचन के दौरन नृृत्य की प्रस्तुति देते कलाकार।

कुंड से सती का शव कंधे पर रख तांडव करते हैं शिव : यज्ञस्थल के निकट भगवान शिव का स्थान नहीं देख सती का अपने माता पिता से विवाद हो जाता है। सती भगवान शंकर की बात को याद कर निर्णय लेती है अपमानित जीवन जीने से बेहतर है इस शरीर को ही खत्म कर दिया जाए। यही सोचकर सती यज्ञ कुंड के बीच धधकती अग्नि में कूद पड़ती है। इसकी जानकारी नंदी शिव को देते है कि भगवान शिव वीरभद्र को राजा दक्ष के यज्ञ स्थल को तहस नहस करने के आदेश देते हुए स्वयं भी यज्ञ स्थल पर पहुंच कर हवन कुंड से सती का शव कंधे पर लादकर तांडव शुरू कर देते हैं। इसके बाद प्रसंग आता है कि तारकासुर को जैसे ही पता चलता है कि सती ने देह त्याग दिया तो वह प्रसन्न हो जाता है।

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