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विभागीय रैंकिंग में सदर अस्पताल राज्य में नंबर-1 जबकि 10 वर्षों से आईसीयू का ताला ही नहीं खुला

Hajipur News - जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल दिनोदिन बुरा होते जा रहा है। जिलास्तरीय सदर अस्पताल भी रेफरल अस्पताल में...

Feb 15, 2020, 10:10 AM IST
Vaishali News - sadar hospital no 1 in the state in departmental rankings icu lock has not been opened for 10 years

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल दिनोदिन बुरा होते जा रहा है। जिलास्तरीय सदर अस्पताल भी रेफरल अस्पताल में तब्दील हो गया है। जिन सामान्य व एक्सीडेंटल मरीज का आसानी से इलाज हो सकता है उन्हें भी फर्स्ट-एड की औपचारिकता पूरी कर पीएमसीएच अथवा आईजीएमएस पटना रेफर कर दिया जा रहा है। सदर अस्पताल का डेटा बताता है कि हर माह औसतन 1500 मरीज पटना रेफर किए जा रहे हैं। बदतर स्वास्थ्य सेवा-सुविधाओं के बावजूद राज्य स्वास्थ्य विभाग की लक्ष्य योजना के तहत कराई गई रैंकिंग में हाजीपुर सदर अस्पताल सूबे में पहला स्थान हासिल किया है। लोग आश्चर्यचकित हैं। कहा तो यह जा रहा है कि सदर अस्पताल प्रशासन ने जुगाड़ से पुरस्कार पा लिया। लोगों का आरोप कहां तक सही है, क्यों न जिले में उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सरसरी निगाह से देख ली जाए।

उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं पर एक नजर

जिला में सदर अस्पताल के अलावा अनुमंडल अस्पताल 03, रेफरल अस्पताल 03, पीएचसी 16, अतिरिक्त पीएचसी 34, स्वास्थ्य उप केंद्र 337, पहला रेफरल यूनिट 5, एसएन सीयू 1, इमरजेंसी पीएचसी 13, इमरजेंसी एपीएचसी 8, ओपीडी ड्रग 32, मैंपीडी ड्रग 76, रक्त बैंक 01, लैब टेस्ट 18, एक्स-रे 18, अल्ट्रासाउंड 01 की व्यवस्था है।

विभाग को भेजा जा चुका है रिक्तियों का डाटा : सीएस


आबादी के लिहाज से स्वास्थ्य विभाग में कार्यबल व उपलब्ध संसाधनों का भी है घोर अभाव


वर्तमान में 325 चिकित्सकों की आवश्यकता

2011 के जनसंख्या को आधार बनाकर कुल 287 चिकित्सकों के सृजित पद की स्वीकृति दी गई थी, उस समय जिले की जनसंख्या 35 लाख के आसपास थी जो अब 40 लाख से पार है़। फिलवक्त जिले में 105 चिकित्सक ही है़ं। 182 चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। जबकि वर्तमान जनसंख्या के आधार पर 325 चिकित्सकों की आवश्यकता है। सभी ओपीडी में 41 व इमरजेंसी में 76 चिकित्सक पदस्थापित है।

मेडिकल एक्यूपमेंट, मशीनें मंगवा कर लगाई गई थी

करीब दस वर्षों से बनकर तैयार आईसीयू का ताला नहीं खुला है। हार्ट संबंधी बीमारियों का इलाज के लिए मेडिकल एक्यूपमेंट, मशीनें मंगवा कर लगाई गई थी जो अब संभवत: बेकार हो गई होगी। कार्डियोलॉजी के स्पेशलिस्ट चिकित्सक, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण दिल के मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है। हार्ट अटैक की स्थिति में जब तक पटना लेकर जाए जाए मरीजों की मौत हो जाती है।

सदर अस्पताल को 300 बेड की स्वीकृति मिल चुकी है

जिले की आबादी 40 लाख से ऊपर है। यहां उच्चस्तरीय सरकारी अस्पताल नहीं है। महुआ में मेडिकल कॉलेज की घोषणा हो चुकी है पर अस्तित्व में आने में पांच साल लगेगा। सदर अस्पताल को 300 बेडेड जिला अस्पताल के रूप में स्वीकृति दी जा चुकी है पर उस मानक के अनुरूप विकसित किया जाना बाकी है। फिलवक्त सदर अस्पातल में 150 बेड ही उपलब्ध है। 150 से 175 तक मरीज रोजाना आते हैं।

फिलवक्त सदर अस्पातल में 150 बेड ही उपलब्ध है, रोजाना 150 से 175 तक मरीज आते हैं सदर अस्पताल

जिले में चिकित्सकों के सृजित पद 287 के विरुद्ध 105 चिकित्सक ही कार्यरत, चिकित्सकों के 182 पद रिक्त

सदर अस्पताल का बंद पड़ा सीसीयू वार्ड।

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