मवेशियों के लिए चारे की जुगाड़ करने निकला किसान।

Hajipur News - मुसीबत

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:25 AM IST
Vaishali News - the farmer turned to make a bucket for the cattle
मुसीबत

मवेशियों के लिए चारे की जुगाड़ करने निकला किसान।

एसी में बैठकर अफसर बाढ़ नियंत्रण की कर रहे प्लानिंग गंगा-गंडक का जलस्तर वाॅर्निंग लेवल से सात सेमी ऊपर

भास्कर टीम|हाजीपुर, राघोपुर, लालगंज और वैशाली

गर्मी में अगलगी और बरसात में बाढ़ का कहर झेलना राघोपुर की स्थायी नियति बन चुकी है। चारों ओर से गंगा नदी से घिरे यह टापूनुुमा ब्लॉक इस सीजन में भी बाढ़ की त्रासदी झेलने के लिए अभिशप्त है। प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ आपदा कई मैराथन बैठक हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी एसी रूम में बैठकर बाढ़ नियंत्रण का खाका खींचा जा रहा है। हालांकि राघोपुर में पानी नदी के गर्भ में ही है। चकसिंगार में हल्का कटाव होना शुरू हुआ है। हर दिन बढ़ रहा गंगा का जलस्तर खतरे की घंटी बजाना शुरू कर दिया है बावजूद प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कोई ठोस पहल नहीं हो रही है। कायदे से अब तक जर्जर व ओपन तटबंध की मरम्मत, बोल्डर पीचिंग, कटाव निरोधी कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है।

रामपुर करारी व बरारी गांव के पास कटाव शुरू

राघोपुर का चकसिंगार, विशनपुर, रामपुर करारी, रामपुर बरारी, जुड़ावनपुर आदि बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सबसे पहले नदी का पानी इन्हीं पंचायतों में दस्तक देता है। राघोपुर में बाढ़ का यह प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। नदी के मुहाने पर होने के कारण चकसिंगार और रामपुर करारी व बरारी के निकट नदी में अभी हल्का कटाव शुरू हुआ है।

जलस्तर बढ़ने से हर साल बाढ़ की मार झेलने के लिए मजबूर राघोपुर चकसिंगार,रामपुर बरारी और करारी के लोगों की बढ़ी बेचैनी

हाजीपुर में उफनकर बह रही गंडक नदी।

हर साल कटावरोधी कार्य पर खर्च होते हैं करीब दस करोड़

कटाव से सबसे ज्यादा प्रभावित पंचायत चकसिंगार एवं रामपुर करारी एवं बरारी में कटावरोधी कार्य पर 2017 में पौने नौ करोड़ खर्च हुए थे। प्राय: हर साल ही इस मद में करीब दस करोड़ खर्च किए जाते हैं। जनरल सिमेंट की बोरियों में बालू भरकर तटबंध पर कटाव निरोधी कार्य किया गया था। डाली गई बोरियां पानी में बहे नहीं इसलिए नाव को पानी की तेज धारा में बह जाने से रोकने के लिए लंगर डाल दिया जाता है उसी तर्ज पर उन बोरियों को रस्से से जोड़ते हुए बांधकर रखा जाना था। ठेकेदारों ने यह नहीं किया। नदी किनारे डाली गई बड़ी संख्या में बोरियां बह जाती हैं।

वाल्मीकिनगर गंडक बराज से छोड़ा गया 1 लाख 74 हजार क्यूसेक पानी, तिरहुत तटबंध जर्जर होने से लालगंज पर मंडराया बाढ़ का खतरा

लालगंज| गंडक नदी का जलस्तर का वार्निंग लेवल 49.50 है जबकि डेंजर लेवल 50.50 है। वर्तमान में गंडक का जलस्तर 49.57 है। वाल्मीकि नगर गंडक बराज से शुक्रवार को 1 लाख 74 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अमूमन हर दूसरे-तीसरे दिन करीब दो लाख क्यूसेक पानी गंडक में छोड़ा जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले चार-पांच दिनों से नेपाल में भारी बारिश हो रही है। नेपाल से आमद पानी से ही हर साल बिहार को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। गंडक के जलस्तर में हर दिन हो रही वृद्धि से तिरहुत तटबंध से सटे लालगंज के इलाके में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

लालगंज में बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए की जा रही तैयारी।

बांध में दरार से सहमे लोग, बाढ़ की आशंका से उड़ी ग्रामीणों की नींद

बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल लालगंज का दावा है कि संभावित बाढ़ से निपटने के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। आसपास के लोगों का कहना है कि गंडक नदी पर बने तिरहुत तटबंध के ऊंचीकरण का कार्य वर्ष 2010 में हुआ। नौ साल बीतने के बाद तटबंध की स्थिति जर्जर हो चुकी है। चूहे, मांद में रहने वाले वन्य प्राणियों ने तटबंध में सूराख बनाकर बाढ़ का रास्ता बना दिया है। बांध में पहले से भी दरार है। वहीं, तटबंध को कई जगह अवैध बालू खनन करने के लिए काट दिया गया है तो कई जगह मछली मारने के लिए। ऐसे में इस तटबंध के इर्द-गिर्द बसेगांव के लोगों को बाढ़ की चिंता सता रही है। हालाँकि जहाँ जहां बांध की स्थिति जर्जर है वहां विभाग द्वारा बालू से भरी बोरी डालकर मजबूत किया गया है। स्लूईश गेट की भी मरम्मत कर दी गई है। संवेदनशील स्थलों पर होमगार्ड की प्रतिनियुक्ति किए जाने का दावा किया गया है।

बाढ़ से निपटने के लिए मोबाइल एंबुलेंस चौबीस घंटे तैयार : एक्जीक्यूटिव इंजीनियर

बाढ़ की विभीषिका से निपटने को लेकर बाढ़ नियंत्रण विभाग अपनी तैयारी पूरी कर ली है। विभाग के कार्यपालक अभियंता राजीव रंजन कुमार ने बताया कि इससे निपटने के लिए तटबंध के संवेदनशील स्थलों को चिह्नित किया गया है। वैसे संवेदनशील स्थलों पर बालू भरा बोरा डाल कर बांध को मजबूत कर दिया गया है। इतना ही नहीं 50,000 बालू भरा बोरा और 25000 सीएफटी बालू का भंडारण प्रमंडलीय परिसर में रखा जा चुका है।

वैशाली में टूटे बांध को देखने भी नहीं आए बाढ़ नियंत्रण विभाग के लोग

वैशाली |वैशाली में गंडक नहर के हाजीपुर वितरणी आरडी 22 में कटे स्थल को भरने का कार्य 48 घंटे बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। गंडक नहर, जल निस्सरण व बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल के किसी अफसर या कर्मचारी अब तक बांध देखने भी नहीं पहुंचे। नहर के टूटे तटबंध से पानी फैलने के कारण हजारों एकड़ जमीन पानी में डूब चुका है। मक्का व अन्य खरीफ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। धान की फसल लगाने के लिए किसान खेत तैयार कर रहे थे। धान का बिचड़ा भी रोपनी के लिए डाला गया था। यह सब बर्बाद हो गया है। बांध मरम्मत कर भी दिया जाता है तो जिस परिमाण में बाढ़ का पानी खेतों में जमा है उसे सूखने में एक माह से अधिक समय लग जाएगा तब तक धान की रोपनी का समय बीत चुका होगा।

वैशाली में स्कूल से निकलते बच्चे और मौजूद अन्य लोग।

बाढ़ के पानी से घिरे स्कूल में पढ़ने आ रहे बच्चे

नवसृजित प्राथमिक विद्यालय राहीमपुर भेरिहर टोला स्कूल चारो तरफ से पानी में घिर गया है। जान की परवाह न कर बच्चे पानी में तैरते हुए स्कूल आ पहुंचे। बुद्धिजीवियों ने बताया कि पानी में डूबने की परवाह न कर अभिभावकों ने बच्चों को कैसे स्कूल आने दिया। प्रधानाध्यापक उमाशंकर कुमार ने बताया कि कुछ बच्चे आ गए हैं। उन्हें मिड डे मिल देकर छोड़ दिया जाएगा। समन्वयक संजय सिंह ने बताया कि सोमवार को पानी की स्थिति देखकर वरीय पदाधिकारी को रिपोर्ट दी जाएगी।

पानी के बहाव को रोक दिया गया है : इंजीनियर

तटबंध के संबंध में पूछे जाने पर गंडक नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता विनोद कुमार झा ने बताया कि बाढ़ का खतरा नहीं है। बांध टूटने की रिपोर्ट पर पानी का बहाव कम कर दिया गया है। बांध की मरम्मत के लिए बांस एवं बोरे की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जल्द ही पानी के बहाव को रोक दिया जाएगा। उन्होंने टूटे तटबंध से राहिमपुर, भेरियर टोला , खेदरपुरा गांव में पानी पहुंचने की बात स्वीकार की है।

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