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सोनपुर मुख्यालय परिसर में प्रशासनिक उदासीनता से सात वर्षों से अधूरा पड़ा है मनरेगा भवन का काम

एक वर्ष पहले
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सोनपुर प्रखंड मुख्यालय परिसर में मनरेगा विभाग की लापरवाही व प्रशासनिक उदासीनता के कारण मनरेगा भवन का निर्माण कार्य विगत 7 वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। इतने लंबे समय के बाद भी भवन का निर्माण नहीं हो पाने से कर्मियों व अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया जा रहा है। बताया जाता है कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में 25 लाख रुपए की लागत राशि से पंचायत समिति की योजना के तहत प्रखंड मुख्यालय परिसर में मनरेगा भवन का निर्माण कार्य आरंभ कराया गया था। लेकिन कुर्सी तक तैयार होने के दौरान ही इसके अभिकर्ता द्वारा अधिकतर राशि की निकासी कर लेने के बावजूद काम रोक दिया गया। उस समय यह निर्माण प्रखंड के बीडीओ की देखरेख में हो रहा था। इसके 7 वर्ष बीतने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। कार्यस्थल से कार्य योजना का बोर्ड भी गायब है। डीएम सहित अन्य अधिकारियों द्वारा समीक्षा के दौरान मनरेगा भवन के निर्माण कार्य को पूरा करने का समय-समय पर निर्देश अधिकारियों व कर्मियों को दिया जाता रहा है। लेकिन इसके निर्माण पूर्ण नहीं किए जाने से यह नवनिर्मित अधूरा मनरेगा भवन के दीवारों पर जंगल पेड़ पौधे होने से इसकी स्थिति निर्माण से पूर्व जर्जर सी स्थिति हो गई है।

रिवाइज्ड एस्टीमेट पास होने पर होगा कार्य : मनरेगा पीओ

इस संबंध में पूछने पर मनरेगा पीओ मो शाहिद अली ने बताया कि मनरेगा भवन के लंबित निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए उन्होंने अभिकर्ता से बात की है। अभिकर्ता द्वारा आश्वासन दिया गया है कि होली के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2012 में इसकी पुराना एस्टीमेट 25 लाख की थी जिसे बाद में रिवाइज्ड कर लगभग 32 लाख किया गया है। इसके निर्माण काफी लंबे समय से चलते रहने के कारण इस योजना का अब रिवाइज्ड कर लागत बढ़ाना जरूरी है। इस संबंध में वे जिला के पदाधिकारियों के पास अनुरोध और प्रस्ताव भेज चुके है। उन्होंने साथ ही कहा जब बीडीओ के लेवल पर निर्माण हो रहा था उस समय ही प्लिंथ लेवल तक निर्माण में ही अधिक राशि का निकासी हुआ था। उसके बाद मनरेगा द्वारा छत लिंटर तक का कार्य पूरा कराया गया। जैसे ही जिला से रिवाइज्ड पास होता है कार्य के आधार पर राशि का भुगतान किया जाएगा। अब तक लगभग 18 लाख रुपए का भुगतान इस पर हो चुका है।

बीडीओ को नहीं है कार्य की जानकारी

वहीं इस संबंध में पूछे जाने पर बीडीओ पंकज कुमार दीक्षित ने बताया कि कोई अधिकृत जानकारी नहीं है कि यह काम कब से चल रहा है क्या स्थिति है। उन्हें इसका कोई आइडिया नहीं। अभिलेख मनरेगा पीओ के पास है।

भवन के बनने से 23 पंचायत के लोगों होता लाभ

मनरेगा भवन बनने से प्रखंड के सभी 23 पंचायतों से आने वाले मनरेगा मजदूरों को फायदा होता। एक ही छत के नीचे मनरेगा के अधिकारी व कर्मी मिल जाते। मनरेगा का पंचायत से प्रखंड तक की योजनाओं का अभिलेख व कागजात सुरक्षित रहता। वहीं प्रखंड मुख्यालय के तर्ज पर पंचायतों में भी मनरेगा भवन बनता।

काम से अधिक राशि की निकासी के बाद भी अधूरा है भवन

प्रखंड उप प्रमुख श्याम बाबू ने कहा कि अधूरे पड़े इस मनरेगा भवन के निर्माण का कार्य 2012 में प्रखंड कार्यालय के द्वारा प्रारम्भ हुआ था और कुर्सी तक ले जाने के बाद कार्य बंद हो गया था। उनके उपप्रमुख बनने के बाद तब तक यह योजना मनरेगा को मिल गई। उन्होंने उसके बाद अभिकर्ता को कुर्सी के छत के लिंटर तक कार्य लगभग दस लाख खर्च कर करवाया और लेकिन अबतक 3.40 लाख रुपए ही निर्गत हो पाया है। जबकि कुर्सी तक के निर्माण में लगभग 14 लाख रुपए की निकासी हुई थी। वे इसे पूरा करने का निर्देश प्रखंडस्तरीय अधिकारियों को कई बार दे चुके है। वर्तमान में भवन का निर्माण लिंटर तक हुआ। इस योजना से अब तक लगभग 18 लाख रुपए के राशि की निकासी की बात तो अधिकारी भी कर रहे है। प्रारम्भ में ही कार्ययोजना में काम से अधिक राशि की निकासी अभिकर्ता बने पंचायत रो जगार सेवक द्वारा कर लेने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है।

2012-13 में 25 लाख की लागत रसे पंचायत समिति की योजना के तहत निर्माण शुरू किया गया था

सोनपुर में सात वर्ष से बन रहा मनरेगा भवन।
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