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‘ज्ञान और शक्ति एक ही सत्ता है, जिसे परमात्मा कहते हैं’
शहर से सटे बिठलपुर के झखुआ मैदान में संत काग बाबा के 44 वें वार्षिकोत्सव पर सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग के दूसरे दिन आचार्य गुरवानंद ने कहा कि ज्ञान व शक्ति कहने से दो अस्तित्वों का बोध होता है। वास्तव में दोनों एक ही है जिसे परमात्मा कहते हैं।
जैसे मैं और मेरी शक्ति इन दोनों का ऐसा रूप है जिसे एक दूसरे से जुदा नहीं किया जा सकता है। मैं अगर नहीं रहूं तो मेरी शक्ति काम नहीं कर सकती है और मेरी शक्ति न रहे तो मैं कुछ नहीं कर सकता। यह एक पन्ने के दो पृष्ठ की तरह हैं।
उन्होंने कहा कि साकार में दो अस्तिव लगते है लेकिन वास्तव में एक ही सत्ता है। यह दृश्यमान जगत परमात्मा की इच्छा का साकार रूप है। सृष्टि के एक-एक कण परमात्मा पर निर्भर है। इसलिए उनका कण-कण में वास है। इसलिए परमात्मा को सर्वव्यापी कहना सत्य है। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक सूक्ष्मतम सत्ता है। इसलिए परमात्मा की व्याप्ति सर्वत्र है और उनका अस्तित्व व्याप्ति से भी परे है। यही कारण है कि जहां मनुष्य सोच भी नहीं सकता वहां भी कार्य हो रहा है। जैसे मां के गर्भ में बच्चे का निर्माण, भरण-पोषण क्यों और कैसे हुआ उन्हें भी नहीं पता। यद्यपि इसके पीछे अदृश्य सत्ता रहती है जिसे मनुष्य इन नेत्रों से देख नहीं पाता है। उन्होंने कहा कि व्याप्त सत्ता जो जीव के अन्दर है आत्मा कहलाती है जबकि जड़ में जो व्याप्त हो वह परमात्मा कहलाती है। अत: आत्मा और परमात्मा के कारण आत्मा का ज्ञान और दर्शन परमात्मा का ही ज्ञान और दर्शन है।
प्रवचन करते आचार्य गुरवानन्द।