65% ऑटो चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं, बैठाते ज्यादा सवारी
झाझा-चकाई, सोनो-जमुई, सोनो-चरकापत्थर आदि मार्गों पर बड़ी संख्या में ऑटो का रोजाना परिचालन होता है। ग्रामीण क्षेत्रों से मुख्य बाजार तक इन दिनों ऑटो वालों का खासा वर्चस्व है। सही मायने में ग्रामीण क्षेत्र में ऑटो को वहां की लाइफ लाइन माना जा सकता है। पिछले चार- पांच वर्षों में सड़कों पर ऑटो की संख्या बेतरतीब ढंग से बढ़ी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि परिवहन विभाग इस बाबत आंखें मूंदे बैठा है। ऑटो पर क्षमता से अधिक सवारियां ढोना, अश्लील गाने बजाना आदि मामलों में परिवहन विभाग अभी तक किसी प्रकार की निषेधात्मक कार्रवाई करने से बचता रहा है। एक अपुष्ट आंकड़ें के मुताबिक 65 फीसद ऑटो चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है।
यातायात संबंधी नियमों की जानकारी नहीं रहने के कारण वैसे ऑटो चालकों को दाएं -बाएं का भी ज्ञान नहीं। ऐसी स्थिति में ऑटो से सवारी करना कई यात्रियों को खासा महंगा साबित हुआ है।
ऑटो पर महिला और पुरुष की सीटें निर्धारित नहीं होतीं
छोटी सी एक ऑटो पर यदि 15 से 20 सवारियां लाद ली जाती हों तो इसे आप क्या कहेंगें। ऑटो , एरिश , मैजिक जैसे वाहनों पर क्षमता से अधिक सवारियां बिठाना , वाहनों की छत पर सवारियां बिठाना आदि दृश्य तो यहां हर एक ऑटो की कहानी है। ऑटो पर महिला व पुरुष की सीटें निर्धारित नहीं होतीं। छेड़खानी के मामले की शुरुआत यहीं से होती है। झमता से अधिक सवारियां लादने के दौरान महिला - पुरूष यात्री एक ही सीट पर बमुश्किल बैठते हैं और कभी - कभी बात बिगड़ते देर नहीं लगती।स्थानीय पुलिस वाहन चेकिंग के नाम पर दुपहिए वाहनों को ही निशाना बनाती रही है। इन सबसे इतर आम जनता की सुविधा बहाली के लिए यही पुलिस सवारी वाहनों की जांच से बचती रहती है। नियमित जांच से यात्रियों को रोजाना होने वाली मुश्किलें कम हो सकती हैं।
सवारी वाहनों की नियमित होगी जांच
प्रखंड के विभिन्न मार्गों पर चल रहे सवारी वाहनों की नियमित जांच की जाएगी तथा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
राजेश कुमार, थानाध्यक्ष, सोनो
क्षमता से अधिक सवारियां ढोना और अश्लील गाने बजाने पर नहीं लग रहे रोक
जान जोखिम में डालकर ऑटो के छत पर बैठे यात्री।