आशा ने दबाव डाल निजी दुकान से दवा खरीदवाई,गंभीर होने पर रेफर

Jamui News - सदर अस्पताल में आशा कार्यकर्ता की मनमानी चरम सीमा पर पहुंच गई है। बीते शुक्रवार को सुरक्षित प्रसव के लिए सदर...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:41 AM IST
Jamui News - asha pressurized to buy medicine from private shop referred to serious
सदर अस्पताल में आशा कार्यकर्ता की मनमानी चरम सीमा पर पहुंच गई है। बीते शुक्रवार को सुरक्षित प्रसव के लिए सदर अस्पताल पहुंचे झाझा नगर पंचायत क्षेत्र के हेलाजोत मुहल्ला निवासी दीपक रावत ने बताया कि वह अपनी प|ी खुशबू देवी को सुरक्षित प्रसव को लेकर सदर अस्पताल में भर्ती कराया था।

ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक द्वारा आवश्यक जांच के बाद दवा भी लिखी गई। लेकिन साथ आई आशा कार्यकर्ता गीता देवी उनके दवा को गलत बताते हुए जच्चे-बच्चे की सुरक्षा का झांसा देकर निजी दवा दुकान से दवा खरीदने पर मजबूर कर दिया। कुछ देर बाद दवा के दुष्प्रभाव से प्रसूता की तबीयत बिगड़ने लगी। पुनः महिला चिकित्सक को कहा तो उन्होंने ऑपरेशन कराने की बात कही। उसने बताया कि इस बात को सुनते ही आशा कार्यकर्ता सदर अस्पताल में अच्छी व्यवस्था नहीं होने की बात कहकर निजी क्लिनिक में जाने के लिए कहा। मजबूरन आर्थिक नुकसान सहते हुए भी परिजन प्रसूता व नवजात की सुरक्षा को लेकर निजी क्लीनिक में भर्ती कराया।

सदर अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीज।

सीएस ने लगाई चिकित्सक को फटकार

जमुई| मुख्यालय स्थित बाल सुधार गृह से शनिवार को इलाज के लिए 17 वर्षीय संदीप कुमार को सदर अस्पताल में लाया गया। जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डाॅ. देवेंद्र कुमार ने बेहतर इलाज के लिए उसके साथ आए कर्मियों को सर्जन चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी। जिससे नाराज सिविल सर्जन डाॅ. श्याम मोहन दास ने चिकित्सक को फटकार लगाते हुए उक्त मरीज को इलाज के बाद उसे सरकारी एंबुलेंस से बाल सुधार गृह भेज गया। इस बावत चिकित्सक डाॅ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि संदीप को बीते कई दिनों से बुखार लगने की शिकायत थी,साथ ही उसे सर्जरी संबंधी कुछ और परेशानी थी।

अस्पताल प्रबंधक के आदेश को नहीं मानती आशा

लोगों की मानें तो अस्पताल के लिए यह कोई नई बात नहीं है, अस्पताल प्रबंधन द्वारा महिला बिचौलिया सहित आशा कार्यकर्ता है की धरपकड़ को लेकर परिचय पत्र, ड्रेस कोड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज हमेशा अपने पास रखने को कहा गया था। लेकिन प्रबंधन के आदेश को न मानते हुए ऐसे आशा कार्यकर्ता द्वारा मनमानी किया जा रहा है। जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ रहा है। वहीं नाम नहीं छापने पर वहां के कर्मचारियों ने बताया कि यह कोई नई समस्या नहीं है, महिला बिचौलिया सहित आशा कार्यकर्ता की मनमानी से मरीज व परिजन को परेशानी होती है। कई बार तो ऐसे कार्य से जच्चे-बच्चे की मौत भी हो जाती है। इधर, महिला चिकित्सक डाॅ. शालिनी सिंह ने बताया कि आवश्यक जांच के बाद उक्त मरीज को सेफ़ट्राकजोन तथा एनाफोर्टन नामक सुई लिखा गया था, लेकिन मरीज के परिजन ईपी डॉसीन तथा ड्रोटीन नामक सुई दिखाया, जिसके दुष्प्रभाव से ही ऐसा हुआ। उन्होंने बताया कि जो दवा प्रसव के अंतिम दशा में चलना चाहिए था, वह उसे प्रारंभ में ही लगा दिया गया। ऐसे में मरीज की जान भी जा सकती थी।

बिचौलिए पर होगी कार्रवाई


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