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महाशिवरात्रि आज, भूत-प्रेतों के साथ निकलेगी बाबा की बारात, तैयारी पूरी

Jamui News - जमुई| महाशिवरात्रि को लेकर जिले के सभी शिवालयों का रंग-रोंगन कर सजाया गया है। शिवालयों में महादेव पार्वती की...

Feb 21, 2020, 07:46 AM IST
जमुई| महाशिवरात्रि को लेकर जिले के सभी शिवालयों का रंग-रोंगन कर सजाया गया है। शिवालयों में महादेव पार्वती की शादी की पूरी कर ली गई है, जिले के प्रसिद्ध धनेश्वरनाथ मंदिर प|ेश्वर धाम व गिद्धेश्वर मंदिर सज-धजकर तैयार है। कल यहां देर शाम शिव की बारात निकलेगी जबकी भक्तों द्वारा झांकी निकाली जाएगी देर रात शिव पार्वती की विवाह संपन्न होगी। मौके पर मंदिर परिसर में मेले का आयोजन होगा।

मंदिर का 500 वर्ष पुराना इतिहास

सिमरिया स्थित धनेश्वर नाथ मंदिर

मुख्यालय से 12 किमी सिमरिया स्थित धनेश्वर नाथ मंदिर। मानना है कि इस मंदिर में लगभग 500 वर्ष पूर्व से ही बाबा की पूजा-अर्चना होती आ रही है। गिद्धौर रियासत के आठवें तत्कालीन राजा पूरणमल भगवान शिव का परम भक्त था। वे रोज देवघर में जाकर भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद ही भोजन ग्रहण करते थे। बाढ़ की स्थिति होने जाने से वें देवघर नहीं जा सके। सात दिनों तक नदी किनारे देवघर जाने के लिए भूखे प्यासे बैठे रहे। स्वप्न में आकर भगवान शिव ने कहा कि अब तुम्हें मेरी पूजा के लिये यहां आने की आवश्यकता नहीं वे स्वयं तुम्हारे क्षेत्र में विराजमान हो जाऊंगा।

रावण और जटायू के बीच हुई थी लड़ाई

गिद्धेश्वरनाथ मंदिर आस्था का केंद्र

जिला मुख्यालय से 10 किलो मीटर दूर खैरा से गरही जाने बाले रास्ते में गिद्धेश्वरनाथ मंदिर आस्था का बड़ा केन्द्र है कहा जाता है कि रावण और जटायू के बीच इसी स्थल पर लड़ाई हुई थी। गिद्धेश्वर मंदिर से सटे इस मंदिर को लोग मन्नत पूरा करने वाले शिव के रूप में मानते है। 150 वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया गया था। तबसे से यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा- अर्चना करने दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां भक्त जो भी मन्नते मांगते है वह पूर्ण होता है। लोगों का कहना है कि इस मंदिर का इितहास बहुत पुराना रहा है।

मंदिर का 455 वर्ष पुराना इतिहास

पतौना का पंचवटी प|ेश्वर धाम

जिला मुख्यालय से चार किमी मीटर कर दूरी पर स्थित पतौना गाव स्थित पंचवटी प|ेश्वर धाम मंदिर अपने आप में कई इतिहास को समेटे हुए है। मंदिर के पुजारी राजीव पांडेय बताते है कि 455 वर्ष पूर्व लकड़ी चुनने आए एक चरवाहे को पत्ते के ढेर के बीच प्रकाश पुंज दिखाई पड़ा जिसे देखा तो शिव की आकृति दिखाई पड़ी। इसके बाद आसपास के इलाके में लोगों को जानकारी मिली बाद में स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया। प|ेश्वर धाम मंदिर कामनालिंग के रूप में जाना जाता है।

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