पोषण पखवाड़े में पुरुषों की भागीदारी हो सुनिश्चित
कुपोषण के कुपरिणामों से चिंतित संबंधित विभाग ताजा अभियान में पूरा जोर लगा रहा है। ताजा कुपोषण पखबाड़े की व्यापक सफलता के लिए अब इसमें पुरूषों को शामिल करने की योजना बनाया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने कुपोषण के कुपरिणामों के बारे में जानकारियां देते हुए बताया कि कुपोषण के कारण आज आधे बच्चे नाटेपन के शिकार हैं। बेहतर पोषण के लिए व्यवहार परिवर्तन अधिक मायने रखता है। अभी भी परिवार में बच्चों को खाना खिलाने की जिम्मेदारी सिर्फ घर की महिलाओं के ऊपर होती है। इसमें पुरुषों की भागीदारी नगण्य होती है। यदि पुरुष भी भोजन में कम से कम चार प्रकार के खाद्य समूह एवं आहार की गुणवत्ता की महत्ता को समझें तब कुपोषण पर दोहरी लगाम लगायी जा सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार के पोषण पखवाड़े में पुरुषों की भागीदारी पर विशेष बल दिया जा रहा है। 8 मार्च से 22 मार्च तक चलने वाले इस पखवाड़े में होने वाले विभिन्न गतिविधियों में अधिक से अधिक पुरुषों को शामिल होने की अपील की जा रही है। जिसमें विभिन्न विभागों के साथ केयर इंडिया, अलाइव एंड थराइव, सेंटर फॉर कैटालाईजिंग चेंज, यूनिसेफ सहित अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। जिससे पोषक आहारों की जरुरत विशेषकर गर्भवती माताओं, धात्री माताओं तथा 6 माह से 2 वर्ष तक के बच्चों के विविधतापूर्ण आहार में उपलब्ध विभिन्न पोषक तत्वों की जानकारी से पुरुष को अवगत कराया जा रहा है। आईसीडीएस के सीडीपीओ ने बताया कि इस पोषण पखवाड़े में पोषण संबंधित गतिविधियों में पुरुषों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
आहार में विविधता इन कारणों से है जरुरी
बढ़ते बच्चों की कटोरी में कम से कम चार प्रकार के खाद्य समूह को शामिल कर कुपोषण पर लगाम लगायी जा सकती है। घर में प्रतिदिन खाए जाने वाले आहार में सभी पोषक तत्वों की उपलब्धता जरुरी है। 6 से 8 माह के छोटे बच्चे को आहार खिलाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे घर के सभी लोगों के पोषण स्तर में सुधार होता है। बच्चे, किशोर, गर्भवती माता एवं परिवार के बाकी सदस्यों के लिए भी बेहतर पोषण की जरूरत होती है। एक ही तरह के खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने से पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित हो जाती है। बेहतर पोषण के लिए आहार में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, वसा एवं सूक्ष्म खनिज लवणों की जरूरत होती है। इसके लिए आहार में विविधता काफ़ी जरुरी है।
आंगनबाड़ी (फाइल फोटो)