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पूर्णिमा तिथि में भद्रा के पश्चात प्रदोषकाल से लेकर रात्रि 11.26 से पूर्व होलिका दहन का है शुभ मुहूर्त

एक वर्ष पहले
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रंगों व खुशियों का प्रमुख त्योहार होलिकोत्सव 24 घंटे बाद शुरू हो जाएगा। पहले दिन सोमवार को होलिका दहन एवं इसके अगले दिन मंगलवार को रंगों की होली खेली जाएगी। पूर्णिमा तिथि सोमवार को पूरे दिन है, परंतु होलिका दहन वैधानिक रूप से ज्योतिष गणना के बताए गए नियमों के अनुसार करने की रीति है। मान्यता है कि इसमें प्रदोषकाल का समय सर्वोत्तम होता है। जिसमें ढुंढा राक्षसी का पूजन कर लोग होलिका दहन करेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘’ओम होलिकायै नम:’’ मंत्रोच्चारण के साथ विधिसम्मत होलिका दहन सोमवार की रात्रि में की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सोमवार को दिन में 12 बजकर 32 मिनट तक भद्रा है, सो इसके बाद संध्या पहर में (रात्रि 11.26 से पूर्व) किसी भी अनुकूल समय में होलिका दहन कर लेना उत्तम रहेगा। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ बीके झा का कहना है कि मौसम में अभी परिवर्तन का दौर जारी है। विशेष रूप से सुबह-शाम गुलाबी ठंड का असर बना हुआ है। ऐसे में पानी के साथ रंग खेलना स्वास्थ्य शरीर के लिए घातक होगा। बेहतर होगा कि सभी सूखे रंगों का ही प्रयोग करें। उसमें भी हरे व नीले रंग का प्रयोग करने से बचना चाहिए। क्योंकि, यह रंग त्वचा के साथ होनेवाली प्रतिक्रिया से इसके पिगमेटेशन को प्रभावित करता है।

रात्रौ भद्रा वसाने तू होलिका दीप्यते तदा

पंडित महेश कुमार मधुकर ने बताया कि धर्म शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि ‘’रात्रौ भद्रा वसाने तू होलिका दीप्यते तदा’’। यानि की होलिका दहन तीन शास्त्रीय नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। जिसमें फाल्गुन शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि हो तथा प्रदोष रात का समय हो एवं भद्रा बीत चुकी हो। अत: निर्धारित तीनों नियमों के अनुसार फाल्गुन कृष्णपक्ष की पूर्णिमा तिथि में भद्रा (दोपहर 12.32 तक) के पश्चात प्रदोषकाल से लेकर रात्रि 11.26 से पूर्व होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है, सो संध्या पहर किसी भी अनुकूल समय में किया जा सकता है। वहीं, अगले दिन मंगलवार को चैत्र कृष्णपक्ष की तिथि में रंग की होली सर्वत्र एक साथ एक ही दिन मनाई जाएगी।

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