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पंचायत सरकार भवनों की सार्थकता नहीं हो रही बहाल, ग्रामीणों की पीड़ा जस की तस

Jehanabad News - जिले के कुल तिरानवे में आधिकारिक तौर पर फिलहाल मात्र अठारह पंचायत सरकार भवन हैं। अधिकांश पंचायत सरकार भवनों की...

Oct 13, 2019, 07:46 AM IST
जिले के कुल तिरानवे में आधिकारिक तौर पर फिलहाल मात्र अठारह पंचायत सरकार भवन हैं। अधिकांश पंचायत सरकार भवनों की सार्थकता अब तक पूरी तरह से जमीन पर नहीं दिख रही है। दरअसल इसमें पंचायत प्रतिनिधियों व संबंधित कर्मियों की भूमिका भी ठीक नहीं है। इन भवनों में आरटीपीएस केन्द्र की कुछ महीने पूर्व स्थापना कर दी गई है। सभी जगह एक-एक डाटा इंट्री ऑपरेटरों की भी बहाली कर दी गई है। वैसे जिले में पंचायत मुख्यालयों के पास कई अन्य जगह समृद्ध भवन हैं लेकिन उन्हें पंचायत सरकार भवन का दर्जा प्रदान नहीं किया गया है। सभी पंचायतों में आरटीपीएस सेंटर को नियमित रूप से संचालित करने का निर्देश है लेकिन पंचायत सरकार भवनों में आम तौर पर पंचायत कर्मियों की नियमित उपस्थिति नहीं रहने से गांव के लोगों को ब्लॉक का चक्कर काटने की मजबूरी बनी है और पंचायत सरकार भवन खाेलने के सरकारी अवधारणा को झटका लग रहा है। सदर प्रखंड के सिकरिया में 2008 में ही मॉडल पंचायत बना था। जब वहां पंचायत सरकार भवन बना था तो कुछ महीनों तक बेहतर तरीके से काम होता था लेकिन बाद में किसी ने ध्यान नहीं दिया। हाल के दिनों में वहां पंचायत सरकार भवन का संचालन प्रभावी तरीके से नहीं हो रहा। स्थानीय लोगों का मानना है कि पंचायत के कर्मी ज्यादातर फिल्ड में रहते हैं इसलिए कार्यालय में काम नहीं कर पाते।

मखदुमपुर : धरनई में पंचायत सरकार भवन 2015 से ही कार्यरत है। वहां के मुखिया अजय सिंह यादव को पंचायत में बेहतर काम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास विभाग की ओर से दिल्ली में पांच बार सम्मान मिल चुका है लेकिन वहां भी पंचायत सरकार भवन का नियमित संचालन नहीं होता। मुखिया स्वयं वहां नियमित तौर पर जाते हैं लेकिन कर्मी विभिन्न प्रकार की बहानेबाजियों से नियमित तौर पर काम नहीं करते। ग्रामीण रामप्रसाद यादव कहते हैं कि अधिकांश काम के लिए ग्रामीणों को ब्लॉक जाना पड़ता है। कभी-कभी कर्मचारियों से भेंट होती है।

मोदनगंज : गंधार में पंचायत सरकार भवन है लेकिन यहां भी नियमित रूप से कोई कर्मचारी नहीं आता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां आटीपीएस का काम भी रोज नहीं होता। उन्हें तो अधिकांश काम के लिए ब्लॉक जाना जरूरी होता है। पंचायत सचिव के दर्शन भी कम ही होते हैं।

रतनी : पंचायत सरकार भवन सिकंदरपुर में कभी -कभी किसी कर्मी का दर्शन होता है लेकिन काम नहीं होता। यहां डाटा इंट्री ऑपरेटर की भी नियुक्ति हुई है लेकिन किसी से काम कराना बड़ा मुश्किल है। दरअसल गांव में रहकर काम करने की कर्मियों की प्रवृति ही नहीं है।

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