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जर्जर मकानों का होगा सर्वे, बिना नक्शा पास कराए मकान बनाने पर होगी कार्रवाई

एक वर्ष पहले
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शहर में जर्जर व पुराने भवनों का सर्वे होगा। आम शहरियों की जिंदगी से जुड़े इस अहम विषय पर जिलाधिकारी नवीन कुमार के निर्देश के बाद नगर परिषद अप्रैल से शहर में ऐसे मकानों को चिन्हित करने का अभियान चलाएगा। जरूरत पड़ने पर जर्जर मकानों को तोड़ने के लिए संबंधित मकान मालिकों को पहले नोटिस किया जाएगा। नहीं मानने पर कानूनी ढंग से ऐसे मकानों को डिमोलिश कराकर उसका खर्च संबंधित मकान मालिकों से वसूला जाएगा। इसके अलावा बिना नक्शा पास कराए मकान बनाने वालों की भी अब खैर नहीं होगी। दरअसल शहर में प्रति वर्ष हजारों नए मकान बिना नक्शा पास कराए बनाए जा रहे हैं लेकिन अब तक नगर परिषद मामले में शिथिलता बरत रहा है। नप द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार शहर में प्रति वर्ष तकरीबन दो से ढाई हजार नए मकानों का निर्माण हो रहा है लेकिन प्रति वर्ष सिर्फ ढाई से तीन सौ लोग ही नक्शा पास कराने नगर परिषद कार्यालय जा पाते हैं। इस पूरे प्रकरण का सबसे उल्लेखनीय पहलू सुरक्षा मानकों की अनदेखी है। ऐसे नियमानुसार कार्रवाई होगी। दरअसल मकान बनाने में मानकों का ध्यान नहीं रखने से आपातकाल में खामियाजा लोगों को ही भुगतना पड़ सकता है।

1500 से अधिक मकानों का नहीं है रिकार्ड

शहरीकरण की अंधी दौड़ में जहानाबाद में प्रति वर्ष दो से ढाई हजार नए मकानों का निर्माण हो रहा है। नगर परिषद के पास यह पता लगाने की फुर्सत भी नहीं कि शहर के अंदर कौन मकान बना रहा है। नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार नगर परिषद के पास सिर्फ 17 हजार होल्डिंग की सूची है लेकिन वास्तव में शहर के अधिसूचित क्षेत्र में फिलहाल मकानों की कुल संख्या 33 हजार के आसपास है। दो वर्ष पूर्व नगर परिषद ने एक एजेंसी से इसका सर्वे भी कराया था, जिसके तहत उस एजेंसी ने लगभग 15 हजार से अधिक मकानों को बिना रिकार्ड के बताया था। हालांकि सर्वे करने वाली एजेंसी बीच में ही वापस चली गई थी और पूरा आकड़ा विभाग के पास नहीं उपलब्ध हो सका। नए मकानों के रिकार्ड नहीं रहने से नगर परिषद को जहां राजस्व का नुकसान हो रहा है वहीं कई इलाकों में इससे आपातकाल का खतरा भी बढ़ा है। जाहिर है कि जब नगर परिषद के पास बन रहे नए मकानों का रिकार्ड नहीं है तो उसके पास नक्शा पास कराने की भी कोई जरूरत महसूस नहीं करता। कुछ कायदे पसंद लोग अपनी मर्जी से वहां नक्शा पास कराने पहुंच गए तो ठीक नहीं तो नगर परिषद अपनी जिम्मेदारी के प्रति जरा भी गंभीर नहीं दिख रहा है।


जमीन का नक्शा पास कराना जरूरी है। इसके लिए उन्हें अपनी रजिस्ट्री कराई जमीन का प्रमाणिक कागजात के अलावा अंचल से दाखिल खारिज का अद्यतन रसीद भी कार्यालय में जमा करना होता है। जमीन का पूरा कागजात देखने के बाद संबंधित कर्मी उनकी जमीन की एराजी के अनुसार उन्हें नक्शा पास करते हैं। शहर में आम तौर पर 33 फीट से कम चौड़ाई तथा 11 मीटर उंचाई से कम जमीन के प्लॉट के लिए ज्यादा सख्त नियम नहीं हैं। अगर 33 फीट से अधिक चौड़ी जमीन हो तो आसपास दोनों ओर तीन फीट या एराजी के अनुसार अधिक जमीन छोड़कर मकान बनाना है। इसके अतिरिक्त 11 मीटर से अधिक के मकानों के लिए पार्किंग स्पेश, आसपास जमीन का खाली हिस्सा, पास के सड़क की चौड़ाई आदि बातों को ध्यान में रखकर ही नक्शा पास किया जाता है ताकि वहां आपातकाल में आसानी से अग्निशमन का वाहन बैगरह पहुंच सके।

पुराने व जर्जर मकानों का नगर परिषद सर्वे कराएगा। जर्जर व खतरनाक मकानों को डिमोलिश कराने के लिए भी जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त नक्शा पास कराने के लिए शीघ्र ही नगर परिषद एक अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करेगा और इसके महत्व से भी उन्हें वाकिफ कराएगा।
मुकेश कुमार, ईओ , नगर परिषद, जहानाबाद ।

नया मकान बनाने के क्या हैं नियम कायदे

नगर परिषद कार्यालय की फाइल फोटो।

शहर में फिलहाल 17 हजार होल्डिंग ही ऑन रिकार्ड हैं। वैसे कम से कम बारह से पंद्रह हजार मकान ऐसे हैं, जिन्हें निबंधित किया जाना बाकी है। नगर परिषद ऐसे मकानों को निबंधित करने के लिए शीघ्र उपाय करेगा।
अशोक कुमार सिंह, टैक्स दारोगा, नगर परिषद, जहानाबाद ।

शहर में बिना नक्शा पास कराए मकान बनाने का चलन एकदम स्थापित हो चुका है। नगर परिषद को इस महत्वपूर्ण मसले पर गंभीर होकर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि शहर के लोग बिना मानकों के खतरनाक मकान का निर्माण कराने से बच सकें। बिना नक्शा मकान बनने से शहर के कई मुहल्लों में रास्ता से लेकर हवा व धूप की समस्या भी लोगों को झेलनी पड़ रही है। नीरू कुमार, स्थानीय निवासी

नगर परिषद करेगी नई पहल, सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करने वालो पर रखी जाएगी नजर
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