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पुलिस लाइन में तैनात ट्रेनी जवान ने फांसी लगाकर की खुदकुशी

3 वर्ष पहले
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भास्कर टीम|जहानाबाद/ भागलपुर

बबरगंज थाने के ठाकुर नगर काॅलोनी स्थित मिरजान हाईस्कूल के समीप हजारी पासी लेन निवासी संतोष दास के बेटे विदुर दास (22) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। विदुर जहानाबाद के पुलिस लाइन में बिहार पुलिस के रूप में पदस्थापित था। वह जौंडिस (पीलिया) से गंभीर रूप से पीड़ित था। मेडिकल ग्राउंड पर भी, जब पुलिस लाइन से उसे छुट्टी नहीं मिली तब वह दुर्गापूजा के पहले ड्यूटी छोड़कर भाग आया था। पुलिस ने मृतक के पिता के बयान पर यूडी केस दर्ज किया है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा अंत्येष्टि के लिए परिजनों को सौंप दिया।

पिता ने बताया कि नौकरी जून 2018 में लगी थी। औरंगाबाद में ट्रेनिंग लेने के बाद जहानाबाद पुलिस बल में उसे पदस्थापित किया गया था। ड्यूटी पुलिस लाइन में थीं। ड्यूटी के दौरान ही वह जौंडिस की चपेट में आ गया था। पुलिस लाइन से ही इलाज कराया गया था, लेकिन ठीक नहीं होने पर वह दुर्गापूजा के करीब बिना सूचना के जहानाबाद से भागकर भागलपुर आ गया था। यहां इलाज शुरू होने के बाद भी उसकी बीमारी खत्म नहीं हो रही थी।

विदुर दास की फाइल फोटो।

दस दिन पहले भी की थी पंखे से लटकने की कोशिश
विदुर के छोटे भाई विभीषण दास ने बताया कि दस-बारह दिन पहले भी भाई ने फांसी लगाने की कोशिश की थी। खपरैल के घर में पंखे की खूंटी में रस्सी डालकर फांसी लगाने की कोशिश कर रहे थे, तभी घरवालों की नजर पड़ी और रोका गया। काफी समझाने के बाद दोबारा ऐसी हरकत नहीं करने की बात कहा था और काफी तनाव में रहता था ।

चार भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर था विदुर, पिता को बेटी ने फोनकर विदुर के फांसी की दी खबर

विदुर चार भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर था। दोनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। विदुर महादेव सिंह कॉलेज से इंटर करने के बाद बिहार पुलिस में बहाली के लिए तैयारी करनी शुरू कर दी थी। पिता मार्बल मिस्त्री हैं। वे बूढानाथ मंदिर में टाइल्स लगा रहे थे, तभी उनकी बड़ी बेटी ने विदुर के फांसी पर झूलने की जानकारी मोबाइल पर दी थी। घटना की जानकारी हो ने पर घर के लोग काफी सदमे में है।

फंदे से उतारने के बाद भी चल रहीं थीं सांसें
विदुर के पड़ोसी व दोस्त राहुल ने बताया कि विदुर के फांसी लगाने की जानकारी विदुर की मां अहिल्या ने दी। अहिल्या ने ही सबसे पहले विदुर को फांसी पर झूलते देखा था। अहिल्या के चीखने की आवाज सुनकर वह और अन्य लोग वहां दौड़े। तब तक विदुर का बड़े बहनोई व पड़ोसी कक्कू फंदे से उसे उतार चुके थे। उस वक्त विदुर की सांसें चल रही थीं। कक्कू की बाइक पर विदुर को बिठाकर उसके बहनोई ने उसे मायागंज अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

वह प्रशिक्षु सिपाही था। वह औरंगाबाद में प्रशिक्षण ले रहा था। यहां से छुट्टी लेने का कोई मामला नहीं है और न ही यहां उसने कोई आवेदन दिया है। जहानाबाद में केवल उसकी पोस्टिंग थी। मनीष, एसपी, जहानाबाद।

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