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ग्रामीण बोले- तकनीकी खामियों के कारण मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के लाभ से वंचित हैं किसान

एक वर्ष पहले
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बेहतर किसानी के लिए केंद्र सरकार के द्वारा फरवरी 2015 में शुरू की गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना कुछ तकनीकी खामियों के कारण सफल नहीं हुई है। जिले में जिन किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए भी गए हैं, उन्हें फसल उत्पादन के लिए बेहतर तकनीकी की जानकारी नहीं दी गई है। यानी उन्हें सिर्फ यही बताया गया है कि उनकी मिट्टी में किस तत्व की क्या स्थिति है? उन्हें बेहतर खेती की जानकारी नहीं दी गई है। यह कहना है जिले के कुछ किसानों का। काको प्रखंड के मनियावां गांव के किसान नीरज कुमार के अनुसार उन्हें उनकी मिट्टी की जांच अब तक नहीं कराई गई है। जबकि प्रखंड के नोनही गांव के किसान सतीश कुमार बताते हैं कि उनकी मिट्टी की जांच सरकारी स्तर पर कराई गई है। उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया गया है। लेकिन उनकी मिट्टी की जांच में आए परिणाम के आधार पर किस तरह की फसल की खेती की जानी चाहिए। इसे नहीं बताया गया है। उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिला है। इसके आधार पर वे मिट्टी में निर्धारित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग कर रहे हैं। इससे उन्हें बेहतर परिणाम सामने आ रहा है।

ग्रीड के मुताबिक हुई है मृदा की जांच :

जिले में मृदा की जांच ग्रीड आधार लिए गए नमूने के अनुसार की गई है। इसमें सिचित खेतों के लिए 2.5 हेक्टेयर एवं असिचित खेतों के लिए 10 हेक्टेयर का एक-एक ग्रीड बनाया जाना है। इसके आधार लिए गए नमूने की मृदा जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाया गया है। इस ग्रीड में पड़े अन्य किसानों की मृदा का परिणाम भी इसी मृदा कार्ड के आधार पर निर्धारित की गई है।

अब चयनित गांव में हो रही है मृदा की जांच|इस वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रत्येक प्रखंड के एक-एक चयनित राजस्व गांव में मृदा की जांच की जा रही है।अगले वित्तीय वर्ष से प्रत्येक प्रखंड के पांच-पांच राजस्व गांव में ग्रीड बनाकर मृदा जांच की जानी है।
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