जल पर्षद ने दूसरे चरण के काम के बाद भी शहर की गलियाें को तोड़कर छोड़ा

Jehanabad News - शहर में घर-घर नल से जल पहुंचाने के एवज में घर-घर परेशानी पहुंचाने के रवैये से जल पर्षद बाज नहीं आ रहा है। वस्तुत: वर्ष...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:05 AM IST
Jehanabad News - water board broke the streets of the city even after the second phase of work
शहर में घर-घर नल से जल पहुंचाने के एवज में घर-घर परेशानी पहुंचाने के रवैये से जल पर्षद बाज नहीं आ रहा है। वस्तुत: वर्ष 2015 में सरकार बनने के कुछ ही महीनों बाद शहर में नल से घर घर स्वच्छ जल पहुंचाने की योजना का शुभारंभ किया गया। हालांकि अभी भी पूरे शहर को नल से जल देने का काम पूरी तरह से संपन्न नहीं किया गया लेकिन शहर की लगभग सभी गलियों को पाइप लाइन बिछाने के दौरान तोड़ कर उसे विकृत जरूर कर दिया गया था। हालांकि कई वर्षों बाद शहर की अधिकांश गलियों को फिर से ठीक कर दिया गया है। लेकिन दूसरे चरण में बिछाए गए पाइप लाइन के बाद शहर की कई गलियों को टूटी हुई अवस्था में यूं ही अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। शहर के खत्री टोला, प्यारी मुहल्ला, ठाकुरबाड़ी सहित कई अन्य मोहल्लों में दूसरे चरण प्रारंभ में पाइप लाइन बिछाने के दौरान गलियों को तोड़कर छोड़ दिया गया है। इस वजह से संबंधित मोहल्लों में आने जाने में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के लोगों ने इस संदर्भ में जब एजेंसी वालों से पूछा तो बताया गया था कि पाइप लाइन बिछाने के तुरंत बाद सभी गलियों को फिर से बना दिया जाएगा। लेकिन फिलहाल पाइप लाइन बिछाने के नाम पर तोड़ी गई पक्की गलियों को ठीक करने की फिक्र किसी को नहीं है। अधिकारी इस सवाल को एक दूसरे पर टाल कर अपना पिंड छुड़ाते दिख रहे हैं।

लोगों ने कहा- सुविधा तो दी नहीं, पर समस्या गंभीर बनाकर छोड़ दिया

नल जल योजना के तहत गलियों की दुर्गति कर छोड़ा।

आम लोगाें में विभाग के लापरवाह रवैये से आक्रोश

आम लोग शहर की गलियों को लंबी अवधि से तोड़कर यूं ही अपने हाल पर छोड़ दिए जाने से काफी नाराज हैं। खत्री टोला निवासी व अधिवक्ता रजनीश कुमार का कहना है कि एक योजना के नाम पर पहले से बनी बनाई संरचना को तोड़कर यूं ही छोड़ देना जनहित के खिलाफ है। नया टोला के शेष नारायण का कहना है कि आखिर कोई भी योजना पब्लिक के फायदे के लिए बनाई जाती है। यह तो पब्लिक को नुकसान करने वाली योजना साबित हो रही है। शहर के अधिकांश लोगों के पास तो पहले से ही नल का जल है लेकिन गलियों को तो कोई निजी स्तर से बना नहीं सकता। ऐसे में नल से जल योजना के लिए उससे अधिक महत्वपूर्ण योजना को बर्बाद करना अत्यंत आपत्तिजनक है।

संकीर्ण गलियों में होती है दुर्घटनाएं

शहर के पुरानी तथा घनी आबादी वाले मुहल्लों की संकीर्ण गलियों में पीसीसी ढलाई टूट जाने से जगह-जगह खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। इससे रात के अंधेरे में घर आने जाने वाले लोगों को तो रोज मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आम लोग इस उम्मीद में हैं कि शायद उनकी टूटी गलियों का शीघ्र कायाकल्प शीघ्र हो जाएगा लेकिन दिन व महीने यूं ही बीतते जा रहे हैं और उनकी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। शहर के कई गलियां पहले से ही काफी संकीर्ण हैं। उक्त मुहल्लों की पतली गलियों के पक्के स्वरूप को तोड़ दिए जाने से बरसात में परेशानियां और बढ़ गई हैं। उससे आवागमन लगातार दूभर हो रहा है।

बरसात में बढ़ गई और मुश्कलें

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