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मनरेगा में 5,252 योजनाएं अधूरी, मैटेरियल भुगतान में देरी से कई योजनाएं लटकी

एक वर्ष पहले
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कैमूर जिले में मनरेगा योजना अंतर्गत अब तक 23,723 योजनाएं ली गई है। जिसमें 18471 योजनाएं का काम पूरा हो चुका है। जबकि 5252 योजनाएं अभी पेंडिंग है। योजना में मैटेरियल का भुगतान भी समय से नही होने की वजह से कई योजनाएं अधर में है। मनरेगा के तहत सबसे अधिक योजनाएं भभुआ प्रखंड में ली गई। 3323 योजनाओं में 2702 योजनाओं पर काम हुआ जबकि 621 योजनाएं अभी अधूरी है। मोहनिया में 3029 योजनाएं ली गई। जिसमें 2315 योजनाएं पूरी हुई जबकि 460 योजनाएं अभी अधूरी है।इधर, महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत कैमूर के जॉब कार्डधारी मनरेगा मजदूरों का सरकार पर 1.28 करोड़ रुपया मजदूरी बकाया है। समय से मजदूरी का भुगतान नहीं होने पर मजदूर भी योजनाओं में काम करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। विभिन्न वित्तीय वर्ष में मनरेगा के अंतर्गत जो भी कार्य हुए हैं। उसके अंतर्गत अभी जिले के मनरेगा मजदूरों का एक करोड़ 28 लाख 18 हजार रुपया मजदूरी बकाया है। मजदूर अपनी मजदूरी के लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर के कार्यालयों में दौड़ लगा रहे हैं। बावजूद मजदूरी का भुगतान नहीं होने से मजदूरों का योजनाओं में काम करने से भी मोहभंग होने लगा है।

बकाया मजदूरी पर एक नजर (लाख में)


अधौरा 15.83 लाख

भभुआ 15.30 लाख

भगवानपुर 19.88 लाख

चैनपुर 10.28 लाख

चांद 17.03 लाख

दुर्गावती 12.09 लाख

कुदरा 5.66 लाख

मोहनिया 12.90 लाख

नुआव 4.78 लाख

रामगढ़ 7.43 लाख

रामपुर 6.99 लाख

जल जीवन हरियाली मिशन पर पड़ रहा प्रभाव


मनरेगा अंतर्गत मजदूरी और सामग्री का भुगतान नहीं होने की वजह से जल जीवन हरियाली मिशन पर भी प्रभाव पड़ा रहा है। उप विकास आयुक्त केपी गुप्ता ने आयुक्त मनरेगा सीपी खंडूजा को इस बारे में पत्र भी लिखा है। जिसमें कहा गया है कि विगत 8 फरवरी से।मनरेगा योजना अंतर्गत मजदूरी का भुगतान नहीं होने के कारण मजदूरों द्वारा कार्य करने में असमर्थता जताई जा रही है। जल जीवन हरियाली के तहत दिए गए लक्ष्य की पूर्ति नहीं हो पा रही है। सामग्री मद में में भी भुगतान नहीं हो रहा है।

मनरेगा में काम करने से कतरा रहे मजदूर


मनरेगा योजना के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है। मगर समय से मजदूरी नहीं मिलने और योजना में बड़े पैमाने पर नियम के विपरीत हो रहे कार्यों की वजह से इस योजना से मजदूरों का भी मोहभंग हो रहा है। कई जगहों पर गलत मास्टर रोल के जरिए अफसरों और संवेदक की मिलीभगत से मशीनों से काम करा कर मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। इस मामले में कई शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई हैं जिनकी जांच प्रक्रियाधीन है।


चैनपुर में 833 रामगढ़ ब्लॉक में 738 योजनाएं अधूरी


कुदरा ब्लॉक में 2500 योजनाएं मनरेगा के तहत ली गई जिसमें 2,216 योजनाओं पर काम हुआ।जबकि 284योजनाएं अभी अधूरी है। भगवानपुर ब्लॉक में 1,484 योजनाओं में 1184 योजनाएं पूरी हुई जबकि 300 योजनाएं अधूरी है। दुर्गावती में 1809 योजनाएं ली गई जिसमें 1426 योजनाएं पूरी हुई जबकि 383 योजनाएं अधूरी है। रामगढ़ में 2192 योजनाओं में 1454 पूरी हुई जबकि 738 अधूरी है। रामपुर में 1459 योजनाओं में 1258 पूरी हुई।जबकि 201 योजनाएं अधूरी है। नुआव ब्लॉक में 1600 योजनाएं ली गई जिसमें 1261 पूरी हुई 339 योजनाएं अधूरी है।


सबसे अधिक 19.88 लाख भगवानपुर में बकाया


भगवानपुर प्रखंड में सबसे अधिक 19.88 लाख रुपया मजदूरी का भुगतान बकाया है। अधौरा में 15.83 लाख जबकि भभुआ प्रखंड में 15.30 लाख रुपया मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। लोगों का कहना है कि मनरेगा योजना में मजदूरी के नाम पर घालमेल का खेल भी जारी है। मशीनों के जरिए काम कराया जा रहा है जबकि कागजों पर काम मजदूरों के कराया जा रहा है। कई जगहों पर इस तरह की शिकायतें आ चुकी है। जबकि कई जगहों पर जांच भी चल रही है। लेकिन अब तक इन मामलों में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। मनरेगा में पेमेंट का भुगतान समय से नहीं होने से योजनाएं भी तय समय सीमा में पूरी नहीं हो पा रही हैं।

मजदूरी भुगतान प्रक्रियाधीन


मनरेगा के तहत हो रहा कार्य

मनरेगा मजदूरों की होली भी पड़ी फीकी, सरकार पर 1.28 करोड़ रुपए मजदूरी बकाया

मनरेगा योजना में सेंट्रल गवर्नमेंट से मनरेगा मजदूरों का भुगतान किया जाता है। योजनाओं की गुणवत्ता की जांच भी की जा रही है। अधूरी योजनाओं को पूरा करने का निर्देश दिया गया है।फरवरी से भुगतान बंद हैं। राज्यस्तर पर इसकी सूचना दी जा चुकी हैं। केपी गुप्ता, उपविकास आयुक्त, कैमूर
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