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चैतन्य महाप्रभु भक्तों के उद्धार के लिए धरती पर आए: सुदामा दास

एक वर्ष पहले
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भगवान श्रीकृष्ण भक्तों ने तीन दिवसीय धूमधाम से होली व गौर पूर्णिमा महापर्व मनाया। इस दौरान गौर पूर्णिमा महोत्सव का भी आयोजन हुआ। उत्सव के दौरान 3 दिनों में कथा वाचन, नगर संकीर्तन, फूलों की होली, अबीर की होली सहित कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। बीते 8 मार्च रविवार से शुरू हुए महोत्सव के आरंभ में कथा वाचन का आयोजन बैजू बाबू ठाकुरबाड़ी मंदिर में हुआ। इस दौरान मुंबई इस्कॉन मंदिर से आए सुदामा दास प्रभु जी ने श्रीकृष्ण भक्ति के साथ उनसे जुड़ी कई लीलाओं का भी बखान किया। उनकी लीलाओं में छुपे दर्शन भी बताए। कथा वाचन के दौरान सुदामा दास प्रभु जी ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु, भगवान श्रीकृष्ण के नामावतार है। उनका आविर्भाव होली के दिन ही हुआ था। इसीलिए होली को गौर पूर्णिमा महोत्सव के तौर पर भी श्रद्धालु मनाते हैं। चैतन्य महाप्रभु का अवतरण भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों को लोगों तक पहुंचाने के लिए हुआ था। यह अवतार भक्तों के उद्धार के लिए हुआ।

नगर संकीर्तन कर की फूलों की होली


गौर पूर्णिमा व आयोजित होली महोत्सव में 9 मार्च सोमवार को इस्कॉन की ओर से भभुआ नगर मुख्यालय में नगर संकीर्तन की गई। भक्तों, श्रद्धालुओं की भारी संख्या नगर में संकीर्तन की। नाच गान करते हुए बैजू बाबू मंदिर से कस्तूरा चौक, एकता चौक होते हुए पुलिस थाने तक पहुंचे। फिर वापस ठाकुरबाड़ी में पहुंचे। इस दौरान भक्तों ने श्रद्धा से ‘’हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे’’ के अलावे ब्रज की होली गीत भी गाते रहे। नाच गान करते नगर संकीर्तन आयोजित की गई। नगर संकीर्तन के बाद 9 मार्च की संध्या कथा वाचन के साथ फूलों की होली की गई। इस दौरान भक्तों ने आपस में गुलाब की पंखुड़ियां उछाल कर फूलों की होली खेली। उसके बाद प्रसाद वितरण भी किया। आयोजक सह चिकित्सक डॉ विनोद कुमार ने बताया कि होली महोत्सव के दौरान इस्कॉन की ओर से तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।

नगर में स्कान द्वारा होली किर्तन यात्रा में शामिल शामिल महिलाएं
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