पुआल कूड़ा-कचरा जलाएं नहीं, इन्हे मिट्टी में मिला दें

Kaimur News - सरकार की लाख सख्ती के बाद भी खेतों में फसलों का अवशेष जलाने का सिलसिला लगातार जारी है। मोहनिया अनुमंडल के बड़े...

Dec 10, 2019, 08:15 AM IST
Mohania News - do not burn straw garbage mix them in soil
सरकार की लाख सख्ती के बाद भी खेतों में फसलों का अवशेष जलाने का सिलसिला लगातार जारी है। मोहनिया अनुमंडल के बड़े प्रक्षेत्र में इन दिनों फसल अवशेष जलाने का काम किया जा रहा है। जिससे जहां खेतों की मिट्टी की उपजाऊ क्षमता घट रही है, वहीं हवा में जहरीली गैसों कार्बन डाइ ऑक्साइड व कार्बन मोना ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। खरीफ के इस सीजन में भी सरकार की तरफ से खेतों में पुआल नहीं जलाने का सख्त निर्देश किसानों को दिया गया है। बावजूद इसके किसानों द्वारा खेतों में धड़ल्ले से पुआल जलाया जा रहा है। जबकि सरकार द्वारा जारी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि जिस किसान द्वारा खेत में पुआल जलाई गई उस पर कार्रवाई की जाएगी तथा जुर्माना वसूला जाएगा।

मोहनिया में खेतों में जलाए जर रहे पराली।

पशु चारा के रूप करें पराली का उपयोग| डॉ अमित कुमार ने बताया कि किसान यदि चाहें तो वे फसलों के अवशेष को कृषि यंत्रों के माध्यम से खेतों से हटाकर पशु चारा के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए एक्स्ट्रा वेलर, एक्स्ट्रा रीपर, रोटरी मल्चर, हैप्पी सीडर आदि का प्रयोग किसान कर सकते हैं। सरकारी स्तर से अनुदान देकर किसानों तक इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

पुआल जलाने से दूषित हो जाता है वातावरण

खेतों में पराली जलाने के संबंध में कृषि वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार ने बताया कि पुआल कूड़ा कचरा नहीं बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति है। इसे जलाना नहीं चाहिए बल्कि मिट्टी में मिला देना चाहिए। उन्होंने बताया कि मिट्टी में पहले से ही जैविक कार्बन की कमी है। फसल का अवशेष जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है। जो पैदावार के लिए काफी नुकसानदेह है। दूसरी तरफ पुआल जलाने से पूरा वातावरण दूषित हो जाता है। इससे मानव जीवन को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 1 टन पुआल जलाने से खेतों का 3 किलो पार्टिकल का नुकसान होता है। जबकि वातावरण में 14.7 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 1.94 किलोग्राम राख व 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड वातावरण में तैरने लगता है। जिससे लोगों को सांस लेने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा आंखों में जलन होने लगती है। जबकि 1 टन पुआल खेतों में मिलाने पर नाइट्रोजन 20 से 30 किलोग्राम, पोटाश 60 से 100 किलोग्राम, सल्फर 5 से 7 किलोग्राम व ऑर्गेनिक कार्बन 600 ग्राम भूमि को प्राप्त होती है। जो फसल उत्पादन के लिए बेहद लाभदायक है।

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