सीएम की पहल के बाद भी स्कूलांे में बापू के विचारों को नहीं किया जा रहा अात्मसात

Kaimur News - बापू के विचारों को विद्यालय के शिक्षकों और बच्चों द्वारा आत्मसात नहीं किया जा रहा है। इस मामले में सीएम नीतीश...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:51 AM IST
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बापू के विचारों को विद्यालय के शिक्षकों और बच्चों द्वारा आत्मसात नहीं किया जा रहा है। इस मामले में सीएम नीतीश कुमार की पहल भी काम नहीं आई। क्योंकि अधिकांश प्राइमरी से लेकर हाई स्कूल में चेतना सत्र के दौरान गांधी कथा वाचन की परंपरा नहीं दिखाई पड़ रही है। स्कूलों में राष्ट्रपिता के जीवन दर्शन मूल्य बोध और उनके प्रमुख कार्यों के बारे में बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं से ही पढ़ाने की घोषणा की गई थी। बावजूद इसके अधिकांश विद्यालयों में इसका अनुपालन हो रहा है। विभागीय अफसर और शिक्षकों ने भी शुरुआती दिनों के बाद इस मामले में चुप्पी साध ली है। चेतना सत्र में आठवीं तक कक्षाओं के बच्चों को बापू की पाती नामक किताब पर नियमित रूप से एक पाठ पढ़ाने की घोषणा की गई थी। इसके अलावा पहले से ही 9वीं से 12वीं की कक्षाओं के विद्यार्थियों को गांधी से संबंधित एक था मोहन पुस्तक के पाठों का अध्ययन कराया जाना है।इसके तहत जिले के हाई स्कूलों में गांधी पाठ की व्यवस्था लागू की गई।इसके बावजूद सभी विद्यालयों में इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है। सभी स्कूलों में बापू की पाती नामक पुस्तक का वितरण भी किया गया। विभाग द्वारा स्कूलों में दस-दस प्रतियां भेजी गई।लेकिन इसका अनुपालन अधिकांश विद्यालयों में नहीं हो रहा है। एक बार फिर 2 अक्टूबर से गांधी कथा वाचन को लेकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा रही है।

2 अक्टूबर से शुरू होगा गांधी कथा वाचन:प्राइमरी और हाई स्कूलों में बापू की पाती और एक था मोहन किताब का कथा वाचन करना अनिवार्य है। जिन स्कूलों में इनका अनुपालन नहीं हो रहा है उस विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया जाएगा। 2 अक्टूबर को सभी विद्यालयों में विभागीय निर्देश के आलोक में गांधी कथा वाचन की शुरुआत की जा रही है।

स्कूलों में बापू की पाती और एक था मोहन नामक पुस्तक कराई गई है उपलब्ध

अक्टूबर 2017 में सीएम ने की थी शुरुआत

गांधी कथा वाचन की परंपरा की शुरुआत 11 अक्टूबर 2017 को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी। सरकार की योजना के तहत सभी स्कूलों में प्रार्थना सत्र के दौरान गांधी वाचन किया जाना है।इसके लिए शिक्षा विभाग के जन शिक्षा निदेशालय द्वारा तीसरी से आठवीं कक्षा तक के लिए बापू की पाती और 9वीं से 12वीं कक्षा तक के लिए एक था मोहन नामक दो किताबें प्रकाशित कर सभी स्कूलों को उपलब्ध कराई थी। कई स्कूलों में किताबें अब अलमारी की शोभा बढ़ा रहे हैं।

सिटी रिपोर्टर| भभुआ

बापू के विचारों को विद्यालय के शिक्षकों और बच्चों द्वारा आत्मसात नहीं किया जा रहा है। इस मामले में सीएम नीतीश कुमार की पहल भी काम नहीं आई। क्योंकि अधिकांश प्राइमरी से लेकर हाई स्कूल में चेतना सत्र के दौरान गांधी कथा वाचन की परंपरा नहीं दिखाई पड़ रही है। स्कूलों में राष्ट्रपिता के जीवन दर्शन मूल्य बोध और उनके प्रमुख कार्यों के बारे में बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं से ही पढ़ाने की घोषणा की गई थी। बावजूद इसके अधिकांश विद्यालयों में इसका अनुपालन हो रहा है। विभागीय अफसर और शिक्षकों ने भी शुरुआती दिनों के बाद इस मामले में चुप्पी साध ली है। चेतना सत्र में आठवीं तक कक्षाओं के बच्चों को बापू की पाती नामक किताब पर नियमित रूप से एक पाठ पढ़ाने की घोषणा की गई थी। इसके अलावा पहले से ही 9वीं से 12वीं की कक्षाओं के विद्यार्थियों को गांधी से संबंधित एक था मोहन पुस्तक के पाठों का अध्ययन कराया जाना है।इसके तहत जिले के हाई स्कूलों में गांधी पाठ की व्यवस्था लागू की गई।इसके बावजूद सभी विद्यालयों में इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है। सभी स्कूलों में बापू की पाती नामक पुस्तक का वितरण भी किया गया। विभाग द्वारा स्कूलों में दस-दस प्रतियां भेजी गई।लेकिन इसका अनुपालन अधिकांश विद्यालयों में नहीं हो रहा है। एक बार फिर 2 अक्टूबर से गांधी कथा वाचन को लेकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा रही है।

2 अक्टूबर से शुरू होगा गांधी कथा वाचन:प्राइमरी और हाई स्कूलों में बापू की पाती और एक था मोहन किताब का कथा वाचन करना अनिवार्य है। जिन स्कूलों में इनका अनुपालन नहीं हो रहा है उस विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया जाएगा। 2 अक्टूबर को सभी विद्यालयों में विभागीय निर्देश के आलोक में गांधी कथा वाचन की शुरुआत की जा रही है।

विभागीय अफसरों व शिक्षकों ने नहीं ली रुचि

स्कूलों में गांधी कथा वाचन कार्यक्रम को लेकर विभागीय अफसरों के अलावा प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने भी रुचि नहीं ली। कार्यक्रम के तहत यह तय किया गया था कि बच्चे एक दिन में दो कहानियां पढेंगे। दो दिन के बाद कहानी और इसे पढ़ने वाला समूह बदल जाएगा। प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को राष्ट्रपिता के जीवन वृत्त के बारे में ज्ञान देने के लिए इस परंपरा की शुरुआत की गई। इसके बावजूद गांधी कथा वाचन की परंपरा का अनुपालन सही ढंग से नहीं किया गया।

चेतना सत्र के दौरान छात्र।

गांधी के कार्य विचार से अवगत कराने का निर्देश

स्कूलों में महात्मा गांधी के प्रमुख कार्य विचार और आंदोलन में उनकी भूमिका और उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में बताया जाना है। तीसरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए प्रकाशित बापू की पाती किताब में 45 कहानियां हैं। इस किताब में हर दूसरे पन्ने पर रंगीन कार्टून बने हुए हैं। ताकि बच्चे शब्दों से ज्यादा चित्रों की भाषा से बात को समझ सके। इस किताब को सोपान जोशी ने लिखा है। सरकार का मानना है कि गांधी कथा वाचन की परंपरा से बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही राष्ट्रपिता के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

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