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बिना सर्जन के ही चल रहा है मोहनिया अस्पताल

3 वर्ष पहले
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मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल को इस इलाके के लोगों के लिए संजीवनी माना जाता है। लेकिन यहां आज तक सर्जन की नियुक्ति नहीं हो सकी। जिसके कारण एक्सीडेंट में घायल मरीजो को इलाज के लिए 70 किलोमीटर दूर की दूरी तय कर बनारस जाना पड़ता है। कई मरीजों को इलाज सही समय पर नहीं मिलने से बीच रास्ते में ही मौत की हो जाती है। सर्जन की मांग कई बार जन प्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों द्वारा की गई लेकिन अब तक इस संबंध में कोई सार्थक पहल नहीं हो सकी। कई बार तो देखा गया है कि एक्सीडेंट में घायल मरीजों को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत होती है लेकिन सर्जन के नहीं रहने की कारण मज़बूरी में मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।

मोहनिया के लोग इलाज को लेकर रहते हैं परेशान
मोहनिया प्रखंड की 18 पंचायतों और नगर पंचायत मिलाकर कुल लगभग दो लाख आबादी है। लेकिन यहां के अनुमंडलीय अस्पताल में अब तक सर्जन के नहीं होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। मरीजो को इलाज कराने के लिए 70 किलोमीटर की दूरी तय कर बनारस इलाज कराने जाना पड़ता है। मध्यम वर्ग के लोग तो किसी तरह अपना इलाज करा लेते हैं। लेकिन गरीब तबके के मरीज परेशानी में पड़ जाते हैं।

25 अप्रैल को खुला था ट्रामा सेंटर
लोगों को बेहतर स्वास्थ सुविधा मुहैया कराने को लेकर पूर्व जिला अधिकारी राजेश्वर प्रसाद सिंह ने अपने कार्यकाल में अनुमंडलीय अस्पताल में ट्रामा सेंटर का उद्घाटन किया था। उस समय अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर अशोक कुमार सिंह थे। पूर्व उपाधीक्षक ने अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य मुहैया कराने के लिए अस्पताल के पुराने भवन में मिनी ट्रामा सेंटर की स्थापना को लेकर अथक प्रयास भी किया था। तत्कालीन जिलाधिकारी राजेश्वर प्रसाद सिंह ने अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर का उद्घाटन किया था। मगर मिनी ट्रामा सेंटर में सर्जन के नहीं होने के कारण अब वह शोभा की वस्तु बन कर रह गया है। ट्रामा सेंटर में कई उपकरण भी लगाए गए हैं। मगर सर्जरी के लिए जरूरी सर्जन व एनेस्थिसिया के चिकित्सक की नियुक्ति मिनी ट्रामा सेंटर में नहीं की गई।

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