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सर्वे में खुलासा : अफसरों के ड्राइवर नहीं रखते वाहनों के जरूरी कागजात

Kaimur News - सरकारी अफसरों के वाहन चालक चेकिंग का डर नहीं होने से जरूरी कागजात भी नहीं रखते। इसके अलावा अधिकांश ड्राइवरों को...

Feb 23, 2020, 06:41 AM IST
Bhabhua News - revealed in survey officers39 drivers do not keep necessary documents of vehicles

सरकारी अफसरों के वाहन चालक चेकिंग का डर नहीं होने से जरूरी कागजात भी नहीं रखते। इसके अलावा अधिकांश ड्राइवरों को यातायात नियमों की भी जानकारी नहीं है। इसका खुलासा राज्यस्तर पर हुए एक सर्वे के बाद हुआ है। सरकारी ड्राइवरों की कमी होने के कारण प्राइवेट ड्राइवरों से ही काम चलाया जा रहा है। राज्य स्तर पर सरकारी वाहन चालकों के प्रशिक्षण के दौरान कई चौकाने वाले मामले सामने आए हैं। सभी विभागों के सरकारी वाहन चालकों को मोटर वाहन संशोधित अधिनियम 2019 के प्रावधानों एवं यातायात के नियमों के अवगत कराया गया। इस क्रम में उपस्थित वाहन चालकों से जब उनके ड्राइविंग लाइसेंस,वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र आदि की जानकारी मांगी गई तो बताया गया कि निबंधन प्रमाण पत्र या तो अनुपलब्ध है अथवा उसकी छाया प्रति ही वाहन चालकों के पास रहती है। वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के बारे में कई चालकों को जानकारी नहीं है।

कई वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने का बहुत अनुभव नहीं है। सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग से लिए गए वाहनों के लिए अन्य आवश्यक कागजातों के अतिरिक्त व्यवसायिक निबंधन, इंश्योरेंस, फिटनेस प्रमाण पत्र एवं परमिट से संबंधित आवश्यक कागजातों की उपलब्धता अनिवार्य है। इसके बारे में कई वाहन चालकों ने अनभिज्ञता जताई है। प्रशिक्षण के बाद कई चौकाने वाले मामले सामने आने के बाद राज्य स्तर से परिवहन विभाग ने सभी विभागों के अफसरों कोपत्र जारी करते हुए कई जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।

जिले में सरकारी ड्राइवर के 27 पद

जिले के सरकारी महकमे में सरकारी ड्राइवरों की काफी कमी है। वर्तमान समय में पांच सरकारी ड्राइवर कार्यरत है। जबकि जिले में सरकारी ड्राइवर के 27 पद हैं। जिसकी वजह से अधिकांश अफसर प्राइवेट वाहन चालकों का सहारा लेते हैं। इस दिशा में राज्य स्तर से भी कोई विशेष पहल नहीं होने से अफसरों की मजबूरी बनी हुई है। नब्बे फ़ीसदी अफसर प्राइवेट वाहनों का ही इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद कई अफसरों के पास चल रहे प्राइवेट वाहनों का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। सचिव द्वारा जारी गाइडलाइन के बाद निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की बात कही गई है।

नियमों का करना
होगा पालन


सरकारी विभागों में चल रहे वाहनों का व्यवसायिक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जिसके लिए सभी विभागों को जिलाधिकारी के माध्यम से पत्र दिया गया है। सरकारी अफसरों के वाहन चालकों को भी सभी अनिवार्य कागजात लेकर चलना होगा।

रामबाबू, डीटीओ

रजिस्ट्रेशन और पीला नंबर
प्लेट होना अनिवार्य


परिवहन विभाग के सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित करते हुए कहा है कि आउटसोर्सिंग से रखे गए वाहनों में मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए। वाहन का निबंधन प्रमाण पत्र अथवा उसकी छाया प्रति,अद्यतन प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र, चालक के पास वाहन चालक अनुज्ञप्ति की मूल प्रति वाहन, आउटसोर्सिंग, किराया या लीज पर ली गई है तो उपरोक्त कागजों के अतिरिक्त व्यवसायिक निबंधन प्रमाण पत्र, इंश्योरेंस प्रमाण पत्र और एचएसआरपी युक्त पीला नंबर प्लेट वाहनों पर लगाना अनिवार्य है। किसी भी गाड़ी में प्रेशर हॉर्न नहीं लगाया जाएगा। सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है।

संबंधित आवश्यक कागजातों की उपलब्धता अनिवार्य है। इसके बारे में कई वाहन चालकों ने अनभिज्ञता जताई है। प्रशिक्षण के बाद कई चौकाने वाले मामले सामने आने के बाद राज्य स्तर से परिवहन विभाग ने सभी विभागों के अफसरों कोपत्र जारी करते हुए कई जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।


{ट्रैफिक नियमों की भी नही होती जानकारी,रखने होंगे सभी कागजात{सरकारी ड्राइवरों की कमी होने के कारण प्राइवेट ड्राइवरों से ही काम चलाया जा रहा

95 फीसदी प्राइवेट ड्राइवर चला रहे अफसरों की गाड़ियां, रजिस्ट्रेशन भी नही कराते

अफसर किराये के वाहनों का
करते हैं इस्तेमाल


कैमूर में करीब नब्बे फ़ीसदी अफसर किराए के वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद वाहनों का व्यवसायिक निबंधन नहीं कराया जाता है। कई बार आदेश निर्देश होने के बावजूद भी वाहनों के व्यवसायिक निबंधन को लेकर वाहन चालक और मालिक के अलावा विभागीय अफसर भी ध्यान नहीं देते हैं। वाहनों की चेकिंग का कोई डर नहीं होने की वजह से नियमों की अनदेखी करते हुए वाहन चालक अपने वाहनों को चला रहे हैं। बता दें कि सरकारी महकमों में चल रहे अधिकांश वाहनों का रजिस्ट्रेशन कमर्शियल के रूप में नहीं कराया गया है। सरकार की ओर से हर महीने करीब 25 से तीस हजार रुपए वाहनों के लिए भुगतान किया जाता है।

कलेक्ट्रेट में पार्क की गई अफसर की गाड़ी।

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