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माध्यमिक शिक्षक संघ ने डीईओ ऑफिस का किया घेराव, जमकर की नारेबाजी
दुर्गावती प्रखंड के नियोजित शिक्षकों की 17 फरवरी से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण स्कूलों में पठन-पाठन ठप पड़ गया है। इससे छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। मालूम हो कि नियोजित शिक्षक समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। शिक्षक व सरकार की इस लड़ाई में गरीबों के बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। जो बच्चे नियमित विद्यालय जा रहे थे अब वे स्कूल बंद रहने के कारण खेलने में समय व्यतीत कर रहे हैं। प्रखंड में कुल 82 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 55 विद्यालयों में ताले लटके हुए हैं। हड़ताल के कारण नये सत्र में बच्चों का नामांकन कार्य भी अधर में लटक सकता है। इससे अभिभावकों के समक्ष न ‘’घर के न घाट के’’ वाली स्थिति पैदा हो गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि शिक्षकों की हड़ताल अधिक दिनों तक चलती है, तो बच्चो का भविष्य अधर में लटक सकता है। उनका नामांकन निजी विद्यालयों में भी करा पाना संभव नहीं हो पाएगा। क्योंकि अधिकाश निजी विद्यालयों में 20 अप्रैल तक ही नामांकन लिया जाता है। वहीं कई अभिभावक का कहना है कि बच्चों का दाखिला निजी विद्यालयों में कराना बेहतर है। अभिभावक फिलहाल हड़ताल समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारी बोलने में परहेज कर रहे हैं।
शिक्षकों की हड़ताल से अधर में लटका बच्चों का भविष्य
जिला शिक्षा कार्यालय का घकराव करते माध्यमिक शिक्षक।
सरकार के स्तर से हो सार्थक पहल
जिला शिक्षा कार्यालय में सैकड़ों की संख्या में जुटे शिक्षकों ने जमकर नारेबाजी भी की। शिक्षकों ने कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन बंद है। स्कूलों में ताले लटक रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है। शिक्षकों ने इस दौरान मांग किया कि सरकार के स्तर से सार्थक पहल कर न्यायोचित मांगों को स्वीकार कर हड़ताल समाप्त करते हुए शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस दौरान आश्वासन दिया कि शिक्षकों का निलंबन विभागीय निर्देश निर्देश के आलोक में वापस लिया जाएगा। शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। कार्यरत अवधि के दौरा बकाए वेतन भुगतान पर भी सार्थक बातचीत हुई।