‘सामा खेलेय गेलियै हो भैया, चकेबा लय गेल चोर’

Katihar News - सामाचक सामाचक अइयह हो, जोतला खेत में ढेपा फोरि-फोरि खैयह हो..., सामा खेलेय गेलि ये हो भैया चकेवा लय गेल चोर...सामा खेलब...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:01 AM IST
Katihar News - 39sama kheleya galiye ho bhaiya chakeba liy gail chor39
सामाचक सामाचक अइयह हो, जोतला खेत में ढेपा फोरि-फोरि खैयह हो..., सामा खेलेय गेलि ये हो भैया चकेवा लय गेल चोर...सामा खेलब गे बहिना भैया जीवइथ हजार... जैसे लोकगीत ग्रामीण क्षेत्रों में गूंजने लगे हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाले भाई बहन के अटूट स्नेह व प्रेम पर आधारित सामाचकेबा पर्व की तैयारी शुरू हो गई है। गीतों के माध्यम से बहन भाई के सुख, समृद्धि एवं लंबी उम्र की कामना करती है। लोग अभी भी पुरानी संस्कृति और सभ्यता को जीवंत रखने की तत्पर से जुटे हुए हैं। पर्व की तैयारी को लेकर दिन भर महिलाएं व बालिकाएं सामा-चकेबा खजन चिड़िया, ढोलकिया, सतभैया, भंवरा भंवरी, सखारी, वृंदावन, कचबचिया, चुगला आदि की मिट्‌टी की प्रतिमा बनाकर उसे रंग-रोगन कर सजातीं हैं। बता दें कि कल अर्थात 12 नवंबर को पूर्णिमा के दिन सामा-चकेबा है। भाई-बहनों के प्रेम का प्रतीक माना जाने वाला पर्व सामा चकेबा पूजा को लेकर हर तरफ उमंग है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल सप्तमी से आरंभ होकर पूर्णिमा तक मनाया जाता है। यह पर्व महिलाएं और बालिकाएं अपने भाई की समृद्धि और दीर्घावधि जीवन की कामना को लेकर मनाती हैं। जिसमें सामा, उसके भाई चकेवा खंजन सहित अन्य चिड़िया, वृंदावन के साथ अन्य मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती है। महिलाएं झुंड में एक जगह बैठकर गीत के माध्यम से अपने-अपने भाई के नाम लेकर बड़प्पन का गुणगान और उसके दीर्घायु की कामना का गीत गाकर उत्सव मनाती हैं। सबसे अधिक रोमांचकारी दृश्य विसर्जन के समय दिखता है। जब इधर की बाते उधर (चुगली) करने वाले की काल्पनिक प्रतिमूर्ति चुगला बनाकर उसमें आग लगाकर जलाया जाता है। जलाते समय महिलाएं कहती हैं कि जैसे-जैसे चुगला जले वैसे-वैसे मेरे भाई की उम्र बढें।

कटिहार में सामा-चकेबा पर्व पर गीत गातीं महिलाएं।

भाई को नया चूड़ा, दही और गुर खिलाती है बहन

बहन पूर्णिमा की रात में अंतिम पूजन कर मूर्तियों को जल में विसर्जन तथा नये धान का चूड़ा दही और गुड़ अपने भाईयों को खिलाकर पूजा समाप्त करतीं हैं। कहा जाता है कि कृष्ण की बेटी सामा और बेटे चकेवा में काफी प्रेम था। लेकिन बेटी सामा पर व्यभिचार का आरोप लगने के कारण कृष्ण ने चिड़िया बन जाने का श्राप दे दिया था। जिसके कारण वह खंजन चिड़िया बन गई थी। लेकिन भाई चकेवा के प्रेम और प्रयास से वह पुनः अपने पूर्व के स्वरूप में आ गईं।

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