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उद्घाटन के चार माह बाद भी नहीं शुरू हुआ एआरटी सेंटर, अधिकारी बने हैं बेपरवाह

3 वर्ष पहले
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सदर अस्पताल परिसर में सांसद निधि से निर्मित एआरटी सेंटर के भवन का उद्घाटन एक साल चार माह पहले हुआ था। इसके बाद भी यहां अब तक मरीजों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण इस भवन में इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य नहीं हो सका है। जिसकी वजह से मशीन नहीं लग पाई है। जिसके कारण इसका लाभ एड्स मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। विभाग अपने पास राशि नहीं का हवाला दे रहा है। संबंधित विभाग के डीपीएम कहते हैं कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा और इस सेंटर से मरीजों को सुविधा मिलने लगेगी। विदित हो कि तत्कालीन सांसद तारिक अनवर ने इस भवन का उद्घाटन 16 जून 2017 को किया था।

ज्ञात हो कि सांसद निधि से करीब 15 लाख रुपए की लागत से यह भवन बना है। जिसमें दो बड़े हॉल के अलावा दो कमरे भी हैं। वहीं डाॅक्टर को बैठने के लिए बाहर में अलग से कमरा बनाया गया है। भवन तो बन गया लेकिन इस भवन निर्माण में तकनीकी स्वीकृति में बिजली कार्य का इस्टीमेट नहीं था जिसके कारण भवन मेें अभी तक वायरिंग का कार्य नहीं हुआ है। जिसके चलते यह समस्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है।

रास्ते का भी है अभाव

एआरटी सेंटर का भवन का उद्घाटन तो हो गया लेकिन मरीजों को सेंटर तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। कच्चे रास्ते पर पत्थर के टुकड़े बिछे हुए हैं। विभाग के द्वारा आपैचारिकता पूरी करने के लिए बिना किसी व्यवस्था का ही भवन का उद्घाटन कर दिया गया।

इसको लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी जनहित की योजनाओं के प्रति तनिक भी गंभीर नहीं हैं। जिसका जीता-जागता उदाहरण यह सेंटर है। लोगों ने कहा कि इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

उद्घाटन का लगा शिलापट्‌ट।

मेडिकल कॉलेज में चल रहा है सेंटर
फिलहाल अभी यह सेंटर कटिहार मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। जहां एड्स विभाग के कर्मचारी कार्य करते हैं। विदित हो कि इस एआरटी सेंटर का निर्माण आज से दस वर्ष पूर्व ही होना था और सदर अस्पताल परिसर में ही बनना था। लेकिन कटिहार मेडिकल कॉलेज के द्वारा पीपीपी मोड पर कटिहार मेडिकल कॉलेज में स्थापित इस बात पर किया गया कि यहां पर इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों की जांच के लिए किसी भी तरह का पैसा नहीं लगेगा। सिविल सर्जन ने कहा कि मेडिकल कॉलेज से रोगी को काेई लाभ नहीं मिलता था। जिले में करीब तीन सौ से अधिक एड्स के मरीज हैं। इसमें बारसोई व बलरामपुर में इनकी संख्या अधिक है।

सेंटर में बंद पड़ा ताला।

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