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फसल बुआई के पूर्व अवश्य कराएं मिट्‌टी जांच

एक वर्ष पहले
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कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से प्रखंड के द्वाशय गांव में किसान चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर सुशील कुमार सिंह, डॉ. रमाकांत सिंह, डॉ. पंकज कुमार मुख्य रूप से मौजूद थे। कृषि वैज्ञानिक सुशील कुमार सिंह ने गरमा धान प्रबंधन विषय पर विस्तार से चर्चा की। गरमा धान में लगने वाले रोग, रोग के लक्षण एवं निदान किसानों को बताया। तना छेदक कीट, पौधे का पीलापन खेत में कहीं-कहीं पौधे पूरी तरह जलकर बैठ जाना आदि लक्षण के कारणों पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया। डॉ रमाकांत सिंह ने मिट्टी एवं पोषक तत्व पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी फसल की बुवाई के पूर्व खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। मिट्टी में 16 प्रकार के आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जो किसी भी पौधे के लिए जरूरी होती है। इस पोषक तत्वों में से किस पोषक तत्वों की कमी है यह मिट्टी जांच के बाद ही पता चलता है। जांच उपरांत ही खेतों में पोषक तत्व एवं उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। डॉ पंकज कुमार ने मखाना की खेती पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। उन्होंने कहा कि कटिहार क्षेत्र के पूर्वी हिस्से में मखाना की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। वर्तमान समय में मखाने के पौधे की रोपनी की जा रही है। इसमें खासकर खेत की तैयारी तथा पोषक तत्वों की जरूरत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने किसानों को रसायनिक उर्वरकों की जगह जैविक का प्रयोग पर जोर देना चाहिए।

इसके लिए उन्होंने सभी किसानों को वर्मी कंपोस्ट इकाई की स्थापना करने को कहा। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक स्वीटी कुमारी, किसान सलाहकार अशोक कुमार, कृषक सुरेश यादव, जोगिंदर यादव, मदन यादव, राजेंद्र यादव, शांति देवी, सविता देवी सहित अन्य किसान उपस्थित थे।

किसान चौपाल में मौजूद किसानों को जानकारी देते कृषि वैज्ञानिक।
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