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अब महात्मा गांधी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के नाम से जानी जाएगी टीकापट्‌टी डायट

Katihar News - बापू की यादों को सहेजने की कवायद सरकार की ओर से शुरू कर दी गई है। कटिहार और पूर्णिया जिले के सीमा पर स्थित जिला...

Jan 16, 2020, 07:55 AM IST
Katihar News - now mahatma gandhi district education and training institute will be known as tikpatty diet
बापू की यादों को सहेजने की कवायद सरकार की ओर से शुरू कर दी गई है। कटिहार और पूर्णिया जिले के सीमा पर स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान टीकापट्टी जो कटिहार के अधीन है अब महात्मा गांधी जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान टीकापट्टी के नाम से जाना जाएगा। विभाग की घोषणा के बाद टीकापट्टी फिर से बापू की याद को ताजा करने का काम करेगा। जिला मुख्यालय से 49 किलोमीटर की दूरी पर टीकापट्टी आजादी की लड़ाई का प्रमुख केन्द्र रहा था। 1934 में भूकंप की त्रासदी के बाद चंदा एकत्रित कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 10 अप्रैल 1934 को टीकापट्टी आए थे। विकास यात्रा के दौरान 15 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार टीकापट्टी पहुंचे थे। उसके बाद से लगने लगा कि अब इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने की कवायद शुरू होगी। जिस पर अमल होना शुरू हो गया है।

शिक्षा विभाग के उप सचिव ने कार्यालय आदेश जारी कर बदले हुए नाम पर अमल का दिया निर्देश

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान टीकापट्‌टी।

टीकापट्‌टी में आए थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, यहां रुके भी थे शिक्षा विभाग के उप सचिव अरशद फिरोज ने कार्यालय आदेश जारी करते हुए कहा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का टीकापट्टी में आगमन हुआ था। जहां गांधी जी रुके भी थे। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान टीकापट्टी कटिहार के अधीन है। बिहार सरकार गांधी जी के जन्म के 150वें वर्ष को प्रभावी तरीके से मना रही है। गांधी जी से जुड़े स्थलों को विकसित किया जा रहा है। साथ हीं गांधी विचार के प्रसार के लिए कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे है। इसी क्रम में सरकार के निर्णय के अनुसार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान टीकापट्‌टी का नामकरण महात्मा गांधी के नाम पर किया गया। आदेश की निर्गत तिथि से यह अब जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान महात्मा गांधी जिला एवं शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान के नाम से जाना जाएगा।

टीकापट्‌टी के लोग इसे मानते हैं ऐतिहासिक धरोहर के रूप में

1934 में बिहार में प्रलयकारी भूकंप के पीड़ितों के सहायतार्थ महात्मा गांधी बिहार आए थे। बिहार यात्रा के अंतिम दिनों में असम जाने के क्रम में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए गांधी जी 10 अप्रैल 1934 को टीकापट्‌टी पहुंचे थे। टीकापट्‌टी में बापू ने यहां के क्रांतिकारियों से गुफ्तगू भी की थी और यहां की जनता के साथ खुला अधिवेशन भी किया था। जिस स्थान पर महात्मा गांधी ने आज आमलोगों को संबोधित किया था। उनकी याद में वहां भी चबूतरा गांधी सदन बना हुआ है। जब गांधी जी टीकापट्‌टी आये थे तो उनके स्वागत में गांधी सदन के सामने विशाल गांधी द्वार बनवाया गया था। इस विशाल गांधी द्वार को भी टीकापट्‌टी के लोग अपना ऐतिहासिक धरोहर मानते हैं।

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